Monday, January 12, 2026
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वाराणसी में सर्व सेवा संघ को बचाने के लिए 100 दिन के सत्याग्रह का समापन

विनोबा जयंती, 11 सितम्बर 2024 को राजघाट वाराणसी में सर्व सेवा संघ परिसर के पुनर्निर्माण के संकल्प के साथ शुरू हुआ 100 दिवसीय सत्याग्रह - न्याय के दीप जलाओ - के आज 19 दिसम्बर 2024 को 100 दिन पूरे हो गए

वाराणसी : नट बस्ती के लोगों का अंगूठा लगवाने के बावजूद कोटेदार नहीं देता राशन

विकास के दावे करने वाली भाजपा सरकार को शायद यह एहसास नहीं है कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के सेवापुरी ब्लॉक के नहवानीपुर गांव की नट बस्ती में सरकारी योजनाओं की असल स्थिति कुछ और ही है।

Varanasi : तीन किलोमीटर की रेंज के खिलाफ़ टोटो चालकों का सत्याग्रह

वाराणसी में ई-रिक्शा चालकों ने तीन किलोमीटर की रेंज के खिलाफ़ सत्याग्रह शुरू किया है। चालकों का कहना है कि इस नियम से उनकी आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा है और वे रोजगार की संभावनाओं को सीमित कर रहा है। अनशन पर बैठे चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस नियम को वापस लिया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। 

सरकार द्वारा बनाए गए शौचालय फेल: सामुदायिक शौचालय में 4 साल से लटका है ताला, खुले में जा रहे लोग

वाराणसी के सजोई गांव में सरकारी योजनाओं के तहत बनाए गए शौचालयों की स्थिति अत्यंत निराशाजनक है। चार साल पहले बनाए गए शौचालयों का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है. गांव में एक सामुदायिक शौचालय भी बनाया गया था, लेकिन उसमें चार साल से ताला लटका हुआ है। यह ताला बंद होने के कारण गांव वालों के पास उस शौचालय का उपयोग करने का कोई विकल्प नहीं है। घर में शौचालय की अनुपस्थिति के कारण महिलाओं को अंधेरे में खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। यह स्थिति न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।

Varanasi : प्रशासन के डर से नट समुदाय के लोग नहीं कर पा रहे अपना पारंपरिक काम

बनारस की नट बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए आज़ादी का अमृत महोत्सव महज एक दिखावा बनकर रह गया है। वर्षों से उपेक्षित इस समुदाय के लोग, जो पारंपरिक कला और नृत्य के माध्यम से जीवन यापन करते हैं, आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

Mirzapur: राजगढ़ ब्लॉक के मुसहरों को हटाने की फिराक में है जंगल विभाग

मिर्जापुर के राजगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत दरवान के अंतर्गत वनवासी मुसहरों की बस्ती है। इन मुसहरों का एक आसरा था जंगल, जहां से वनोपज और लकड़ी इकट्ठा करने के बाद बेचकर जीवनयापन करते थे, आज वन विभाग इन्हें जंगल से भगाते हैं और वनोपज लेने पर रोकते हैं। दूसरे रोजगार के अभाव में इनका जीवन कठिन हो गया है। देखें ये ग्राउंड रिपोर्ट

Varanasi : देश में अमीर अरबपति हो रहा है लेकिन गरीब दो वक्त की रोटी के लिए मुहाल है

विकास के इस दौर में वाराणसी के कोटवां इलाके की महिलाएं आज भी 4 या 6 रुपए में मजदूरी करके अपना गुजारा करती हैं। देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट

Varanasi : कमरतोड़ महंगाई के दौर में बनारसी साड़ी के मजदूर तंगहाल में गुजार रहे हैं जीवन

उत्तर प्रदेश में वाराणसी की बनारसी साड़ियाँ विश्व प्रसिद्ध है। लेकिन इन दिनों साड़ी बनाने वाले बुनकरों की हालत बेहद खराब हो गई है। बुनकरों ने अपनी स्थिति को लेकर क्या कहा? देखिये यह ग्राउंड रिपोर्ट

मिर्ज़ापुरी कजरी और लोककवि बफ्फत शेख एक दूसरे के पर्याय हैं

मिर्जापुरी कजरी को आज जो भी मुकाम हासिल है उसमें बप्फ़त का केंद्रीय योगदान है। कहा जा सकता है कि वह मिर्जापुरी कजरी के पितामह थे। वह वैसे ही थे जैसे आगरे में नज़ीर अकबराबादी थे।

सोनभद्र में सूख गये हैं नाले, बढ़ती जा रही है पानी की किल्लत

हर घर नल और नल में जल का दावा करने वाली डबल इंजन की सरकार की वास्तविकता सोनभद्र जिले के सुकृत और उसके आसपास के गांवों में पहुँचने पर मालूम हुई।

Loksabha Election 2024 : PM मोदी के विकसित भारत में रोज़गार की राह देख रहे ग्रामीण !

भाजपा के 10 वर्ष के शासनकाल में गरीब जनता सुविधाओं की आस देखते हुए गरीब ही रह गई।
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