Monday, April 6, 2026
Monday, April 6, 2026




Basic Horizontal Scrolling



पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

होमराजनीति

राजनीति

क्या अब साम्राज्यवाद का सरगना नहीं रह पाएगा अमेरिका

क्यूबा के मौजूदा ऊर्जा संकट को पैदा करने और अब खुद क्यूबा पर कब्ज़ा जमाने की चाह रखने वाले ट्रंप के बयान को देखने के बाद, यह कहावत याद आ गई - 'नंगे से तो भगवान भी डरते हैं।' हालाँकि, इस 'नंगे' द्वारा शोषित की गई लड़कियों का गुस्सा अब पूरी दुनिया एपस्टीन फाइलों के ज़रिए देख रही है। फिर भी, इस 'नंगे' को रोकना ही दुनिया की सभ्यता पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा है। आखिर किसी में भी इस बारे में खुलकर बोलने की हिम्मत क्यों नहीं है?

साम्राज्यवाद के नए दौर की शुरुआत है ईरान पर हमला

घटनाओं में भारत की भूमिका उसकी बदलती विदेश नीति के बारे में आँखें खोलने वाली है। शुरुआत में भारत गुटनिरपेक्ष था, और उसके ईरान के साथ बहुत सौहार्दपूर्ण संबंध थे। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान बेहतरीन था। अब हम देखते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध से ठीक पहले इज़राइल का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य देश को पता नहीं था। उन्हें इज़राइल का सर्वोच्च सम्मान मिला, और उन्होंने यह वचन दिया कि भारत हर सुख-दुख में इज़राइल के साथ खड़ा रहेगा। अगले ही दिन, I-A ने ईरान पर हमला कर दिया। श्री मोदी ने ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर कोई ट्वीट नहीं किया, और एक ऐसा गोलमोल बयान जारी किया जिसमें हमलावर और पीड़ित देश, दोनों को एक ही तराज़ू में तौला गया।

ईरान युद्ध : तेल, साम्राज्य और शासन परिवर्तन की नई राजनीति

28 फरवरी, 2026 को, ईरानी समय के हिसाब से सुबह लगभग 7:00 बजे अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसके बाद नई जंग शुरू हो गई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के भीतर किए गए संयुक्त हवाई हमलों (Operation Epic Fury) के बाद से दोनों देश सीधे सैन्य संघर्ष में हैं। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु और कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के नष्ट होने की खबरें हैं। लड़ाई की वजह तेल के सोर्स पर कंट्रोल की है।

दिल्ली : फिलिस्तीनी अपने अधिकार के लिए आत्मसम्मान के साथ जीतने तक लड़ेंगे

इंडो-फिलिस्तीन सॉलिडैरिटी नेटवर्क (आईपीएसएन) ने 06 मार्च, 2026 को नयी दिल्ली के प्रेस क्लब में 'फिलिस्तीन, ज़ायोनी-साम्राज्यवादी प्रभुत्व, और बदलती भू-राजनीति' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया था जिसमें पश्चिम एशिया के मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए।

अगर टीपू सुलतान हिन्दू राजा होते तो क्या करती भाजपा

महाराष्ट्र के मालेगाँव में नवनिर्वाचित उपमहापौर निहाल अहमद ने शान-ए-हिन्द टीपू सुल्तान का एक चित्र अपने कार्यालय में लगाया। इसकी जानकारी मिलने के बाद शिवसैनिकों ने अधिकारियों का हस्तक्षेप करवाकर उसे हटवा दिया। कुछ विरोध प्रदर्शन भी हुए। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने चित्र हटाए जाने को अनुचित बताते हुए कहा कि टीपू का मैसूर के लिए उतना ही योगदान है जितना छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्ट्र के लिए है। इस बात का भाजपा ने घोर विरोध दर्ज करते हुए कांग्रेस कार्यालय पर पथराव किया।

महारैली : तेजस्वी यादव ने मोदी की गारंटी को ‘चाइनीज गारंटी’ बताया

महारैली में तेजस्वी यादव ने कहा कि किसान तबाह है, युवा परेशान है लेकिन किसानों से मोदी जी को मिलने का समय नहीं है। मोदी जी मिलेंगे तो प्रियंका चोपड़ा से मिलेंगे किसानों से नहीं मिलेंगे।

महारैली : शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने एक व्यक्ति और एक पार्टी की सरकार को देश के लिए खतरा बताया

महारैली में बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, 'कुछ दिन पहले आशंका थी कि क्या हमारा देश तानाशाह की ओर जा रहा है? लेकिन अब वो आशंका नहीं रही अब वह सच्चाई है।’

INDIA की ‘लोकतंत्र बचाओ रैली’ आज, रामलीला मैदान में एकजुट होंगे विपक्षी नेता 

इस रैली में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, चंपई सोरेन, शरद पवार, तेजस्वी यादव, सीताराम येचुरी, डी राजा, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, तिरुचि शिवा, डेरेक ओ'ब्रायन समेत अन्य लोग शामिल होंगे।

कांग्रेस ने आयकर नोटिस के खिलाफ पूरे देश में किया प्रदर्शन

लोकसभा के चुनाव की तैयारियाँ शुरू हैं, लेकिन भाजपा की अंगुली पर चलने वाली संस्थाएं विपक्षी पार्टियों को किसी न किसी मुद्दे पर निशाना बनाते हुए कटघरे में खड़ा कर रही है जबकि सत्ता में बैठी बीजेपी दूध की धुली नहीं है। 

लोकसभा चुनाव 2024 : अबकी बार किसकी चुनावी नैया के खेवनहार बनेंगे निषाद

राम की नैया पार लगाने वाले निषाद और केंवट पिछले कई चुनावों से भाजपा के साथ खड़े रहे हैं। लेकिन इस बार भाजपा सरकार से निषाद नाराज चल रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में निषाद किसके खेवनहार बनेंगे, यह तो 4 जून को आने वाले नतीजों से ही मालूम होगा।

प्रियंका गांधी ने भाजपा को घेरा, देश को कर्ज में डुबोने का लगाया आरोप

आजादी के बाद से वर्ष 2014 तक 67 सालों में देश पर कुल कर्ज 55 लाख करोड़ था। पिछले 10 वर्ष में अकेले मोदी जी ने इसे बढ़ाकर 205 लाख करोड़ पहुंचा दिया। इनकी सरकार ने बीते 10 साल में लगभग 150 लाख करोड़ कर्ज लिया है।
Bollywood Lifestyle and Entertainment