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पेपर लीक रोकने हेतु आ सकता है सख़्त कानून, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई   

नई दिल्ली: केंद्र सरकार पेपर लीक मामले से निपटने के लिए लोकसभा में एक विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस विधेयक का नाम सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक बताया गया है। विधेयक को इसी वर्ष फरवरी माह में पेश किया जा सकता है। यह कानून, केंद्रीय एजेंसियों की परीक्षाओं और विश्वविद्यालय […]

नई दिल्ली: केंद्र सरकार पेपर लीक मामले से निपटने के लिए लोकसभा में एक विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस विधेयक का नाम सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक बताया गया है। विधेयक को इसी वर्ष फरवरी माह में पेश किया जा सकता है। यह कानून, केंद्रीय एजेंसियों की परीक्षाओं और विश्वविद्यालय परीक्षाओं सहित विभिन्न परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए लाया जायेगा। साथ-साथ सार्वजनिक परीक्षा में साइबर सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने हेतु एक तकनीकी समिति का गठन किया जाएगा।

इस विधेयक में पेपर लीक में दोषी पाए जाने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रस्ताव है। नए कानून में पेपर लीक के दोषियों को 3 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। वहीँ 10 साल जेल तक की सजा दी जा सकती है।

आने वाले इस विधेयक के जरिये हजारों योग्य सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों और विद्यार्थियों को सुरक्षा मिलेगी। एक उम्मीद यह भी है कि, इस विधेयक से परीक्षाओं में पारदर्शिता और बढेगी। ताकि पेपर लीक के कारण जो नुकसान होता है, उसे रोका जा सके।

बजट सत्र के आरम्भ में संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि, सरकार परीक्षाओं में गड़बड़ियों के विषय में युवाओं की चिंताओं से अवगत हैं। ऐसे में परीक्षा सम्बंधी समस्याओं से निपटने के लिए एक नया कानून बनाने का निर्णय लिया गया है।

विधेयक के दायरे में आ सकती है ये परीक्षाएं

सरकार के इस पेपर लीक विरोधी विधेयक के दायरे में यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी, जेईई, एनईईटी और सीयूईटी जैसी परीक्षाएं आयोजित की जा सकती है। वहीँ, अन्य परीक्षाओं को भी इस विधेयक के अंतर्गत शामिल किया जा सकता है।

आगाह कर दें कि, पेपर लीक का मामला देश का जटिल मुद्दा बनता नजर आ रहा है। ऐसे में, पेपर लीक विरोधी कानून लाने की दरकार भी है। गुजरात जैसे राज्य इस समस्या के समाधान के लिए कानून लेकर आए है। वहीँ, बीते साल परीक्षा पत्र लीक होने के कारण हरियाणा में ग्रुप-डी पदों के लिए परीक्षा, राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा, गुजरात में कनिष्ठ लिपिकों के लिए परीक्षा और बिहार में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा जैसी अन्य परीक्षाएं रद्द की जा चुकी है।

बता दें कि, जब परीक्षाएं रद्द की जाती है, तब परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की उम्मीदें तबाह हो जाती है। फिर, विद्यार्थियों की हड़तालें, धरना प्रदर्शन सड़कों पर नज़र आता है। लेकिन, पेपर लीक मामले में विद्यार्थियों को मिलता क्या है? परीक्षा के लिए अगली तारीख या तारीख पर तारीख। ऐसें में पेपर लीक का मुद्दा हल नहीं हो पाता।

परीक्षा में धांधली, अपराध करने वाले होंगे निशाने पर

ज्ञात हुआ है कि, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल में इस विधेयक को मंजूरी दी है। प्रस्तावित विधेयक में विद्यार्थियों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। इस विधेयक परीक्षाओं में धांधली, अपराध, माफिया और साठगांठ में पाए गए लोगों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान है। साथ-साथ सरकारी अधिकारी भी यदि परीक्षा की गड़बड़ियों में शामिल होते हैं तब उन पर कार्रवाई की जाएगी। विधेयक में एक समिति कम्प्यूटरीकृत परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाने हेतु सिफारिशें देगी।

ध्यातव्य है कि, इस विधेयक से संयुक्त प्रवेश परीक्षा और केंद्रीय विश्वविद्यालयों परीक्षाओं को सुरक्षित बनाया जा सकेगा। साथ-साथ अन्य परीक्षाओं की ओर भी ध्यान दिया जायेगा। ताकि परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के भविष्य से खिलवाड़ न हो सके।

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