Wednesday, July 24, 2024
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रोहित पवार की कंपनी के खिलाफ जारी ‘क्लोजर आर्डर’ को अदालत ने किया रद्द

मुंबई (भाषा)। बम्बई उच्च न्यायालय ने शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार द्वारा संचालित कंपनी बारामती एग्रो लिमिटेड के एक हिस्से के खिलाफ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पारित क्लोजर आर्डर (बंद करने का आदेश) आज रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति नितिन जामदार के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने कहा कि […]

मुंबई (भाषा)। बम्बई उच्च न्यायालय ने शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार द्वारा संचालित कंपनी बारामती एग्रो लिमिटेड के एक हिस्से के खिलाफ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पारित क्लोजर आर्डर (बंद करने का आदेश) आज रद्द कर दिया।

न्यायमूर्ति नितिन जामदार के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने कहा कि एमपीसीबी के आदेश को ‘असंगत’ होने के कारण रद्द किया जाता है। खंडपीठ ने कहा कि आदेश ‘जल्दबाजी में’ पारित किया गया था।

पीठ ने एमपीसीबी को कंपनी को शुरू में जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के आधार पर मामले की नए सिरे से सुनवाई और निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

एमपीसीबी ने 27 सितंबर को ‘क्लोजर ऑर्डर’ नोटिस जारी किया था, जिसमें 72 घंटे के भीतर बारामती एग्रो लिमिटेड के हिस्से को बंद करने का निर्देश दिया गया था। कंपनी ने इस नोटिस को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

पीठ ने इस महीने की शुरुआत में एक अंतरिम आदेश में एमपीसीबी को ‘क्लोजर’ नोटिस का निष्पादन नहीं करने का निर्देश दिया था।

कंपनी ने वकील अक्षय शिंदे के माध्यम से दायर अपनी याचिका में आरोप लगाया कि यह आदेश “राजनीतिक प्रभाव के कारण और वर्तमान राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता कंपनी के निदेशक, रोहित पवार पर दबाव डालने के लिए पारित किया गया है जो महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य हैं। शरद पवार के पोते रोहित पवार बारामती एग्रो लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हैं। वह अहमदनगर जिले के कर्जत-जामखेड विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

बारामती एग्रो पशु एवं कुक्कुट चारा निर्माण, चीनी और इथेनॉल विनिर्माण, बिजली के सह-उत्पादन, कृषि-वस्तुओं, फलों और सब्जियों और डेयरी उत्पादों के व्यापार के क्षेत्र में काम करता है।

याचिका में दावा किया गया कि कंपनी ने इकाई को संचालित करने के लिए समय-समय पर आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की हैं और उसे 2022 में पर्यावरण मंजूरी भी दी गई थी।

एमपीसीबी ने दावा किया कि पुणे स्थित इकाई के नियमित निरीक्षण के दौरान कुछ अनियमितताएं पाई गईं।

सितंबर में, एमपीसीबी ने याचिकाकर्ता कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसका जवाब दिया गया और सुनवाई भी हुई।

याचिका में कहा गया है, ‘हालांकि, एमपीसीबी के अधिकारी याचिकाकर्ता कंपनी द्वारा प्रस्तुत किसी भी स्पष्टीकरण या साक्ष्य पर गौर करने में विफल रहे और 27 सितंबर को एक आदेश जारी करके इकाई की विनिर्माण गतिविधियों को 72 घंटे के भीतर बंद करने का निर्देश दिया।’

याचिका में कहा गया है कि एमपीसीबी का उक्त आदेश मनमाना, गैरकानूनी और भेदभावपूर्ण प्रकृति का था। इसमें कहा गया है कि यह आदेश याचिकाकर्ता के व्यवसाय या व्यापार करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इकाई को बंद करने का निर्देश देना एक अत्यंत कठोर और असंगत कार्रवाई थी।

याचिका में कहा गया है कि इकाई 2007-2008 से काम कर रही है और तब से किसी भी पर्यावरणीय उल्लंघन का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इसमें कहा गया है कि जिस इकाई को बंद करने का आदेश दिया गया है वह उसी परिसर में स्थित है, जहां कंपनी द्वारा संचालित चीनी कारखाना है तथा पानी और बिजली की आपूर्ति साझा तौर पर जुड़ी हुई है।

इसमें कहा गया है कि इस इकाई के बंद होने से चीनी कारखाने को बिजली और पानी की आपूर्ति बंद हो जाएगी जिससे अपूरणीय क्षति होगी। एमपीसीबी ने दावा किया था कि बंद करने का आदेश गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघनों के कारण जारी किया गया था और कंपनी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही थी।

एमपीसीबी ने पहले दायर अपने हलफनामे में इन आरोपों का खंडन भी किया कि आदेश पूर्व निर्धारित और प्रेरित तरीके से पारित किया गया था।

उसने कहा कि गंभीर उल्लंघनों को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की गई। कंपनी मानदंडों का पालन करने के लिए मुक्त है।

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