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संसद
लालमणि को ठोकर मारकर बन गए श्रीनाथ
दौर कोई भी हो दिखावा और आडम्बर इंसानी फितरत का एक जरुरी हिस्सा बन गया है। शादी हो या कोई त्यौहार या कोई भी...
पत्रकारिता, संसद, न्यायपालिका और बेपरवाह हुक्मरान (डायरी, 16 अगस्त, 2021)
प्रधानमंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति बेहद महत्वपूर्ण होता है। उसे अपना अपना महत्व बनाए रखना चाहिए। इसके लिए उसका उदार होना, सौम्य होना...
खतरे में है देश की संप्रभुता डायरी (28 जुलाई, 2021)
साल 2009 था। पहली बार मुझे पटना से प्रकाशित दैनिक आज की तरफ से विधान परिषद की रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी दी गयी। संपादक महोदय ने मुझसे पासपोर्ट साइज की दो तस्वीरें मांगी। फिर एक सप्ताह में ही उन्होंने एक परिचय पत्र दे दिया और साथ में यह जिम्मेदारी कि विधान परिषद के बजट सत्र की रिपोर्टिंग मुझे करनी है। वह पहला मौका था विधान परिषद के अंदर जाने का। मुख्यमंत्री सहित सूबे के तमाम बड़े नेता मेरे सामने थे। लेकिन पहले ही दिन विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और कार्रवाही महज पांच मिनट तक चली। मैं बड़ा निराश हुआ कि आज तो कोई खबर ही नहीं बनी। फिर पत्रकार वाले दिमाग की बत्ती जली और मैंने उस सवाल को लेकर पक्ष और विपक्ष के कुछ नेताओं से उनकी प्रतिक्रिया ली, जिस सवाल को लेकर हंगामा हुआ था। कुल मिलाकर ढंग की रिपोर्टिंग की।

