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क्या भारत के पहले आदिवासी राष्ट्रपति संविधान की रक्षा करेंगे या चुप्पी साध लेंगे?

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, आपके होम स्टेट ओडिशा में – नियमगिरी, गोपालपुर और पूरे दंडकारण्य में – आदिवासी कितने सालों से नुकसान पहुंचाने वाले डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का विरोध कर रहे हैं। भारत की आबादी में आदिवासी सिर्फ़ 8-9% हैं, लेकिन आज़ादी के बाद से डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की वजह से बेघर हुए लोगों में वे 75% हैं। उनके विरोध को नक्सलवाद का लेबल लगाकर कुचला जा रहा है। आपके साइन लेने और संविधान बनाने वालों द्वारा आदिवासियों को दिए गए खास अधिकारों को खत्म करने के लिए आदिवासी समुदाय की एक महिला को सबसे ऊंचे पद पर बिठाने की साज़िश है। मैं यह खुला खत खास तौर पर, श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, इस साज़िश से सावधान करने के लिए लिख रहा हूं।

छत्तीसगढ़ : आदिवासी नेता सुरजू टेकाम की गिरफ्तारी पर सवाल, भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप

आदिवासी एवं सामाजिक संगठनों का आरोप है कि राज्य की भाजपा सरकार की बस्तर में अहिंसा और सहभागी लोकतंत्र को प्रोत्साहित करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि बस्तर में माओवादियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों का दमन और फर्जी गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।

ग्राउंड रिपोर्ट : पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बीरभानपुर गांव में कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर आदिवासी

तमाम सरकारी दावों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आदिवासी आज भी कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। पिछले तीन वर्षों से बीरभानपुर के वनवासी कुएं से पानी निकाल कर पी रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन या गांव के प्रधान की ओर से हैंडपंप को बनवाने या नया हैंडपंप लगवाने की कोई जरूरत नहीं समझी गई।

झारखंडः हाथियों के हमले में मारे जा रहे आदिवासी और किसान, यह चुनावों में मुद्दा क्यों नहीं होता ?

झारखंड के अलग-अलग इलाकों के जंगलों-पहाड़ों से घिरे-सटे और तलहटी वाले गांवों में हाथी- मानव संघर्ष का अंतहीन सिलसिला जारी है। इसमें जान-माल की लगातार क्षति हो रही है। घरों को ढाह दिये जाने और अनाज खा जाने से संकट की तस्वीर पीड़ादायक होती है। हाथियों के हमले में मारे जाने वाले लोगों में अधिकतर आदिवासी, साधारण किसान, महिला और मजदूर होते हैं। सैकड़ों गांव भय के साये में रहते हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि चुनावों में यह मुद्दा नहीं होता। पड़ताल करती एक ग्राउंड रिपोर्ट..

भाजपा सरकार को आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कुचलने नहीं दिया जाएगा : छग किसान सभा

रायपुर। संविधान की रक्षा की शपथ लेकर शासन करने वाली किसी भी सरकार को आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कुचलने तथा उनके हित में...

कांग्रेस, राहुल गांधी की सामाजिक न्यायवादी छवि को सामने लाने का दम नहीं दिखा पायी

कांग्रेस देश की सबसे महत्वपूर्ण पार्टी है, जिसके नेतृत्व में स्वाधीनता संग्राम की लड़ाई लड़कर ब्रितानी हुकूमत से देश को आज़ादी मिली। यूं तो...

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