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प्याज निर्यात पर प्रतिबंध से किसानों एवं व्यापारियों में आक्रोश, रोकी नीलामी
किसानों ने शुक्रवार को नासिक में लासलगांव, चंदवाड, नंदगांव, डिंडोरी, येवला, उमराने और अन्य स्थानों की प्याज मंडियों में नीलामी बंद कर दी। केंद्र सरकार के इस फैसले से आक्रोशित किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया है।
प्याज के बढ़ते दाम सिरदर्द बन सकते हैं सरकार के लिए
ताजा खरीफ प्याज की आवक अब तक शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भंडारित रबी प्याज खत्म होने और खरीफ प्याज के आगमन में देरी के कारण आपूर्ति की स्थिति खराब है, जिसके परिणामस्वरूप थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतें बढ़ रही हैं।
महाराष्ट्र में कथित गौ तस्करी के आरोप में पीट-पीट कर एक व्यक्ति की हत्या
महाराष्ट्र। नासिक में कार से गौमांस ले जाने के संदेह पर कथित गौरक्षकों ने एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी। खबर के...
दो बहादुर बेटियों की दास्तान (डायरी, 28 जुलाई, 2022)
जड़ताएं खत्म होनी ही चाहिए। ऐसा माननेवाला मैं दुनिया में कोई अकेला नहीं हूं। मुझ जैसे असंख्य लोग होंगे, जिन्हें वर्चस्ववादी परंपराओं पर प्रहार...
किसान आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में विगत दशकों में चल रहे आंदोलन का एक सिलसिला
यह समय का पहिया घूमने जैसी बात है। दस साल हो रहे हैं जब 2009 में आई ग्रामीण विकास मंत्रालय एक मसविदा रिपोर्ट के 160 वें पन्ने पर भारत के आदिवासी इलाकों में कब्जाई जा रही ज़मीनों को धरती के इतिहास में 'कोलंबस के बाद की सबसे बड़ी लूट' बताया गया था। कमिटी ऑनस्टेट अग्रेरियन रिलेशंस एंड अनफिनिश्ड टास्क ऑफ लैंडरिफॉर्म्स शीर्षक से यह रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा नहीं बन पाई है, जिसने छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के कुछ इलाकों में सरकारों और निजी कंपनियों (नाम समेत) की मिली भगत से हो रही ज़मीन की लूट से पैदा हो रहे गृहयुद्ध जैसे हालात की ओर इशारा किया था।

