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Nari Shakti Vandan Bill

सुनाली के ऊपर अत्याचार करनेवाले किस भ्रूण हत्या की बात कर रहे हैं और किन नारियों का वंदन ?

भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को हर रूप में चुनाव जीतने का औज़ार बना लिया। जो अधिनियम तीन साल पहले पारित हो गया था उसे एक बार फिर परिसीमन के लिए संसद में लाया गया। मौजूदा संख्या में भागीदारी न देने की बेईमानी को परिसीमन की आड़ में छुपाने की संघी-भाजपाई मंशा का पर्दाफाश हो गया तब बेहिसाब पैसा खर्च करके प्रधानमंत्री मोदी भ्रूण हत्या का रोना रो रहे हैं। लेकिन सवाल कई और भी हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की निवासी तीन महीने की गर्भवती घरेलू सहायिका सुनाली को जबरन बांग्लादेश की सीमा पार कराया गया। बिना किसी अपराध को उसे बांग्लादेश की जेल में रहना पड़ा। वहीं जेल में उसने अपने बच्चे को जन्म दिया। एक जटिल कानूनी लड़ाई के बाद वह अपने देश वापस आ पाई है। मोदी ने महिलाओं की गरीबी, लाचारी और भावनाओं का दोहन किया और उन्हें एकमुश्त वोटर के रूप देखा। आज देश में महिलाओं की दुर्दशा का कोई अंत नहीं। सबसे बड़ी बात कि संसद की मौजूदा स्थिति में महिलाओं को आरक्षण भाजपा देने को ही तैयार नहीं। ऐसे में किस भ्रूण हत्या की बात करके रोना-पीटना चल रहा है इसे समझा जाना चाहिए। जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक डॉ सुरेश खैरनार की खुली चिट्ठी।

नारी शक्ति वंदन के दावे के बावजूद दो चरणों के चुनाव में महज आठ प्रतिशत महिला उम्मीदवार

लोकसभा के दो चरणों के चुनाव हो चुके हैं लेकिन कुल उम्मीदवारों में महिलाएँ केवल आठ प्रतिशत हैं। यह नारी शक्ति वंदन मंशा और सामाजिक न्याय की अवधारणा के लिए गंभीर संकेत है।

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