Sunday, March 15, 2026
Sunday, March 15, 2026




Basic Horizontal Scrolling



पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

होमसंस्कृतिसहज भाषा में लिखी गई इन कविताओं में इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी है -...

इधर बीच

ग्राउंड रिपोर्ट

सहज भाषा में लिखी गई इन कविताओं में इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी है – रामप्रकाश कुशवाहा

ग़ाज़ीपुर में 2 दिसंबर को हिंदी साहित्य के दिग्गज वरिष्ठ कवि एवं आलोचक प्रोफेसर चंद्रदेव यादव की हाल ही में प्रकाशित हुए कविता संग्रहों गाँवनामा एवं पिता का शोकगीत पुस्तकों पर परिचर्चा हुई। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया केंद्रीय विश्वविद्यालय में रहकर गाँव, खेती-किसान, मिट्टी को जीने वाले कवि चंद्रदेव यादव की इन कृतियों पर वैसे […]

ग़ाज़ीपुर में 2 दिसंबर को हिंदी साहित्य के दिग्गज वरिष्ठ कवि एवं आलोचक प्रोफेसर चंद्रदेव यादव की हाल ही में प्रकाशित हुए कविता संग्रहों गाँवनामा एवं पिता का शोकगीत पुस्तकों पर परिचर्चा हुई। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया केंद्रीय विश्वविद्यालय में रहकर गाँव, खेती-किसान, मिट्टी को जीने वाले कवि चंद्रदेव यादव की इन कृतियों पर वैसे तो दिल्ली में परिचर्चा एवं लोकार्पण किया जा चुका है, फिर भी यह परिचर्चा खास रही। ग़ाज़ीपुर प्रोफेसर यादव का गृह जनपद है, इसीलिए ग़ाज़ीपुर में उनकी पुस्तकों पर चर्चा-संगोष्ठी होना जनपदवासियों के लिए और उनके लिए गर्व की बात है।
इस दौरान प्रोफेसर यादव ने अपनी पुस्तक के बारे में बोलते हुए कहा कि “मेरी कविताएं सामान्य जन के सपनों और संघर्षों की कविताएं हैं।”

मंचस्थ विद्वान

वाराणसी से आए मुख्य वक्ता वरिष्ठ आलोचक डॉ रामप्रकाश कुशवाहा ने गाँवनामा और पिता का शोकगीत पर बोलते गए कहा कि, “सहज भाषा में लिखी गई इन कविताओं में इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी है। गाँव आधारित तमाम कविताओं की अपेक्षा इन कविताओं में गाँव अपनी मूल संवेदना और विसंगतियों के साथ मौजूद है।”
परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे ग़ाज़ीपुर के डॉ श्रीकांत पांडेय ने कहा कि “इन कविताओं को पढ़ते हुए इतिहास और उसके विकासक्रम को आसानी से समझा जा सकता है। प्रोफेसर चंद्रदेव यादव की कविताएं दिल को छू जाती हैं।”

डॉ चंद्रदेव यादव का बुके देकर सम्मान

कार्यक्रम का आयोजन जीवनोदय शिक्षा समिति, गाजीपुर ने किया, जिसके लिए गोरा बाजार स्थित राधिका माध्यमिक विद्यालय को परिचर्चा स्थल चुना गया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष राम नारायण तिवारी और आयोजक राकेश पांडेय मौजूद थे। प्रोफेसर यादव की कृतियों पर दिल्ली में कई परिचर्चाएं हो चुकी हैं।

सभागार में उपस्थित श्रोता

आमतौर पर दिल्ली और इलाहाबाद में भी परिचर्चा होती हैं, मगर होने चंद्रदेव यादव के गृह जनपद में हुई यह परिचर्चा महत्वपूर्ण थी।
गाँव के लोग
गाँव के लोग
पत्रकारिता में जनसरोकारों और सामाजिक न्याय के विज़न के साथ काम कर रही वेबसाइट। इसकी ग्राउंड रिपोर्टिंग और कहानियाँ देश की सच्ची तस्वीर दिखाती हैं। प्रतिदिन पढ़ें देश की हलचलों के बारे में । वेबसाइट को सब्सक्राइब और फॉरवर्ड करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Bollywood Lifestyle and Entertainment