Wednesday, June 3, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

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बेअदबी और ईशनिंदा की आड़ में दलितों के खिलाफ जातिगत पूर्वाग्रहों को छिपाने की गंदी कोशिश

मूलतः पाकिस्तान में दलितों में चूड़ा समुदाय से सम्बंधित है जो सफाई पेशे से जुड़े हुए है और सामंती जातिवादी समाज के अपमान का शिकार है। उन्होंने पाकिस्तान में ईसाई धर्म अपनाया था ताकि जाति के अपमान से बच सके और भारत में इसी कारणवश आर्य समाज के प्रचारक अमीचंद शर्मा द्वारा १९२५  स्वच्छता और हाथ से मैला ढोने में लगे समुदायों के लिए 'बाल्मीकि' नाम लगा दिया गया था ताकेि उन्हें ईसाई होने से बचाया जा सके।

मंदिर प्रवेश मत करो दोस्तों  (डायरी 21 अक्टूबर, 2021) 

कल पूरे दिन एक सवाल मेरी जेहन में बना रहा। देर रात तक उस सवाल ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा। सवाल बीते 15 अक्टूबर,...

हिंसा का उत्सव जायज नहीं (डायरी 12 अक्टूबर, 2021)

किसी महिला के आठ-दस-बारह हाथ कैसे हो सकते हैं? पहली बात तो यह कि ऐसा हो ही नहीं सकता है क्योंकि हर बांह का कंधे से जुड़ाव आवश्यक है। हर बांह के लिए एक विशेष हड्डी की आवश्यकता होगी जिसका संबंध कंधे से हो। फिर हर बांह की मोटाई होती है। ऐसे में कंधे से एक से अधिक बाहों का जुड़ाव कैसे मुमकिन है?

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