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22 जनवरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो मासूम बच्चों को ज़िंदा जलाने का काला दिन भी था

फादर ग्राहम स्टेंस और उनके मासूम बच्चों की हत्या को हिन्दू जाति-व्यवस्था के ऊपरी सतह पर रहनेवाले लोगों की धार्मिक घृणा का परिणाम मानना चाहिए। इस घृणा का राजनीतिक स्वरूप यह है कि वर्तमान समय में तथाकथित हिंदुत्ववादी धर्मसंसद खुलेआम अल्पसंख्यकों की हत्या को अपना एजेंडा बनाकर पेश करती है। वह संसद से लेकर संविधान की धज्जियाँ उड़ा रही है। इनके खिलाफ शांति-सद्भावना के साथ सर्वधर्म समभाव को मानने वाले लोगों ने इकठ्ठा होकर सक्रिय रूप से गतिशील होने की जरूरत है।

सेल्फीमय देश हमारा, सबसे प्यारा, सबसे न्यारा!

लीजिए, अब इन विरोधियों को इसमें भी आपत्ति हो गयी। कह रहे हैं कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सारे विश्वविद्यालयों को अपने यहां जो...

राजस्थान: कृषि प्रधान देश में सरकारी नीतियों की उपेक्षा के शिकार हो रहे किसान

बारिश की कमी को पूरा करने के लिए अन्य विकल्पों पर ध्यान दिया जाए ताकि किसानों को कृषि छोड़कर मज़दूरी न करनी पड़े। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देगी और इसके समाधान के लिए किसी सकारात्मक नतीजे पर पहुंचेगी। बहुत जल्द राजस्थान में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के बीच यह मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है।

क्या भारत, इंडिया का विरोधी है?

संयोगवश, विपक्षी दलों के एक साथ आकर I.N.D.I.A. (इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिक इंक्लूसिव एलायंस) बनाने के बाद, सत्तारूढ़ भाजपा आधिकारिक विज्ञप्तियों में 'इंडिया' शब्द के...

हजारों करोड़ के खर्च से आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन से देश को क्या हासिल होगा

वाराणसी। देश की राजधानी में कल से शुरू हुआ दो दिवसीय जी-20 शिखर सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ...

चाँद को छूता अमेरिकी आरक्षण का दायरा

कुछ दिन पूर्व फेसबुक पर विचरण करते समय मेरी दृष्टि अन्तरिक्ष यात्रियों की एक तस्वीर पर अटक गई। इस तस्वीर में चार व्यक्ति थे,...

अब टमाटर-मुक्त भारत!

इस बार टमाटर ने भी अपने नखरे दिखा ही दिए। अब तक अक्सर कभी आलू, तो कभी प्याज के नखरे ही सरकारों को सिरदर्द...

बातें कहानियों की, खिस्से भारत के मोदी की (डायरी 29 अक्टूबर, 2021)  

बचपन में मां सुनाया करती थी कहानियां। तब मां उन्हें कहानियां नहीं कहती थी, खिस्सा कहती थी। कहानियों से पहले जरूर यही शब्द रहा होगा। कहानी शब्द तो मेरे हिसाब से खड़ी हिंदी के अस्तित्व में अने के बाद ही आया है। कहना शब्द से कहानी को गढ़ दिया गया।

जितनी घातक है हिंसा की राजनीति उतनी ही घातक है हिंसा पर राजनीति

जम्मू कश्मीर में हिंसा का तांडव जारी है। बावजूद इस आंकिक सत्य के कि मारे गए लोगों में अधिकतर स्थानीय मुसलमान हैं मीडिया में...

द्विराष्ट्र के सिद्धांत के जनक कौन- जिन्ना या सावरकर

पहला हिस्सा  पिछले तीन चार वर्ष से श्री वी डी सावरकर को प्रखर राष्ट्रवादी सिद्ध करने का एक अघोषित अभियान कतिपय इतिहासकारों द्वारा अकादमिक स्तर...

बिहार के पिछड़ों का शैक्षिक संघर्ष और उपलब्धियां

संघ लोक सेवा द्वारा आयोजित भारतीय सिविल परीक्षा 2020 के परिणाम में शुभम कुमार ने प्रथम स्थान हासिल कर बिहार का मान बढ़ाया है।...

भारत में जाति एक ऐसा कोढ़ है जिसे निरंतर खुजलाए जाने की जरूरत रहती है

बातचीत का तीसरा और अंतिम हिस्सा   क्या आपको लगता है कि अभी तक का दलित साहित्य ब्राह्मणवाद की आलोचना तक सीमित है, उसमें विकल्प में...

उफ्फ! एक दशक बाद अब आसाम में एक और भजनपुरा डायरी (24 सितंबर 2021)

बाजदफा यह सोचता हूं कि क्या किसी एक मुल्क में एक ही मजहब को मानने वाले लोग हो सकते हैं? यदि हां तो क्या...

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