गोदी मीडिया काल में ग्रामीण पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ मुकेश चंद्राकर की हत्या सचमुच कष्टप्रद और चिंताजनक है। वर्ष 2014 के बाद अभिव्यक्ति को लेकर जिस तरह से पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं, वह सभी के सामने है। पत्रकारों पर हमले करवाना और उनकी हत्या करवा देना सत्ताधीशों के लिए बहुत सामान्य बात है। बस्तर जंक्शन के मुकेश चंद्राकर की हत्या निडर पत्रकारिता करने वालों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा करती है। इस देश में अब विधायिका, कार्यपालिका न्यायपालिका और चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया पूरी तरह से फासीवाद के चपेट में है और इनका अस्तित्व नाममात्र का रह गया है।
छत्तीसगढ़ के विश्रामपुर में शीर्षस्थ नेताओं ने राज्य सम्मेलन में फूटपरस्ती, विभाजन और साम्प्रदायिकता को पराजित करने के लिए व्यापक पैमाने पर एकता कैसे बनाई जाए, इसके लिए रणनीति तैयार करने के लिए यह आयोजन बुलाया गया है।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने मांग की है कि रेल विस्तार के कारण हुए नुकसान को ठीक किया जाए और बांकी मोंगरा से मड़वाढोढा एवं पुरैना गांव जाने वाले मुख्य मार्ग को तत्काल ठीक कराया जाए, अन्यथा रेल विस्तार के कार्य को अनिश्चित काल के लिए बंद रखा जाएगा।
झारा शिल्प का इतिहास खँगालने पर पता चलता है कि इसके सूत्र भारत की महान हड़प्पा सभ्यता से जुड़ते हैं। इसकी बनावट और रूपाकार भारत की प्राचीन रूप कलाओं की तरह विविधतापूर्ण और जीवन से भरी हुई है। रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी हर गतिविधि और जीवन में काम आनेवाली हर चीज को इस कला में देखा जा सकता है। प्रकृति, लोक संस्कृति, आमोद-उत्सव के अनेक आयामों का चित्रण इनकी बनावट में है।