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सोशल मीडिया: जगत सा अराजक या अराजकता का जगत
(राजू पाण्डेय स्वभाव से बहुत सहज और सरल थे लेकिन बेहद जिद्दी और जुनूनी। वे कभी अपने नाम या शोहरत के लिए न तो...
वाट्सएप ग्रुप में केपी सक्सेना का मिर्जा
आजकल व्यंग्यकार न जाने किस दुनिया में जीता है। वह ज्यादातर टीवी में रहता है, नहीं तो वह वाट्सएप समूह में रहता है। वह...
भविष्य की भयावह तस्वीर :1984
नई ज़बान की शब्दाबली की संरचना को समझने की जरूरत है। इसके लिए 1984 आपको एक परिशिष्ट भी देता है। उपन्यासों में ऐसे प्रयोग बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। इसे साहित्य में एक नये प्रयोग के तौर पर भी आप देख सकते हैं जो तर्कसंगत लगता है।
सदियों में पैदा होते हैं हीरालाल
बहुत दिनों तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझते हुए अंततः चच्चा चले गए। चच्चा माने भोजपुरी के महान बिरहिया हीरालाल यादव। मुझे उनके नजदीक...
भारत के ब्राह्मणों से कम नहीं हैं पश्चिम के श्वेत (डायरी 5 अक्टूबर, 2021)
बीता हुआ कल सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, दुनिया भर के लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहा। देर शाम करीब सवा नौ बजे सोशल मीडिया...

