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Temple
धार्मिक सेक्टर में अवसरों का पुनर्वितरण बने चुनावी मुद्दा
आज हमारे देश के मंदिरों में अकूत संपत्ति पड़ी हुई। इस संपत्ति का भोग एक खास वर्ग ब्राम्हण ही कर रहा है। यदि धार्मिक सेक्टर में जितनी आबादी-उतना हक का सिद्धांत लागू हो जाता है तो मंदिरों के ट्रस्टी बोर्ड से लेकर पुजारियों की नियुक्ति में अब्राह्मणों का वर्चस्व हो जाएगा और वे मठों–मंदिरों की बेहिसाब संपदा के भोग का अवसर भी पा जाएंगे और आर्थिक रूप से मजबूत भी होंगे।
ज्ञानवापी सर्वेक्षण की रिपोर्ट सौंपने के लिए ASI ने और 15 दिन का समय मांगा
वाराणसी (भाषा)। ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सौंपने के लिए भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) ने अदालत से शुक्रवार को 15 दिन का...
पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित होने के बावजूद नष्ट हो रही हैं दुर्लभ मूर्तियाँ
जब हम इटियाथोक ब्लॉक के पास खरगूपुर गाँव पहुंचे, तब दोपहर बीत चुकी थी और अधिकतर चीजें उनींदी थीं। मंदिर से पहले एक लहलहाता तालाब था, जिसे देखकर अच्छा लगा। हम जैसे ही मंदिर की ओर चले वैसे ही लोटा, फूल और प्रसाद वाले कुछ दुकानदार पास आए और इन सब चीजों को लेने का आग्रह करने लगे, लेकिन हमने उनको उपेक्षित करते हुये आगे का रास्ता लिया। मंदिर के मुख्य द्वार पर दो नगाड़ची बैठे थे। हमको जजमान समझकर उन्होंने अपने-अपने नगाड़ों को ठोंका। लेकिन यह काफी नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट लिंग का मतलब समझती होगी, यह अपेक्षित है (डायरी 18 मई, 2022)
धर्म का जीवन में अहम स्थान है। इससे मैं भी इंकार नहीं करता। लेकिन मेरे लिए धर्म का कोई महत्व नहीं है। फिर चाहे...

