Wednesday, February 28, 2024
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सेल्फीमय देश हमारा, सबसे प्यारा, सबसे न्यारा!

लीजिए, अब इन विरोधियों को इसमें भी आपत्ति हो गयी। कह रहे हैं कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सारे विश्वविद्यालयों को अपने यहां जो सेल्फी प्वाइंट बनाने का निर्देश दिया है, वह सही नहीं है। कम-से-कम विश्वविद्यालयों को ऐसे सेल्फी प्वाइंट बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। पहले सैन्य प्रतिष्ठानों से अपने यहां […]

लीजिए, अब इन विरोधियों को इसमें भी आपत्ति हो गयी। कह रहे हैं कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सारे विश्वविद्यालयों को अपने यहां जो सेल्फी प्वाइंट बनाने का निर्देश दिया है, वह सही नहीं है। कम-से-कम विश्वविद्यालयों को ऐसे सेल्फी प्वाइंट बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। पहले सैन्य प्रतिष्ठानों से अपने यहां ऐसे सेल्फी प्वाइंट बनाने का निर्देश दिया गया। अब विश्वविद्यालयों को भी! और सेल्फी प्वाइंट भी कैसे? कह रहे हैं कि ये तो मोदीजी के साथ सेल्फी के प्वाइंट बनाने का आदेश है। मोदीजी की फोटो के चक्कर में भाई लोग सेल्फी का ही नाम बदले दे रहे हैं! फोटो विद मोदीजी वाली सेल्फी भी कोई सेल्फी है, लल्लू!

खैर! मोदीजी की फोटो के साथ वाली सेल्फी को सेल्फी कहेंगे या नहीं कहेंगे, इस झगड़े में हम नहीं जाएंगे। पर विरोधी यह तो बताएं कि इन्हें प्राब्लम किस से है – मोदीजी की फोटो वाले सेल्फी से या सेल्फी प्वाइंट से या विश्वविद्यालयों में सेल्फी प्वाइंट से? यह क्या न्याय की बात होगी कि सैन्य संस्थाओं समेत बाकी सब जगह मोदीजी की फोटो वाले सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएं और विश्वविद्यलायों को ही ऐसे सेल्फी प्वाइंट से वंचित रखा जाए। यह हमारे विश्वविद्यालयों के साथ सरासर भेदभाव नहीं तो और क्या होगा? विश्वविद्यालयों के पढ़ाई-लिखाई की जगह होने का मतलब यह थोड़े ही है कि छात्रों को मोदीजी के साथ फोटो खिंचाने के मौके से वंचित रखा जाए। विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता की फोटो के साथ फोटो खींचने का अवसर भी नहीं दे, तो क्या विश्वविद्यालय और क्या उसकी पढ़ाई। बल्कि हम तो कहेंगे कि विश्वविद्यालयों में सिर्फ सेल्फी प्वाइंट बनवाना ही काफी नहीं है। सभी डिग्री पाने वाले छात्रों के लिए, डिग्री समारोह के चोगे में सेल्फी विद मोदी के साथ, परिचय पत्र हासिल करना अनिवार्य होना चाहिए। जो सेल्फी वाला परिचय पत्र दिखाए, वो डिग्री ले जाए!

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पर एक बात समझ में नहीं आ रही। मोदीजी के साथ सेल्फी प्वाइंट का निर्देश विश्वविद्यालयों के लिए ही क्यों? बाकी शिक्षा संस्थाओं के लिए भी क्यों नहीं? देश के लाखों स्कूलों के करोड़ों बच्चों को, मोदीजी के साथ सेल्फी के मौके से वंचित कैसे रखा जा सकता है। अरे, बच्चे ही तो मन के सच्चे होते हैं। पूरी भावना के साथ बच्चे जैसे मोदीजी की तस्वीर वाली सेल्फी खिंचाएंगे, वैसी भावना बड़े दिखाएंगे, इसमें हमें तो शक है। खैर! बच्चों की बात अगर छोड़ भी दें तब भी, स्कूल शिक्षकों के लिए हर रोज हाजिरी के लिए सेल्फी अपलोड करने की शर्त तो योगीजी की यूपी में और दूसरे कुछ राज्यों में पहले ही लगी हुई है। खाली-पीली सेल्फी की जगह, डेली मोदीजी के साथ सेल्फी अपलोड क्यों न करायी जाए। सेल्फी की सेल्फी, हाजिरी की हाजिरी। इसलिए भी, हरेक स्कूल में मोदीजी की तस्वीर वाला सेल्फी प्वाइंट तो होना ही चाहिए।

हम तो कहते हैं कि बारातघरों से लेकर, अस्पतालों से श्मशानों तक, हर जगह मोदीजी की फोटो वाले सेल्फी प्वाइंट होने चाहिए। हर वक्त और हर हाल में, मोदीजी का आशीर्वाद हरेक बंदे के साथ रहे। और कुछ नहीं तो कम-से-कम सेल्फी विद मोदीजी के मामले में तो हमारा विश्व गुरु होना कहीं गया नहीं है। वैसे विश्व गुरु तो हम यूं भी बन ही जाएंगे कि योगीजी के न्यौते पर, पूरी दुनिया नौकरी के लिए यूपी आने वाली है! बस लगता है कि इस पूरी दुनिया में बगल का बिहार ही शामिल नहीं है, जहां यूपी के हजारों लोग नौकरी के लिए भागे जा रहे हैं। पर सिर्फ पीएम वाली सेल्फी से विश्व गुरु बनने की बात ही कुछ और है – हल्दी लगे न फिटकरी, रंग चोखा।

राजेंद्र शर्मा
व्यंग्यकार वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक 'लोकलहर' के संपादक हैं।

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