जब तक इन निर्जन-दूरस्थ स्थानों पर बसे कमजोर समुदाय के लोगों के साथ अन्याय और अत्याचार होता रहेगा बीहड़ों और जंगलों में बाग़ी पैदा होते रहेंगे। सरकार की उपस्थिति, अन्याय अपमान और अत्याचार से संरक्षण, सरकारी योजनाओं का लाभ, नौकरी और रोजगार में हिस्सेदारी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को सुनिश्चित कराकर ही लोगों के मन में कानून के प्रति सम्मान पैदा किया जा सकता है। लोकतंत्र की सभी संस्थाए जैसे कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका अपनी पहुंच के साथ-साथ भरोसा पैदा करके इन क्षेत्रों में बसे लोगों को मुख्यधारा में जोड़ने और बागी होने से रोक सकती हैं।
फिल्म मिमी में अंग्रेज दम्पति को मेडिकल रिपोर्ट से जब यह पता चलता है कि सरोगेट मदर के पेट में पल रहा बच्चा एबनॉर्मल पैदा होगा तो वे दलाल द्वारा ये मैसेज भेजकर, कि मिमी से बोल दो कि वह बच्चे का एबॉर्शन करा दे, खुद चुपके से अपने देश भाग जाते हैं। दो बच्चे पैदा हो जाने पर एक आस्ट्रेलियन दम्पति ने एक बच्चा सरोगेट के पास ही छोड़ने को लेकर विवाद किया था जिसको लेकर भारतीय संसद में इस विषय पर गम्भीरता से कानून बनाने को लेकर चर्चाएँ हुईं। मातृत्व जैसी प्राकृतिक व्यवस्था पर पूरी तरह इन्सान और तकनीक नियन्त्रण स्थापित नहीं कर सकते लेकिन पैसे देकर कोख किराये पर लेने वाले लोग बेहद स्वार्थी ढंग से व्यवहार करते हैं जिसके कारण गरीब महिलाओं का शोषण बढ़ जाता है।
देवरिया जनपद में बिहार राज्य की सीमा पर स्थित ‘स्याही नदी’ अपने नाम और वर्तमान स्थिति के कारण एक अनोखी नदी है। सन1916-17 में अंग्रेजों के जमाने में की गयी चकबंदी में बीस किमी लम्बाई में लगभग 300 मीटर चौड़ाई वाली महानदी स्याही के समस्त प्रवाह क्षेत्र को एक राजस्व ग्राम ‘मोहाल स्याही नदी’ के रूप में दर्ज कर उसके भीतर किसानों के कृषि कार्य हेतु चक आवंटन करना आश्चर्यचकित करने वाली घटना है।