न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन ने सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता की स्वास्थ्य रिपोर्ट में ऐसी चिकित्सा स्थिति नहीं दिखाई देती कि उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए।
न्यायमूर्ति जयचंद्रन ने कहा कि याचिकाकर्ता का भाई अशोक कुमार फरार है और याचिकाकर्ता बिना विभाग के मंत्री के पद पर है, इसलिए वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘याचिकाकर्ता के सगे भाई और सह-अभियुक्त अशोक कुमार का सहयोग नहीं करना भी प्रवर्तन निदेशालय की इस आशंका को सही ठहराता है कि, आरोपी के देश छोड़कर भागने का खतरा है जिससे मुकदमे की सुनवाई में बाधा उत्पन्न हो सकती है। उपरोक्त कारणों से, यह अदालत याचिकाकर्ता को जमानत देने की इच्छुक नहीं है। इसलिए याचिका खारिज की जाती है।’
बालाजी को 14 जून को ईडी ने नकदी के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था। जिस समय यह घोटाला हुआ, वह पूर्ववर्ती अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) सरकार में परिवहन मंत्री थे।
बालाजी के खिलाफ नवीनतम घटनाक्रम आयकर (आईटी) विभाग द्वारा मंत्री और उनके समर्थकों से जुड़े तमिलनाडु भर में 40 से अधिक स्थानों पर आठ दिवसीय छापेमारी के दो सप्ताह बाद आया है। यह कदम मई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2022 के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज करने के बाद आया, जिसमें कथित भर्ती घोटाले में बालाजी और अन्य के खिलाफ कार्यवाही को खारिज कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने संदिग्ध बहु-करोड़ परिवहन नौकरी घोटाले की नए सिरे से जांच का निर्देश देने वाले एचसी के आदेश को रद्द कर दिया और ईडी को अपनी चल रही जांच जारी रखने की अनुमति दी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) के अनुरोध पर बाद के चरण में विचार किया जा सकता है।
चेन्नई (भाषा)। धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तमिलनाडु के बिजली मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को करूर (चेन्नई) स्थित उनके कार्यालय और सचिवालय में छापेमारी के बाद गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले मद्रास उच्च न्यायालय ने वी. सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका आज खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यदि उन्हें जमानत पर रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।