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प्रेमचंद और बहुजन साहित्य की अवधारणा (डायरी, 30 जुलाई, 2022)

समाज को कैसा होना चाहिए? इसका निर्धारण साहित्य के जरिए किया जाता रहा है। साहित्य की जिम्मेदारी यह है कि वह समाज की परिभाषा को…
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इश्क ना बाड़ी उपजै, प्रेम न हाट बिकाए… (डायरी 19 जून, 2022) 

जो इश्क करना नहीं जानते, उनके लिए यह वाकई में कोई अनोखी बात होगी। लेकिन जो करते हैं, उनके लिए तो यह बिल्कुल अलहदा है। वैसे इश्क होता भी अलग…
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आंकड़ों की कारीगरी और नरेंद्र मोदी का झूठ (डायरी 23 अक्टूबर, 2021)

देश में राजनीति करने के तरीके बदल गए हैं। आजकल तो लोग सोशल मीडिया पर अपने संदेशों आदि के जरिए राजनीति करने लगे हैं। यह एकदम नया फार्मूला है।…
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क्या आपने आधा बाजा पढ़ा है ?

अगर नहीं तो जरूर पढ़िए आधा बाजा रामजी यादव का कथा संग्रह है जिसमें कुल जमा 8 कहानियां है, सूदखोर के पांव, अंतिम इच्छा, अंबेडकर होटल, एक सपने…
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मेरे लिए लिखने का मतलब निर्बल और सताए हुए लोगों के साथ खड़ा होना है (कथाकार,इतिहासकार सुभाषचन्द्र…

मेरी कहानियों में स्त्री-पुरुष प्रेम प्रधान कहानियां बहुत कम हैं। उसका कारण यह भी है कि इस क्षेत्र में मैंने बहुत कम मशक्कत की है। बातचीत…
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