Thursday, April 3, 2025
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इंटरव्यू से घबराए MLC काशीनाथ यादव ने बुज़ुर्ग गायक बाला राजभर को जातिसूचक गालियाँ और धमकी दी, लोगों ने कहा PDA का विनाश कर...

वयोवृद्ध बिरहा गायक बाला राजभर के एक साक्षात्कार से बौखलाए पूर्व एमएलसी और समाजवादी पार्टी के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष काशीनाथ यादव अपने चेले सुरेन्द्र यादव और उनके गुंडों के साथ बाला जी के गाँव गए और उन्हें जातिसूचक गालियाँ दी और धमकाया। बाला जी के पुत्र रमेश प्रसाद राजभर ने फोन से इसकी सूचना दी। वह डरे हुये हैं। काशीनाथ का गैंग कभी भी उन पर हमला कर सकता है। इस घटना से बिरहा जगत में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि काशीनाथ यादव के व्यवहार से हम सभी आहत हैं। अगर उन्होंने गलत किया है तो उन्हें अविलंब बालाजी से माफी मांगनी चाहिए। इस घटना से अखिलेश यादव द्वारा चलाये जा रहे पीडीए आंदोलन को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बलिया : 27 साल पहले बनी सड़क झाड़ियों में हुई गुम ग्रामीण ढूंढ रहे हैं रास्ता

सरकार नहरों के जीर्णोद्धार, मरम्मत के साथ-साथ नहरों के दोनों पटरियों पर सुगम आवागमन व्यवस्था की खातिर सड़क बनाने पर जोर दे रही है। दूसरी ओर बलिया जिले के बांसडीह तहसील क्षेत्र के सुखपुरा से सावन सिकड़िया, अपायल गांव तक जाने वाली महज पांच किलोमीटर दूरी की नहर की पटरी उपेक्षा का दंश झेलते हुए वीरान बनी हुई है। मानो वह इलाके के मानचित्र से बाहर हो चली है। जबकि इस नहर की पटरी वाली सड़क से कई गांवों के लोगों का आवागमन होता रहा है। यूं कहें कि यह लोगों की जीवन रेखा रही है। दिन हो या रात, पैदल सहित वाहनों का भी आवागमन होता रहा है, लेकिन ईट का खड़ंजा जो तकरीबन तीन दशक पहले बिछाया गया था (जिसके अंश कहीं कहीं दिखाई दे जाते हैं) उखड़ने के साथ ही अपना वजूद खो चुका है। सड़क का वजूद गुम हुआ तो उसका स्थान धीरे-धीरे जंगली झाड़ियों ने ले लिया। झाड़ियों के आगोश में  नहर की पटरी ही गुम हो गई।

बलिया : उचित कीमत नही मिलने से किसानों ने कहा कि अगले साल नहीं करेंगे टमाटर की खेती

बलिया। किसान की आय का आधार खेती में उपजी फसल होती है। बीज डालने से लेकर बाजार में बेचने तक के लिए उसे कड़ी...

बलिया: किसान की पिटाई के आरोप में चार लेखपालों समेत छह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

बलिया (भाषा)। जिले के बांसडीह तहसील में खतौनी का सत्यापन करने को लेकर कथित रूप से एक किसान की पिटाई के मामले में चार...

मोहनसराय में हाइवे का सीवरेज उफनने से ग्रामीणों में आक्रोश

यूपी की सरकार पिछले चार सालों से चिल्ला-चिल्लाकर कह रही कि सड़कें गड्ढा मुक्त हो गयी हैं। शेष गड्ढे जो किसी कारण वश बन...

आखिर कौन करता है मुसहरों के साथ भेदभाव

मुसहर अपने को अन्य दलित जातियों से ऊंचा मानते हैं और मौक़ा मिले तो वैसा ही करने से नहीं चूकते जैसे तथाकथित बड़ी जातियां उनके साथ करती हैं। इन्हीं गाँवों में घूमते समय मैंने मुसहरों को डोम लोगों के साथ भेदभाव करते देखा और अपने नल से पानी भरने से साफ़ तौर पर मना करते हुए देखा।

इस एक बात पर दुनिया से जंग जारी है

दूसरा हिस्सा गोरखपुर में पदस्थापना अगस्त दो हजार आठ में हुई तो वसीम साहब से मुलाक़ात के कई अवसर मिले। बरेली आने-जाने का मौक़ा...

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