Thursday, March 12, 2026
Thursday, March 12, 2026




Basic Horizontal Scrolling



पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

होमपूर्वांचल

पूर्वांचल

वाराणसी : डीएनटी समुदाय द्वारा महिला दिवस का आयोजन

वाराणसी के बेलवा स्थित डीएनटी यूथ रिसोर्स सेंटर में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस एवं माता सावित्रीबाई फुले स्मृति दिवस के अवसर पर नट समुदाय संघर्ष समिति एवं उड़ान (UDAAN) के संयुक्त तत्वावधान में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

टेबल जर्नलिज्म के दौर में एक स्वतंत्र पत्रकार के सरोकार ‘आफ़त में गाँव’

पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में जिसकी आबादी 6 करोड़ से ज़्यादा है, जो यहाँ की आबादी का एक-चौथाई है। पिछले बारह सालों में विकास के नाम पर विस्थापन की विभीषिका का दस्तावेजीकरण किताब 'आफत में गांव' में है। इस किताब में वाराणसी, आजमगढ़, चंदौली और दूसरी जगहों के गांवों का और रोजी-रोटी कमाने के लिए संघर्ष कर रहे विस्थापित लोगों से सीधे बात कर उनकी त्रासदियों को दर्ज किया गया है। यह किताब असल में हमारे देश भर के उन गांवों की कहानी दिखाती है जो ऐसे संकटों में फंसे हैं।

मैदानी गांवों की सच्ची दास्तान बताती आवश्यक किताब ‘आफत में गांव’

पत्रकारिता की भाषा और शैली में जो सुस्पष्टता वाकई में होनी चाहिए, वह इन रिपोर्ट्स को पढ़कर लगा, जो बात कही गई है, वह आंखन-देखी हों, कहीं किसी कागज में लिखी हुई बात नहीं। कागजों में लिखी हुई बात यानि प्रेस विज्ञप्तियों में काट-छांट करके खबरें लिखी जा सकती हैं,रिपोर्ट्स नहीं। रिपोर्ट और खबरों में यही बेसिक अंतर है। 'आफत में गांव' में प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट्स इन बातों को साबित करती है।

वाराणसी : सभी निजी शैक्षणिक संस्थानों द्वारा मातृत्व लाभ देना जरूरी, राष्ट्रीय महिला आयोग ने दिया आदेश

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने वाराणसी स्थित सनबीम वीमेंस कॉलेज वरुणा को शिकायतकर्ता संगीता प्रजापति को सात दिनों के अंदर मातृत्व लाभ मुहैया कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के अनुसार मातृत्व लाभ प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान पर लागू होता है, क्योंकि यह प्रत्येक महिला का मूलाधिकार है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत यह एक बड़ी जीत हासिल हुई है।

बनारस : गांधी जयंती के अवसर पर ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आरंभ

सर्व सेवा संघ की 'एक कदम गांधी के साथ' पदयात्रा गांधी जयंती के दिन वाराणसी राजघाट से शुरू की गई है, जो अनवरत 56 दिनों तक विभिन्न जिलों-प्रदेशों से होती हुई संविधान दिवस के दिन दिल्ली राजघाट में सम्पन्न होगी। यह यात्रा  1000 किमी की दूरी तय करेगी। इस यात्रा का उद्देश्य देश में चल रहे नफरत और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अहिंसात्मक तरीके से विरोध दर्ज करना है।

सेला दर्रा : बर्फ़ और बादलों का आनंदलोक

मगिरि के उत्तुंग शिखर पर स्थित इस मनमोहक स्थान सेला पास पर फरवरी और मार्च महीने में लगभग 7 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता है, जहां अनवरत बर्फबारी होती रहती है और ठंड से ठिठुरते हुए श्वेत-श्याम शिखर से शीतल हवाएं अठखेलियां करती रहती हैं।

फिलिस्तीन में मौत से अधिक कठिन है जिंदा रहना – इरफान इंजीनियर

दो देशों के युद्द में सबसे ज्यादा तबाह वहाँ के नागरिक होते हैं। इजरायल और फिलिस्तीन एवं रूस व उक्रेन में यह देखा जा सकता है। इजरायल फिलिस्तिनियों को पूरी तरह ज़मींदोज़ कर उनकी हस्ती मिटाना चाहता है और यह कर भी रहा है। इजरायल के लगातार हमले से फिलिस्तीनी नागरिक मर रहे हैं। अब बच्चों को भी निशाना बनाया जा रहा है। पिछले नौ महीने में 37 हजार बच्चे मारे गए। यह बहुत ही गैर जिम्मेदाराना हरकत है।

सात बहनों का एक राज्य मेघालय है झीलों और बादलों का घर

वैसे तो पूरी धरती प्राकृतिक सुंदरता से भरी हुई है लेकिन भारत में जब प्राकृतिक सुंदरता की बात आती है तो उत्तर-पूर्वी राज्यों की याद जेहन में जरूर आती है। चाहे अरुणाचल प्रदेश हो या मिज़ोरम या फिर मेघालय। यहाँ की सुंदरता  पहाड़, नदी, झील और जंगलों से है। बाकी जगहों से यहाँ पहुँचना थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन जाने के बाद वापस आने का मन नहीं होता। विनय कुमार ने मेघालय यात्रा वृतांत भेजा है, पाठक पढ़ते हुए वहाँ पहुँचकर आनंद उठा सकते हैं। 

राजस्थान : आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक और डिजिटल बना देने भर से आधारभूत समस्याएँ खत्म नहीं होती

देश के हर राज्य की सरकार अपने कामकाज और विभागों को स्मार्टफोन या टैबलेट उपलब्ध करा कर ऑनलाइन काम करने की सुविधा प्रदान कर रहा है। ताकि उनके विभागों का डिजिटलाइशेन हो चुका है, लेकिन काम करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक पानी, शौचालय, पोषणाहार की व्यवस्था नहीं होगी तब तक बच्चे और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य बेहतर कैसा होगा?

उदयपुर : प्रोफेसर हिमांशु पंड्या पर संघी गुंडों के हमले की देशभर में निंदा

लोकतान्त्रिक देशों में अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगे या बोलने वाले पर हमला किया जाए, तब इसे फासीवाद की संज्ञा दी जाती है। अभी 4 जून को इस विशाल लोकतान्त्रिक देश में नए चुनाव हुए। मतदातओं के हिंदुत्ववादी राजनीति के व्यापक निषेध के बावजूद फासीवाद दौर खत्म नहीं हुआ बल्कि अब अधिक बर्बर रूप में सामने आने की आशंका है।

वाराणसी : चार दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर में बच्चों ने खूब किया एंजॉय

दस माह के स्कूल के बाद जब दो महीने की ग्रीष्मकालीन छुट्टियाँ मिलती हैं तो बच्चे और उनके साथ माता-पिता भी थोड़ी राहत महसूस करते हैं। इन्हीं दो महीने की छुट्टियों में बच्चे को यदि कोई मजेदार शिविर में शामिल होने का मौका मिल जाये तो उसे आनंद आ जाता है।
Bollywood Lifestyle and Entertainment