ऑस्कर में डोनाल्ड ट्रंप के दिए जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास

एचएल दुसाध

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फिल्मों की दुनिया में नोबेल सरीखा महत्त्व रखने वाले एक और ऑस्कर अवार्ड्स की घोषणा 27 मार्च को हो गयी, जिसमें विविधता का रंग और चटखदार हुआ है। कोरोना महामारी के बाद लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थियेटर में आयोजित यह पहला ऑस्कर अवार्ड समारोह था, जिसमें ऑस्कर अपनी पारम्परिक भव्यता के साथ आयोजित हुआ। कोविड महामारी के कारण पिछले वर्ष यह समारोह दो स्थानों- डॉल्बी थियेटर और लॉस एंजिल्स के ऐतिहासिक यूनियन स्टेशन पर आयोजित किया गया था। इस बार विविधता का दर्शन अकादमी पुरस्कार समारोह की मेजबानी में भी दिखा जिसमें श्वेतांगी एमी शूमर के साथ रेजिना हॉल, वांडा साइक्स के रूप में दो अश्वेत हो महिलाओं ने मेजबानी की। बहरहाल जेन कम्पियन, विल स्मिथ, एरियाना डुबोस और ट्रॉय कोत्सर : वे चार शख्सियतें हैं, जिन्होंने ऑस्कर में रेसियल और जेंडर डाइवर्सिटी में चार चाँद लगाया है. जेन कैम्पियन बेस्ट डायरेक्टर तो विल स्मिथ बेस्ट एक्टर और एरियाना डुबोस बेस्ट सपोर्टिंग ऐक्ट्रेस तो कोत्सर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार जीतकर विविधता के रंग को चटकदार बना दिए.

कोत्सर जन्म से बधिर है और वह 94 साल के ऑस्कर इतिहास में यह ट्राफी उठाने वालेमार्लीमैटलिन के बाद दूसरे बधिर एक्टर हैं. उन्हें ऑस्कर देकर दुनिया भर के बधिरों के सपनों को पंख लगाने का काम अंजाम दिया गया है. इसीलिए जब वह ऑस्कर ट्राफी लेने के लिए मंच पर आये: दर्शकों ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया.कोडा ऑस्कर में तीन श्रेणियों: बेस्ट फिल्म, बेस्ट अडॉप्टेड स्क्रीनप्ले और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नॉमित हुई थी और सब मे पुरस्कार जीतने में सफल रही.

‘नोमैडलैंड’ की डायरेक्टर क्लो झाओ

पिछले साल चीनी मूल की महिला डायरेक्टर क्लो झाओ ने ‘नोमैडलैंड’ के लिए बेस्ट डायरेक्टर का खिताब जीतकर जो काम अंजाम दिया था, इस बार जेन कैम्पियन ने वह ‘ द पॉवर ऑफ़ द डॉग’ के लिए किया किया. उसी तरह पिछले साल जैसे दक्षिण कोरियन अभिनेत्री यू जुंग यून जो काम किया था उसे इस बार अफ्रीकन मूल की  ब्लैक अभिनेत्री एरियाना डुबोस ने अंजाम दिया है. इसी तरह पिछले साल ब्रिटिश मूल के अभिनेता डैनियल कलुवाया ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड जीतकर जो काम अंजाम दिया था, वह इस बार अफ्रीकन- अमेरिकल मूल के काले अभिनेता विल स्मिथ ने किंग रिचर्ड जैसी बायोपिक फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर की ऑस्कर ट्राफी उठाकर और बड़े पैमाने पर अंजाम दिया है. लेकिन इस बार विविधता का रंग चटखदार करने में एक और व्यक्ति का बड़ा योगदान है और वह है ट्रॉय कोत्सर. अमेरिकी मूल के कोत्सर अश्वेत नहीं हैं, किन्तु मूक बधिर होने के कारण उन्हें भी काफी प्रतिकूलता का जय करके यह उपलब्धि हासिल करनी पड़ी.

ट्रॉयकोत्सर ने जिस ‘कोडा’ फिल्म के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड जीता है वह कोडा (चाइल्ड ऑफ़ डेफ एडल्ट्स) एकबहरे परिवार की नॉर्मल लड़की की दिल छू लेने वाली कहानी है कोडा. इस फिल्म की कहानी एक लड़की रुबी के ईर्द-गिर्द घूमती है. जो अपने परिवार के साथ रहती है. उसके परिवार का फिशिंग का बिजनेस होता है. जिसमें रुबी अपने भाई और पिता की मदद भी करती है और पढ़ाई भी करती है. रुबी को सिंगिंग का भी शौक होता है. रुबी जब स्कूल जाती है तो स्टूडेंट उसका मजाक उड़ा रहे होते हैं क्योंकि उसके शरीर से मछली की बदबू आती है. फिल्म में रुबी को सिंगर बनने के लिए कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है बखूबी दिखाया गया है. इस परिवार के अभिभावक का रोल अदा किया है कोत्सर ने. कोत्सर जन्म से बधिर है और वह 94 साल के ऑस्कर इतिहास में यह ट्राफी उठाने वालेमार्लीमैटलिन के बाद दूसरे बधिर एक्टर हैं. उन्हें ऑस्कर देकर दुनिया भर के बधिरों के सपनों को पंख लगाने का काम अंजाम दिया गया है. इसीलिए जब वह ऑस्कर ट्राफी लेने के लिए मंच पर आये: दर्शकों ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया.कोडा ऑस्कर में तीन श्रेणियों: बेस्ट फिल्म, बेस्ट अडॉप्टेड  स्क्रीनप्ले और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नॉमित हुई थी और सब मे पुरस्कार जीतने में सफल रही.

बायडेन राज में ट्रंप के दिए जख्मों पर मरहम लगाने के लिए 94 वें ऑस्कर को भी माध्यम बनाया गया है, इसलिएइसमें रेसियल और जेंडर डाइवर्सिटी को चटखदार किया गया है. जेनलैंगिक डाइवर्सिटी का, विल स्मिथ औरसमलैंगिक सेक्स की प्रतीक एरियाना दुबोस रेसियल और जेंडर डाइवर्सिटी का मिश्रित रूपहैं.मूक बधिर रॉय कोत्सर भी एक अलग विविधता के प्रतीक रहे.

बहरहाल, ऑस्कर की घोषणा के एक दिन पूर्व अर्थात 26 मार्चको “हॉलीवुड में महिला शक्ति की प्रतीक : जेन कम्पियन’ के नाम से मेरा एक लेख इस  अखबार के साथ कई पोर्टलों पर प्रकाशित हुआ था. उसलेख में मैने इन चार में से तीन : जेन , विल स्मिथ, और एड्रिआना दुबोस के विजयी बनने कीप्रबल सम्भावनाजाहिर किया था, जो सही साबित हुआ.जेन के विषय में लिखा था, कि वह ‘द पॉवर ऑफ़ द डॉग’ के लिए बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड जीत करहिस्ट्री की ग्रेटेस्ट महिला डायरेक्टर बनसकती हैं और बन गईं.मेरे दावे का आधार हॉलीवुड में नस्लीय और लैंगिक विविधता को बढ़ावा देने की पॉलिसी रहा. इस पॉलिसी के कारणविल स्मिथ बायोपिक फिल्म ‘ किंग रिचर्ड ‘ के लिए बेस्ट एक्टर तथा एरियाना दुबोस वेस्ट साइड स्टोरी के लिए बेस्ट सपोर्टिंग ऐक्ट्रेस का ख़िताब जीतने में सफल रही.किंग रिचर्ड में महान विल स्मिथने टेनिस की महान विलियम्स बहनें : वीनस और सेरेना के पिता और कोच की भूमिका निभाई है.

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फिल्म कोडा का एक दृश्य

अमेरिका एक ऐसा देश है जहाँपुरस्कारों के बंटवारे मेंभारत के प्रभुवर्ग सवर्णों की भांति सिर्फमेरिट (मेरिट के नाम पर उच्च जातियों) को तरजीह नहीं दी जाती है : तरजीह दी जाती है व्यापक सन्देश देने को. यही सन्देश ही इस बार मूक-बधिरों का दर्द बयाँ करने वाली फिल्म ‘कोडा’ के बेस्ट फिल्म चुने जाने का कारण बना. डाइवर्सिटी के हिसाब से सबसे यादगार वर्ष के रूप में चिन्हित होने वाले 2002 में काले डेंजिल वाशिंग्टन और हैले बेरी को एक साथ क्रमशः बेस्ट एक्टर और ऐक्ट्रेस का खिताब मिला तो उसके पीछे 2001 में घटित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुआ ब्लास्ट था. उस घटना के बाद नस्लीय विविधता से भरे अमेरिका में एकजुटता का बड़ा सन्देश देना था. इसी मकसद से उस वर्ष महान ब्लैक एक्टर सिडनी पोयटीयर को लाइफटाइम ऑस्कर से सम्मानित किया गया था. तो यह तथ्य है कि अमेरिका लम्बे समय से ऑस्कर जैसे बड़े मंच का सद्व्यवहार बड़ा सन्देश देने के लिए करता रहा है.

इस बात से वे खुश हो सकते हैं कि इस फिल्म ने विदेशी फिल्मों की श्रेणी में बेस्ट फिल्म का ऑस्कर झटक लिया है.बहरहाल जिस तरह जो बायडेन राज में व्यापक राष्ट्रहित में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अल्पसंख्यकों को दिए गए जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास हुआ है, ऑस्कर- 2022 से प्रेरणा लेते हुए मोदी सरकार को भी पिछले कुछ वर्षों में भारत के अल्पसंख्यकों, दलितों को मिले जख्मों पर मरहम लगाने का कुछ ठोस प्रयास करना चाहिए।

पिछले दिनों नरेंद्र मोदी के अमेरिकी क्लोन डोनाल्ड ट्रंप ने मेक अमेरिका ग्रेट अगेन जैसे भावनात्मक नारे के जोर से वहां की सामाजिक और लैंगिक विविधता को बड़ा आघात पहुँचाया था. ट्रंप के दौर में अमेरिकी गोरों द्वारा जॉन फ्लायडो की हत्या से अश्वेतों में असुरक्षा बढ़ी थी, जिससे अंतर्राष्ट्रीय जगत में अमेरिका की छवि धूमिल होने के साथ वहां की एकजुटता को बड़ा आघात लगा था . ट्रंप के हटने के बाद जब जो बायडेन 2021 के जनवरी में अमेरिका की सत्ता संभाले, उन्होंने ट्रंप सरकार द्वारा अश्वेतों को दिए गए जख्मों पर मरहम लगाने की दिशा में कदम बढाया. उसी के फलस्वरूप 2021 में  93वें ऑस्कर में चीनी मूल की झाओ को ऑस्कर हिस्ट्री में बेस्ट डायरेक्टर का ख़िताब जितने वाली दूसरी महिला होने का गौरव मिला. बायडेन राज में ट्रंप के दिए जख्मों पर मरहम लगाने के लिए 94 वें ऑस्कर को भी माध्यम बनाया गया है, इसलिए इसमें रेसियल और जेंडर डाइवर्सिटी को चटखदार किया गया है. जेनलैंगिक डाइवर्सिटी का, विल स्मिथ औरसमलैंगिक सेक्स की प्रतीक एरियाना दुबोस रेसियल और जेंडर डाइवर्सिटी का मिश्रित रूपहैं.मूक बधिर रॉय कोत्सर भी एक अलग विविधता के प्रतीक रहे.

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अभिनेता, फिल्म निर्माता  और रैपर विल स्मिथ हॉलीवुड की हिस्ट्री के सबसे पॉपुलर अभिनेताओं में से एक हैं. वह पिछले कुछ वर्षों से जार्ज क्लूनी, टॉम क्रूज जैसे श्वेत अभिनेताओं को लोकप्रियता में पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़े स्टार का दर्जा एन्जॉय कर रहे थे, वह बतौर बेस्ट एक्टर चार बार गोल्डन ग्लोब्स और दो बार ऑस्कर के लिए नामित किये जा चुके थे. वह इस इस वर्ष जनवरी में ऑस्कर का सेमी फाइनल माने जाने वाले गोल्डन ग्लोब्स में ‘ किंग रिचर्ड’ के लिए बेस्ट एक्टर का ख़िताब जीतने में कामयाब रहे थे. ऐसे में लोग इस बार ऑस्कर में उनके कामयाब होने की उम्मीद पाल लिए थे. ऐसे में यदि उन्हें ऑस्कर नहीं मिलता डोनाल्ड ट्रंप के दिए जख्मों को सहलाते अमेरिका के काले समुदाय को भारी आघात लगता. शायद इस बात को ध्यान में रखते हुए ही उन्हें इस बार ऑस्कर दे दिया गया . स्मिथ के साथ इस बार जिस तरह एरियाना डुबोस को सपोर्टिंग ऐक्ट्रेस की ट्राफी मिली है उससे वहां ब्लैक्स में कुछ – कुछ 2002 जैसी फिलिंग आनी तय है. बहरहाल मैंने 26 मार्च के अपने लेख में ऑस्कर पुरस्कारों को लेकर जो कयास लगाया था, वह काफी हद तक सही हुआ, सिवाय एक खास बात के. मैंने उस लेख में कहा था कि इस बार डाइवर्सिटी का रंग तो चटखदार होगा ही, किन्तु जिस तरह भारत की ओर से पहली डोक्युमेंट्री फिल्म के रूप में ‘ राइटिंग विद फायर’ नॉमिनेशन पाई है, उसे देखते हुए जब 28 मार्च  की सुबह ऑस्कर का लाइव प्रसारण होगा, उसे भारतीयों, खासकर आंबेडकरवादियों  को जरुर देखना चाहिए. हो सकता है राइटिंग विद फायर के कारण लोग 28 की सुबह उठकर टीवी खोले होंगे. किन्तु यह डॉक्युमेट्री भी ऑस्कर में में हमारी प्रत्याशा पूरा करने से दूर रह गयी . इसे अमेरिका की डॉक्युमेंट्री ‘समर ऑफ़ द सोल’  के समक्ष मात खानी पड़ गयी.

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डाइवर्सिटी के लिहाज इस वर्ष सबसे बड़ी कसक छोड़ गये रयूसुके हमागुची. यदि वह  ‘ड्राइव माय कार’ बेस्ट डायरेक्टर का खिताब जीत लेते तो ऑस्कर में लगातार पांचवी बार अश्वेतों को बेस्ट डायरेक्शन के लिए ऑस्कर जीतने का गौरव हासिल हो जाता. पिछले चार वर्षों से अश्वेत ही लगातार बेस्ट डायरेक्टर का ऑस्कर जीतते रहे हैं. 2018 में ‘द शेप ऑफ़ वाटर’ के लिए गिलेर्मो डेल, 2019 में ‘रोमा’ के लिए अल्फ़ान्सो क्वारोन, 2020 में ‘पैरासाईट’  के बोंग जू और 2021 में ‘नोमैडलैंड’ के लिए ऑस्कर जीतने वाली क्लो झाओ अश्वेत ही रही. लेकिन अश्वेतों को इसका खूब दुःख भी नहीं होना चाहिए. क्योंकि  इस श्रेणी का ऑस्कर वंचित समूहों की हीजेन कम्पियन के हिस्से में गया है. जो लोग ड्राइव माय कार के बेस्ट डायरेक्शन श्रेणी में विजयी न होने से दुखी होंगे, अंततः इस बात से वे खुश हो सकते हैं कि इस फिल्म ने विदेशी फिल्मों की श्रेणी में बेस्ट फिल्म का ऑस्कर झटक लिया है.बहरहाल जिस तरह जो बायडेन राज में  व्यापक राष्ट्रहित में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अल्पसंख्यकों को दिए गए जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास हुआ है, ऑस्कर- 2022 से प्रेरणा लेते हुए मोदी सरकार को भी पिछले कुछ वर्षों में भारत के अल्पसंख्यकों, दलितों को मिले जख्मों पर मरहम लगाने का कुछ ठोस प्रयास करना चाहिए।

लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

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