Thursday, April 3, 2025
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गाँव और पहाड़ों का पर्यावरण बिगाड़ रहा आधुनिकीकरण

'बचपन में हरियाली के बीच बैठकर अक्सर मैं जिस हिमालय पर्वत को देखा करता था, आज कई वर्षों बाद जब मैं वापस उसे देखने...

जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले के कई गाँव अभी भी वंचित हैं सड़क की सुविधा से

भारत एक सुंदर देश होने के साथ-साथ कई छोटी बड़ी समस्याओं से भी उलझा हुआ है। इन समस्याओं में सबसे अहम सड़कों का नहीं...

लड़कियों की शिक्षा के प्रति उदासीन समाज का विकास थोथा है

बिहार और झारखंड सरकार भी बालिका शिक्षा को लेकर कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है। इसके बावजूद आज भी ग्रामीण क्षेत्र में अशिक्षा, जागरूकता, गरीबी, पिछड़ेपन, रूढ़ियां आदि की वजह से लड़कियों को शिक्षा के अधिकार से अपने ही परिवार वाले महरूम रखते हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से 65 किमी दूर साहेबगंज प्रखंड अंतर्गत पंचरुखिया गांव की लड़कियों को पहले पढ़ाया नहीं जाता था।

कुपोषित बच्चों से कैसे बनेगा स्वस्थ समाज और सशक्त देश?

यूएनडीपी द्वारा प्रकाशित मानव विकास सूचकांक, 2021 में भारत का स्थान 132वां है, जो पड़ोसी मुल्कों से भी नीचे है। इसके साथ ही वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में भारत का स्थान 116 देशों में 101वां है, जो 2020 में 90वां था। यह गिरावट इंगित करता है कि अपने देश में खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद वितरण के स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार एवं सक्षम तंत्र की लुंज-पुंज स्थिति के कारण सभी नागरिकों को भरपेट भोजन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

घर सँवारने में ही नहीं आर्थिक जिम्मेदारियाँ निभाने में भी योगदान देती हैं महिलाएँ

बीज बोने से लेकर फसल कटाई के बीच की अवधि में फसल का पूरा ध्यान महिलाएं रखती हैं। वह उन्हें खरपतवार और कीट पतंगों के प्रकोप से बचाने के लिए उसका ध्यान रखती हैं। वह फसल को अपने बच्चों की तरह पालती हैं। भागुली देवी पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि भले समाज कृषि के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को सम्मानित नहीं करता हो, लेकिन समाज को यह बखूबी पता है कि हम महिलाओं के बिना कृषि का काम अधूरा है।

जम्मू : कृषि एवं पशुपालन में विशेष पहचान रखने वाला सरहदी गांव मंगनाड

सब्ज़ी उत्पादन के अलावा हमारा और कोई व्यवसाय नहीं है। हमारे पास जमीन के कुछ टुकड़े हैं, जिसपर हमने सब्जियां लगाना शुरू किया। हम हर सीजन पर कम से कम तीन से चार लाख रुपए की सब्ज़ियां आसानी से बेच देते हैं। वही इसी गांव में कुछ ऐसे भी किसान हैं जो सीजन पर कम से कम कई लाख की सब्ज़ियां बेच देते हैं। वह बताते हैं कि सब्जी उत्पादन में थोड़ी मेहनत लगती है।

महिलाओं के प्रति रूढ़िवादी सोच को कब बदलेगा समाज

साइंस और टेक्नोलॉजी हो या फिर अर्थव्यवस्था, हर क्षेत्र में आज भारत विश्व के विकसित देशों के साथ आंख से आंख मिलाकर बातें करता है। लेकिन भारतीय समाज विशेषकर भारत का ग्रामीण समाज आज भी वैचारिक रूप से पिछड़ा हुआ है। शहरों की अपेक्षा गांव में महिलाओं के साथ इस दौर में भी शारीरिक और मानसिक हिंसा आम बात है।

उत्तराखंड : उपलब्ध नौकरियों की तुलना में अधिक लोग बन रहे श्रम-बल का हिस्सा

राज्य के लिए बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। रोज़गार के सीमित अवसरों के कारण बेरोजगारों की संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है, जिसके चलते युवाओं द्वारा परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से अन्य राज्यों का रुख किया जा रहा है। इससे राज्य में पलायन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।

दमघोंटू सामाजिक रीति-रिवाजों को तोड़कर महिलाएं बन रहीं परिवर्तन की अग्रदूत

महिलाएं समाज में किसी भी प्रकार के परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उन्हें कमज़ोर समझने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, उनकी आवाज़ को सुनने और विकास की सभी प्रक्रियों में भागीदारी निभाने की आज़ादी देने की ज़रूरत है, क्योंकि यदि हम उन्हें अनदेखा करते हैं, तो हमें एक सभ्य समाज की कल्पना करना बेमानी होगी।

दौर 5G का पर मोबाइल नेटवर्क के लिए आज भी चढ़ना पड़ता है पहाड़

कभी-कभी ऐसा लगता है कि एक भारत में दो देश बस रहा है। एक वह भारत जो शहरीकरण का रूप है, जहां आधुनिक टेक्नोलॉजी...

किशोरावस्था में ज्यादा जरुरी है मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 04 अक्टूबर से मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह मनाने की शुरुआत की है, जो 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य...

थोथी बहस नहीं, स्त्रियों के प्रति मानवीय व्यवहार से ख़त्म होगी दहेज की मानसिकता

किसी समय में दहेज का अर्थ इतना वीभत्स और क्रूर नहीं था, जितना आज के समय में हो गया है। दरअसल दहेज, शादी के समय पिता की ओर से बेटी को दिया जाने वाला ऐसा उपहार है, जिस पर बेटी का अधिकार होता है। पिता अपनी बेटी को ऐसी संपत्ति अपनी स्वयं की इच्छा से देता था और अपनी हैसियत के मुताबिक देता है।

शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ रहीं हैं गाँव की लड़कियाँ

मुजफ्फरपुर (बिहार)। जीवन में सफलता प्राप्त करने और कुछ अलग करने के लिए शिक्षा अर्जित करना सभी के लिए महत्वपूर्ण है। यह स्त्री एवं...

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण का माध्यम बना इंटरनेट

कहा जाता है कि महिला सशक्तीकरण एक ऐसी अनिवार्यता है, जिसकी अवहेलना किसी भी समाज और देश के विकास की गति को धीमा कर...

जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होतीं किशोरियां

प्राकृतिक घटनाओं में जिस तरह से एक के बाद एक बदलाव आए हैं, वह जलवायु परिवर्तन का ही परिणाम हैं। अचानक तूफ़ानों की संख्या...

राजस्थान के बिंझरवाड़ी में जल संकट का समाधान ज़रूरी

अक्सर यह भविष्यवाणी की जाती है कि भविष्य में अगर कोई विश्व युद्ध हुआ तो वह पानी के मुद्दे पर लड़ा जाएगा। पानी की...

शिक्षा को रोजगार परक बनाने की आवश्यकता

सेन्टर फाॅर माॅनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की जनवरी 2023 में जारी रिर्पोट के अनुसार, भारत में दिसंबर 2021 तक बेरोजगारों की संख्या 5.3 करोड़ है, जिसमें...

हमें संकट में डाल देती है हमारी लापरवाही

दक्षिण पश्चिमी मानसून भारत में कुल वर्षा का लगभग 86 प्रतिशत योगदान देते हैं। भारत में मानसून का समय जुलाई से लेकर लगभग सितम्बर...

हरित आवरण से ही जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण संभव

 मौसम की मार झेलते किसान एक बार और आस खो चुके हैं। खरीफ फसलों की तैयारी बेकार हो गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड...

बाढ़ की विभीषिका से खानाबदोश हो जाती है जिंदगी, थम जाता है गाँव का विकास

मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ से तबाही के आंकड़े को देखें तो साहेबगंज प्रखण्ड में लगभग 10 पंचायत हैं, जो नदी के किनारे आबाद हैं। उसमें हुस्सेपुर रत्ती में लगभग 4000 हजार मवेशियों को बाढ़ आने के बाद काफी परेशानी होती है। इन पंचायतों में एक बड़ी आबादी नदी किनारे जीवन यापन करती है।

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