Tuesday, July 23, 2024
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बलिया: किसान की पिटाई के आरोप में चार लेखपालों समेत छह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

बलिया (भाषा)। जिले के बांसडीह तहसील में खतौनी का सत्यापन करने को लेकर कथित रूप से एक किसान की पिटाई के मामले में चार लेखपालों समेत छह लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। इससे पहले एक लेखपाल ने उक्त किसान के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। […]

बलिया (भाषा)। जिले के बांसडीह तहसील में खतौनी का सत्यापन करने को लेकर कथित रूप से एक किसान की पिटाई के मामले में चार लेखपालों समेत छह लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। इससे पहले एक लेखपाल ने उक्त किसान के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार बांसडीह कोतवाली क्षेत्र के करम्मर गांव निवासी राजेश सिंह शुक्रवार को दोपहर बांसडीह तहसील में खतौनी का सत्यापन कराने गए थे। इस दौरान उनकी लेखपाल से विवाद व मारपीट हो गई। इस मामले में लेखपाल राजेश राम की शिकायत पर राजेश सिंह के विरुद्ध शुक्रवार की रात भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की सुसंगत धारा में मामला दर्ज किया गया और एक अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया।

किसान के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थक आक्रोशित हो गए तथा उन्होंने बांसडीह तहसील में धरना दिया।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) शिव नारायण वैस ने बताया कि उप जिलाधिकारी राजेश कुमार गुप्ता ने लेखपाल के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया।

उन्होंने बताया कि राजेश सिंह की शिकायत पर शनिवार की रात्रि चार लेखपाल सहित कुल छह व्यक्तियों के विरुद्ध नामजद और अज्ञात के विरुद्ध आईपीसी की सुसंगत धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

अभी एक दिन पहले जहां पूरा देश 23 दिसंबर को किसान दिवस के रूप में मना कर किसानों के प्रति सम्मान का भाव प्रकट कर रहा था। राष्ट्रीय किसान दिवस पर किसानों के सम्मान में पूरे देश में बड़े पैमाने पर सरकारी आयोजन किए गए। दूसरी तरफ आज बलिया में बांसडीह तहसील में खतौनी का सत्यापन करने को लेकर कथित रूप से एक किसान की लेखपालों द्वारा पिटाई कर दी गयी। लेकिन किसानों पर होने वाले हमले, जबरिया अधिग्रहित की जाती ज़मीनों से एक बात तो साफ हो चुकी है कि सरकार को किसानों की कोई परवाह नहीं है। दिल्ली के बार्डर पर 13  महीनों तक तीन कृषि काले कानून को निरस्त किए जाने के लिए आंदोलनरत रहे। तीन कृषि कानून तो वापस  लिए गए लेकिन एमएसपी की मांग आज तक पूरी नही हुई है।

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