आदिवासी एवं सामाजिक संगठनों का आरोप है कि राज्य की भाजपा सरकार की बस्तर में अहिंसा और सहभागी लोकतंत्र को प्रोत्साहित करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि बस्तर में माओवादियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों का दमन और फर्जी गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
तमाम सरकारी दावों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आदिवासी आज भी कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। पिछले तीन वर्षों से बीरभानपुर के वनवासी कुएं से पानी निकाल कर पी रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन या गांव के प्रधान की ओर से हैंडपंप को बनवाने या नया हैंडपंप लगवाने की कोई जरूरत नहीं समझी गई।
झारखंड के अलग-अलग इलाकों के जंगलों-पहाड़ों से घिरे-सटे और तलहटी वाले गांवों में हाथी- मानव संघर्ष का अंतहीन सिलसिला जारी है। इसमें जान-माल की लगातार क्षति हो रही है। घरों को ढाह दिये जाने और अनाज खा जाने से संकट की तस्वीर पीड़ादायक होती है। हाथियों के हमले में मारे जाने वाले लोगों में अधिकतर आदिवासी, साधारण किसान, महिला और मजदूर होते हैं। सैकड़ों गांव भय के साये में रहते हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि चुनावों में यह मुद्दा नहीं होता। पड़ताल करती एक ग्राउंड रिपोर्ट..