नवल किशोर कुमार
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अदालतों में कहानियां लिखी नहीं, गढ़ी जाती हैं (डायरी 20 मई, 2022)
बीते 17 मई को सीनियर डिवीजन जज रवि कुमार दिवाकर ने एक आयुक्त अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र को बर्खास्त कर दिया था और सर्वे की रपट दाखिल करने का निर्देश शेष दो आयुक्त अधिवक्ताओं को दिया था। लेकिन कल अजय कुमार मिश्र ने अपनी रपट पेश कर दी। मजे की बात यह कि अजय कुमार मिश्र ने अपनी रपट मीडिया को भी उपलब्ध करा दी, जिसमें कहा गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंदू धर्म से जुड़ी कई चीजें मिली हैं। बाकायदा अजय कुमार मिश्र ने सूची दी है।
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किसके लिए हैं हिंदी के ‘अखबार’? (डायरी 28 फरवरी, 2022)
रांची संस्करण के जैकेट पर यूक्रेन-रूस युद्ध की खबर है और पहले पृष्ठ पर झारखंड की ‘महत्वपूर्ण’ खबरें। महत्वपूर्ण को कोट्स में रखने के पीछे आशय यह है कि हर अखबार के लिए कौन सी खबर महत्वपूर्ण है, अखबार के मालिक लोग तय करने लगे हैं। पहले यह काम संपादक करते थे। अब पटना संस्करण के जैकेट पर यूक्रेन-रूस की खबर नहीं है।
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भारत के नाम पर बाइडेन की हंसी का निहितार्थ (डायरी 27 फरवरी, 2022)
भारतीय पत्रकार ललित झा ने बाइडेन से पूछा था कि भारत आपके महत्वपूर्ण सामरिक सहयोगी देशों में से एक है, तो क्या रूस के सवाल पर वह आपके साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ है? ललित झा के सवाल को पहली बार में या तो बाइडेन समझ नहीं पाए या फिर उन्हें लगा होगा कि भारतीय पत्रकार ने भूलवश ऐसा सवाल किया है। उन्होंने सवाल दुहराने काे कहा। ललित झा ने फिर वही सवाल दुहराया। बाइडेन ने बिना हंसते हुए कहा कि अभी तक तो भारत हमारा महत्वपूर्ण सामरिक सहयोगी नहीं बना है, वैसे इस मामले पर आज ही भारत से बात करता हूं। बाइडेन के इतना कहते ही सब हंस पड़े।
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अलविदा 2021! (डायरी 31 दिसंबर, 2021)
मैं तो अरुणाचल प्रदेश को देख रहा हूं, जिसके ऊपर चीन की निगाह है। इसी तरह मेघालय और मिजोरम भी है। नगालैंड भी इन्हीं राज्यों में से एक है। तो मामला यह है कि पूर्वोत्तर के प्रांत चीन के निशाने पर हैं और भारतीय हुकूमतों को उन इलाकाें में अपनी फौज को बनाए रखने के लिए बाध्य रहना पड़ा है। परंतु, इस परिस्थिति के बीचों-बीच पूर्वोत्तर के आम अवाम हैं जो अमन चाहते हैं।
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और अब प्रधानमंत्री की करोड़टकिया ‘कार’ (डायरी 30 दिसंबर, 2021)
मैं तो अनुमान से कह रहा हूं कि प्रधानमंत्री के विशेष वाहन की कीमत कम से कम 22 करोड़ होगी। वजह यह कि इसमें सुरक्षा उपकरण लगाए गए होंगे। इसे मिसाइल रोधी बनाया गया होगा। बुलेटप्रुफ तो खैर होगी ही। अब इस बात की चर्चा का कोई मतलब नहीं है कि देश का प्रधानमंत्री कितने करोड़ की गाड़ी में चढ़ता है। भाई, वह देश का केवल प्रधानमंत्री थोड़े ना है। वह तो इस देश रूपी कंपनी का सीईओ है। उसे बेशकीमती सूट पहनने का हक है और बेशकीमती गाड़ियों पर चढ़ने का भी। लोग हैं कि खामख्वाह सवाल उठाते रहते हैं।
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नरेंद्र मोदी सरकार की सीनाजोरी और मुंहचोरी (डायरी 30 नवंबर, 2021)
किसान जिस एमएसपी गारंटी के कानून की बात कर रहे हैं, उसे लेकर देश का कारपोरेट जगत सदमे में है। दरअसल, यदि यह कानून बन गया तब किसानों को हर हाल में न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त होगा। ऐसे में वे खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मूल्य में किसानों की उपज नहीं खरीद सकेंगे।
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बातें कहानियों की, खिस्से भारत के मोदी की (डायरी 29 अक्टूबर, 2021)
बचपन में मां सुनाया करती थी कहानियां। तब मां उन्हें कहानियां नहीं कहती थी, खिस्सा कहती थी। कहानियों से पहले जरूर यही शब्द रहा होगा। कहानी शब्द तो मेरे हिसाब से खड़ी हिंदी के अस्तित्व में अने के बाद ही आया है। कहना शब्द से कहानी को गढ़ दिया गया।
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हिंसा का उत्सव जायज नहीं (डायरी 12 अक्टूबर, 2021)
किसी महिला के आठ-दस-बारह हाथ कैसे हो सकते हैं? पहली बात तो यह कि ऐसा हो ही नहीं सकता है क्योंकि हर बांह का कंधे से जुड़ाव आवश्यक है। हर बांह के लिए एक विशेष हड्डी की आवश्यकता होगी जिसका संबंध कंधे से हो। फिर हर बांह की मोटाई होती है। ऐसे में कंधे से एक से अधिक बाहों का जुड़ाव कैसे मुमकिन है?
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज साहब, मेरी भैंसों ने आपका क्या बिगाड़ा है? डायरी (2 सितंबर, 2021)
मैं तो आपके द्वारा कल दिए गए एक फैसले से संबंधित खबर का अवलोकन कर रहा हूं, जिसे दिल्ली से प्रकाशित जनसत्ता ने पहले पन्ने पर प्रकाशित किया है। शीर्षक है - गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए : हाईकोर्ट। शीर्षक को देखकर सबसे पहले तो यही लगा कि यह एक बयान है जिसे आरएसएस के किसी नेता ने जारी किया है। वजह यह कि इस तरह की मांग वे आए दिन करते रहते हैं। लेकिन यह मांग इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज ने की है, यह देखकर मैं चौंका।

