अस्पताल की अमानवीयता और लापरवाही ने ली एक प्रतिभाशाली गायिका मोनिका की जान

संजीव खुदशाह

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किसी भी देश या क्षेत्र के विकास का मापदंड उसकी आधारभूत सुविधाओं जैसे शिक्षा,रोज़गार और स्वास्थ्य सुविधाओं से नापा जा सकता है। आये दिन सोशल मीडिया पर हम सरकारी अस्पतालों की चरमराती व्यवस्था की खबरें पढ़ते हैं। इधर सरकारी अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने की पूरी प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद आम इंसान मरीज के इलाज के बारे में सोच ही नहीं सकेगा। चिकित्सा क्षेत्र अब मानवीयता का पेशा नहीं रह गया बल्कि कमाई का जरिया बन चुका है। डॉक्टर्स इतने असवेदंशील हो चुके हैं कि उसे अपने मरीज से ज्यादा अपनी फीस का ध्यान रहता है। एक आम इंसान के लिए बीमारी एक अभिशाप से ज्यादा कुछ नहीं है। यही बात छत्तीसगढ़ की लोकगायिका मोनिका खुरसैल के साथ हुई।

छतीसगढ़ की उभरती लोकगायिका मोनिका ने अभी अपने कैरियर की शुरुआत की ही थी।अचानक 16 नवंबर की सुबह मोनिका बिलासपुर स्थित अपने घर के बाथरूम में थी और इसी दौरान उसे सिर में तेज दर्द होने हुआ। वो चिल्लाने लगीं। उनकी बुआ ने दरवाजा खोला। फिर उसे तुरंत ही बिलासपुर स्थित अपोलो हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां सिटी स्कैन करने के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उसे ब्रेन हेमरेज हुआ है। वहां उन्हें रायपुर रिफेर किया गया। लेकिन अस्पतालों की अव्यवस्था और लूटतंत्र ने मोनिका के जीवन का अंत कर दिया।

परिवार के सदस्य उसे तुरंत रायपुर के रामकृष्ण हॉस्पिटल में लेकर गए। वहां डॉ. डीएस साहू से मुलाकात हुई। डाॅ. डीएस साहू ने बताया कि इसका तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा जिसमें ₹5 लाख खर्च आएगा। यही ऑपरेशन सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में भी हो सकता है। जहाँ खर्च कुछ कम होगा ₹3.50 लाख। किसी भी सामान्य आदमी के लिए तीन लाख कोई छोटी रकम नहीं होती। पैसे की तुरंत व्यवस्था करना मुश्किल था। लेकिन किसी तरह व्यवस्था कर उसे डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय जो एक  सरकारी अस्पताल है में लेकर चले गए। वहां पर तय हुआ की शुक्रवार सुबह 10:00 बजे ऑपरेशन होगा। उसके पहले पैसे जमा कर दिए जाएं।

मोनिका के पिता ने बताया कि तीन लाख जमा किये जा चुके थे। 50 हजार निकालने के लिए एटीएम लिमिट खत्म हो चुकी थी। फिर भी पैसे की व्यवस्था कहीं और से की जा रही थी। डॉक्टर ने ऑपरेशन थिएटर के बाहर स्ट्रेचर में लेटी हुई मोनिका को वापस लौटा दिया। कहा कि अब ऑपरेशन नहीं हो सकेगा। परिवार ने खूब मिन्नत की हाथ पैर जोड़े। लेकिन डॉ. साहू नाराज हो गए। कहा कि दो दिन बाद मैं सोमवार को ऑपरेशन करूंगा। मोनिका की हालत बिगड़ने लगी। रात में मोनिका के हाथों में सूजन दिखाई दिया। जिसमें स्लाइन लगाया गया था। जांच किया गया तो पता चला कि उसके फेफड़े में पानी भर गया है। यह बात डॉक्टर को बताई गई। डॉक्टर ने 19 तारीख शनिवार की दोपहर को आनन-फानन ऑपरेशन किया। उसके बाद कहा कि अब उसे वेंटिलेटर की जरूरत पड़ेगी जिसकी व्यवस्था इस सरकारी अस्पताल में नहीं है। आप या तो एम्स ले जाएँ या रामकृष्ण हॉस्पिटल ले जाएँ। एम्स ले जाने के लिए काफी प्रयास किया गया लेकिन वहां के डॉक्टर ने कहा कि पूरी डिटेल अधीक्षक को बताएँगे, तभी हम एम्स में ले सकते हैं।

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समय बीतने लगा और परिवार ने हड़बड़ी में बच्ची को फिर रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया गया। यहां बताया गया है कि 21 दिन तक इलाज चलेगा। शुरुआत के 72 घंटे क्रिटिकल होंगे और ऑब्जरवेशन में रखा जाएगा। यहाँ पहुँचने पर डॉक्टर ने  बताया  कि मोनिका का राइट साइड पैरालाइजड हो गया है।

जहाँ साढ़े तीन लाख की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया था वहीँ इस अस्पताल में 1 दिन का खर्च लगभग एक लाख होने की जानकारी दी गई। लेकिन कोई भी माँ-बाप किसी भी स्थिति में अपने बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश करता है। मोनिका के मित्रों ने सोशल मीडिया में क्राउडफंडिंग करके पैसे जुटाने की कोशिश करने लगे। इस पर रामकृष्ण हॉस्पिटल का प्रबंधन नाराज हो गया और उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में रामकृष्ण हॉस्पिटल का नाम जा रहा है इससे उनकी बदनामी हो रही है। उसे हटाया जाए लेकिन यह संभव नहीं था। क्योंकि सोशल मीडिया में किसी का कंट्रोल नहीं होता है। लोग अपने स्तर पर मदद करते रहे।

इसके बाद सोमवार 21 तारीख को चिकित्सकों ने परिवार को बुलाकर बताया कि मोनिका का ब्रेन डेड हो गया है। सिर्फ एक पर्सेंट काम कर रहा है। आप अगर चाहे तो उनका अंग दान कर सकते हैं। अंगदान करवाने के लिए करीब 1.30 घंटे तक काउंसलिंग की गई, जिसमें मैं भी था। परिवार को पहले से सदमा था और वह इस तरह से अंगदान करने के लिए अपने आपको तैयार नहीं कर पा रहा था। डॉक्टर ने यह भी बताया की धड़कन अभी चल रही है। उसके बाद रात 10:00 बजे डॉक्टरों ने कहा कि मोनिका की बॉडी को ले जाएं लेकिन परिवार इसके लिए सहमत नहीं हुआ। परिजनों ने कहा कि कोई भी चमत्कार हो सकता है जब तक उसकी धड़कन चल रही है हम उसे नहीं ले जाएंगे। इसके बाद 23 तारीख कि सुबह मोनिका को पूर्ण रूप से मृत घोषित कर दिया गया।

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मोनिका  का अंतिम संस्कार आज बिलासपुर में किया गया। जहाँ उनके पिता प्रमोद खुरसैल ने अंतिम विदाई और श्रद्धांजलि देने के लिए भजन संध्या का आयोजन रखा। जहाँ उन्होंने आओ सजा लें आज को,कल का पता नहीं  भजन गाकर अपनी बेटी मोनिका को विदा दी।

मोनिका खुरसैल ने छत्तीसगढ़ में अनेक स्टेज शो किये थे। अभी हाल में 15 नवम्बर को उनका एक नया गाना मेरी ख़ुशी  रिलीज हुआ। उसने अरपा के पैरी धार और बाबा साहब  जैसे कई गीतों में अपनी आवाज़ दी है।

मोनिका खुरसैल छत्तीसगढ़ी फिल्म दुनिया में एक उभरती हुई गायिका, कलाकार थी। उसके कुछ एल्बम भी रिलीज हुए थे। मोनिका के साथ ऐसी घटना किसी सदमे से कम नहीं है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि

 

संजीव खुदशाह

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