Saturday, April 4, 2026
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वाराणसी में सर्व सेवा संघ को बचाने के लिए 100 दिन के सत्याग्रह का समापन

विनोबा जयंती, 11 सितम्बर 2024 को राजघाट वाराणसी में सर्व सेवा संघ परिसर के पुनर्निर्माण के संकल्प के साथ शुरू हुआ 100 दिवसीय सत्याग्रह - न्याय के दीप जलाओ - के आज 19 दिसम्बर 2024 को 100 दिन पूरे हो गए

वाराणसी : नट बस्ती के लोगों का अंगूठा लगवाने के बावजूद कोटेदार नहीं देता राशन

विकास के दावे करने वाली भाजपा सरकार को शायद यह एहसास नहीं है कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के सेवापुरी ब्लॉक के नहवानीपुर गांव की नट बस्ती में सरकारी योजनाओं की असल स्थिति कुछ और ही है।

Varanasi : तीन किलोमीटर की रेंज के खिलाफ़ टोटो चालकों का सत्याग्रह

वाराणसी में ई-रिक्शा चालकों ने तीन किलोमीटर की रेंज के खिलाफ़ सत्याग्रह शुरू किया है। चालकों का कहना है कि इस नियम से उनकी आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा है और वे रोजगार की संभावनाओं को सीमित कर रहा है। अनशन पर बैठे चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस नियम को वापस लिया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। 

सरकार द्वारा बनाए गए शौचालय फेल: सामुदायिक शौचालय में 4 साल से लटका है ताला, खुले में जा रहे लोग

वाराणसी के सजोई गांव में सरकारी योजनाओं के तहत बनाए गए शौचालयों की स्थिति अत्यंत निराशाजनक है। चार साल पहले बनाए गए शौचालयों का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है. गांव में एक सामुदायिक शौचालय भी बनाया गया था, लेकिन उसमें चार साल से ताला लटका हुआ है। यह ताला बंद होने के कारण गांव वालों के पास उस शौचालय का उपयोग करने का कोई विकल्प नहीं है। घर में शौचालय की अनुपस्थिति के कारण महिलाओं को अंधेरे में खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। यह स्थिति न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।

Varanasi : प्रशासन के डर से नट समुदाय के लोग नहीं कर पा रहे अपना पारंपरिक काम

बनारस की नट बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए आज़ादी का अमृत महोत्सव महज एक दिखावा बनकर रह गया है। वर्षों से उपेक्षित इस समुदाय के लोग, जो पारंपरिक कला और नृत्य के माध्यम से जीवन यापन करते हैं, आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

मुसहर जनजाति सामंती व्यवस्था का शिकार है

जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता श्रुति नागवंशी पिछले तीन दशक से बनारस में सक्रिय हैं। उन्होंने बनारस के मुसहर समुदाय को लेकर काफी काम किया है।...

कालनदी को पार करते हुए – भाग एक

वामपंथी आन्दोलन के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर और प्रसिद्ध कवि बाबा शिवमंगल सिद्धान्तकर के जीवन और कृतित्व पर आधारित एक वृत्तचित्र।https://youtu.be/UQ88CIv6QeA

मुल्कराज आनंद ने मुझसे पहला ही सवाल किया कि क्या तुम टॉयलेट साफ़ कर सकते हो?

 भारत के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और चिन्तक-लेखक विद्या भूषण रावत सही अर्थों में एक जिंदादिल व्यक्ति हैं. अकेले बूते पर उन्होंने जितना काम किया...

भोले-भाले लोगों को अतार्किक आस्थाओं का गुलाम बना दिया गया है – आर पी यादव

सामाजिक चिंतक डॉ आर पी यादव से अपर्णा की इस बातचीत में भारत की संकल्पना, उसके संकट और चुनौतियों को लेकर गंभीर विमर्श हुआ...

मैं बिहार और बंगाल दो संस्कृतियों का प्रतिनिधि हूं- शिवकुमार यादव

देखिये जाने माने कवि - कथाकार शिवकुमार यादव से उनकी साहित्यिक यात्रा और उपलब्धियों के बारे में पूजा की बातचीत और अपनी प्रतिक्रिया से...

मंदी के कारण बंदी के कगार पहुंचते बुनकर

हथकरघे पर आधारित बनारसी साड़ी कारोबार के चौपट होने के बाद बनारस और आसपास की बुनकर बस्तियों में अब पॉवरलूम की खटर-पटर सुनाई पड़ती...
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