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अगर टीपू सुलतान हिन्दू राजा होते तो क्या करती भाजपा
महाराष्ट्र के मालेगाँव में नवनिर्वाचित उपमहापौर निहाल अहमद ने शान-ए-हिन्द टीपू सुल्तान का एक चित्र अपने कार्यालय में लगाया। इसकी जानकारी मिलने के बाद शिवसैनिकों ने अधिकारियों का हस्तक्षेप करवाकर उसे हटवा दिया। कुछ विरोध प्रदर्शन भी हुए। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने चित्र हटाए जाने को अनुचित बताते हुए कहा कि टीपू का मैसूर के लिए उतना ही योगदान है जितना छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्ट्र के लिए है। इस बात का भाजपा ने घोर विरोध दर्ज करते हुए कांग्रेस कार्यालय पर पथराव किया।
मोहम्मद दीपक : देश में बिगड़ती दोस्ती के हालात में भाईचारा बनाए रखना
लोकतंत्र को एक सांप्रदायिक राष्ट्रवादी देश में बदलने की इस कोशिश के दौरान, उन्होंने खासकर मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नई-नई भाषाएं और नारे बनाए। अब हालात बहुत खराब हैं। सामाजिक कॉमन सेंस मुसलमानों के खिलाफ नफरत से भरा है और यह दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन हिंदू राष्ट्रवाद के मानने वालों की फैलाई गई नफ़रत की बाढ़ में इंसानियत पूरी तरह खत्म नहीं हो जाएगी। दीपक उन गहरे हिंदू-मुस्लिम रिश्तों का जीता-जागता उदाहरण हैं जो यहां पहले थे लेकिन अब एक अपवाद बन गए हैं।
वेनेज़ुएला पर हमला असभ्य गुंडागिरी की निशानी
दुनिया अच्छे से जानती है कि रूस और यूक्रेन के दरम्यान जंग छेड़ने और नाटो के मसले के पीछे भी अमेरिकी षड्यंत्र है, और फ़लस्तीन के ग़ज़ा में जारी नरसंहार के पीछे भी इजरायल को हासिल अमेरिकी शह है और अब अमेरिकी राष्ट्रपति एक सनकी की तरह व्यवहार करते हुए अपनी सनक में दुनिया को नाभिकीय युद्ध के मुहाने पर ला रहे हैं।
अल्पसंख्यक ईसाइयों की दुर्दशा
यह प्रोपेगेंडा कि ईसाई धर्म परिवर्तन कर रहे हैं, इस पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है। ईसाई धर्म भारत में एक पुराना धर्म है, जो 52 ईस्वी में सेंट थॉमस के ज़रिए मालाबार तट पर आया था। यह सामाजिक धारणा कि यह ब्रिटिश शासन के साथ आया, इसका कोई आधार नहीं है। 52 ईस्वी से 2011 तक, जब आखिरी जनगणना हुई थी, जनगणना के आंकड़ों के अनुसार ईसाइयों का प्रतिशत बढ़कर 2.3% हो गया। यह कोई नहीं कह सकता कि कुछ जानबूझकर धर्म परिवर्तन का काम नहीं हुआ होगा।
वंदे मातरम् : पहले परहेज अब मौका देख विवाद खड़ा कर रही संघी ताकतें
सांप्रदायिक धारा अब पूरा वंदे मातरम् गाना लाने की मांग कर रही है, उसने यह गाना कभी नहीं गाया था। यह मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठकों में गाया जाता था। वंदे मातरम् का नारा अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वालों ने लगाया था। चूंकि RSS आज़ादी के आंदोलन से दूर रहा और अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति को जारी रखने में उनकी मदद की, इसलिए उन्होंने यह गाना नहीं गाया और न ही यह नारा लगाया।
क्या मोदी के नए भारत के निर्माण का सपना कांग्रेस नेताओं के बगैर अधूरा है ?
उत्तर प्रदेश के दिग्गज कांग्रेसी नेता आरपीएन सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद, एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस मुक्त...
पाँच राज्यों के चुनाव के आइने में 73 वें गणतंत्र दिवस पर संकल्प
मित्रों, आज 26 जनवरी है: हमारा गणतंत्र दिवस! इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था इसीलिए हम उस दिन से गणतंत्र...
कैराना से ‘पलायन’- समाज को बांटकर वोट बटोरने की कवायद
सन 2014 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भड़के सांप्रदायिक हिंसा के दावानल में 80 मुसलमान मारे गए थे...
जीवन में ईमानदारी और सामाजिक न्याय की पहरेदारी के बेमिसाल नायक कर्पूरी ठाकुर
कर्पूरी ठाकुर भारतीय के एक बेमिसाल शख्सियत थे जिनकी राजनीति और सरोकार कभी मद्धिम नहीं पड़े बल्कि उनका महत्व लगातार बढ़ा है। सामाजिक न्याय...
नेताजी की ऐतिहासिक विरासत को सांप्रदायिक रंग मे ढालने की कोशिश
अमर जवान ज्योति दिल्ली का न केवल एक लैंडमार्क था अपितु हमारी ऐतिहासिक विरासत भी, जहाँ प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान शहीद हुए...
चंद्रशेखर आजाद को अपने ऊपर जनता के भरोसे का सही आकलन करना होगा वरना वे भटकाव का शिकार होंगे
आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध चुनाव लड़ने की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा है कि...

