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उन्नीसवीं सदी में फुले जितना साहसी, त्यागी और निडर नेता दूसरा कोई नहीं हुआ

 पिछले कुछ वर्षों से भारत में हिंदुत्ववादी ताकतों के एजेंडे के अनुसार जातिवाद और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को आक्रामक रूप से बढ़ावा दिया गया है। महात्मा जोतीबा फुले का जन्म लगभग आज से 200 वर्ष पूर्व हुआ था और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का जन्म फुले की मृत्यु के एक वर्ष बाद हुआ था। कहने का मतलब कि इनकी जयंती और पुण्यतिथि मनाने के अलावा, वस्तुतः कोई सक्रिय जाति-विरोधी या सांप्रदायिक-विरोधी आंदोलन मौजूद नहीं है। अपने जीवन का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा इन आंदोलनों में सक्रिय रूप से बिताने के बावजूद, मैं 11 और 14 अप्रैल को उनकी जयंती के अवसर पर यह लेख इन दो महान विभूतियों को एक आत्म-निरीक्षणात्मक श्रद्धांजलि के रूप में लिख रहा हूँ।

वाराणसी में 76 वर्षों में पहली बार डीएनटी समुदाय ने मनाई अंबेडकर जयंती 

छिहत्तर वर्षों में पहली बार विमुक्त घुमंतू नट समुदाय ने बाबा साहब की जयंती मनाई। नट समुदाय दशकों से सामाजिक अन्याय,  भेदभाव और हाशिये पर रहने की पीड़ा झेल रहा है। संविधान निर्माता बाबा साहब के आदर्शों से प्रेरित होकर इस समुदाय ने अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो उन्हें याद किया।

 वाराणसी : बाबा साहब अम्बेडकर को महापरिनिर्वाण दिवस पर याद करते हुए हुई ‘उड़ान’ ट्रस्ट की स्थापना

वाराणसी के बेलवाँ नट बस्ती में 6 दिसंबर को बाबा साहब के महापरिनिर्वाण दिवस पर याद करते हुए नट समुदाय संघर्ष समिति के संयोजक ने उड़ान - मानवाधिकार और सामाजिक न्याय संस्थान नामक ट्रस्ट की स्थापना की। यह संगठन मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और विमुक्त घूमन्तु समुदायों के कल्याण के लिए काम करेगा।  

भाजपा और आरएसएस की हिंदुत्ववादी मानसिकता स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के लिए सबसे बड़ा खतरा है

बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने देश में हिंदुत्ववादी ताकतों के मंसूबों को भापते हुए उस समय जो चिंता व्यक्त की थी वह अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक स्थिति में पहुँच चुकी है। ऐसे में हमें आपसी भाई चारे को बनाये रखते हुए बीजेपी और आरएसएस के लोगों से दूर रहने की जरूरत है।

डॉ अंबेडकर के खिलाफ अपराधों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है योगी सरकार

मूलभूत अधिकारों में समानता का अधिकार,शोषण के विरुद्ध अधिकार,धार्मिक स्वतंत्रता, संस्कृति और शिक्षा, संपत्ति और संवैधानिक उपचारों का अधिकार शामिल है। इनमें से धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था से जुड़ी स्वतंत्रता के हनन की घटनायें आए दिन अखबारों की सुर्खियां बनती हैं। ताजा मामला संविधान निर्माता और भारत रत्न से सम्मानित बाबा भीमराव अम्बेडकर की बार- बार तोड़ी जाती प्रतिमा और उनके विचारों से प्रभावित लोगों लोगों का है।

सात समंदर पार ले जाइके, गठरी में बांध के आशा….

वर्तमान पीढ़ी का एक गंभीर संकट जड़हीनता है। ऐसा इसलिए कि अधिकांश 'राजपत्र' और 'कनेक्टिविटी' से घिरी हुई जीवन शैली का आनंद लेते हैं,...

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