Thursday, June 25, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

साहित्य

वीरेंद्र यादव बनाम ज्वालामुखी यादव

आज सुबह अभी हम इलाहाबाद से आई प्रो राजेंद्र कुमार के न रहने की दुखद खबर से उबरे भी नहीं थे कि लखनऊ से प्रख्यात आलोचक वीरेंद्र यादव के जाने की स्तब्धकारी खबर आई। सहसा भरोसा करना मुश्किल था कि यह कैसे हो सकता है? दो दिन पहले उनके बीमार होने की सूचना मिली थी, लेकिन यह बीमारी इतनी घातक है यह न मालूम था। उनके जाने से बहुत कुछ खाली हो गया. वह गर्मजोशी से भरे बुद्धिजीवी थे जो केवल किताबी आलोचना तक सीमित नहीं थे, बल्कि लगभग सभी समकालीन मुद्दों पर लिखते और बोलते थे और बेलाग बोलते थे। उनके व्यक्तित्व के इन्हीं पहलुओं को छूता प्रख्यात कथाकार मधु कांकरिया की एक छोटी टिप्पणी जो उनके बहत्तरवें जन्मदिन पर चार साल पहले प्रकाशित की गई थी। आज पुनः उनको श्रद्धांजलिस्वरूप प्रकाशित की जा रही है।

मूँदहु आंख भूख कहुं नाहीं

अब गरज तो विश्व गुरु कहलाने से है, भूख बढ़ाने में विश्व गुरु कहलाए तो और भूख मिटाने में विश्व गुरु कहलाए तो। उसके ऊपर से 111 की संख्या तो वैसे भी हमारे यहां शुभ मानी जाती है। भारत चाहता तो पिछली बार की तरह, भूख सूचकांक पर 107वें नंबर पर तो इस बार भी रह ही सकता था। पर जब 111 का शुभ अंक उपलब्ध था, तो भला हम 107 पर ही क्यों अटके रहते? कम से कम 111 शुभ तो है। भूख न भी कम हो, शुभ तो ज्यादा होगा।

विश्वगुरु की सीख का अपमान ना करे गैर गोदी मीडिया

इन पत्रकारों की नस्ल वाकई कुत्तों वाली है। देसी हों तो और विदेशी हों तो, रहेंगे तो कुत्ते...

तुम्हारी लिखी कविता का छंद पाप है

मणिपुर हिंसा पर केन्द्रित कवितायें  हम यहाँ ख्यातिलब्ध बांग्ला कवि जय गोस्वामी की कुछ कवितायें प्रकाशित कर रहे हैं।...

हरिशंकर परसाई और शंकर शैलेंद्र की जन्मशती पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में  हरिशंकर परसाई और शंकर शैलेंद्र की जन्मशती पर संगोष्ठी का...

आखिरी टुकड़ाः  विवश जन के प्रतिरोध की कहानियां

 कहानीकार संजय गौतम के कहानी संग्रह  आखिरी टुकड़ा की पहली और सर्वाधिक लंबी कहानी है आखिरी टुकड़ा। पच्चीस कहानियों के इस संग्रह में शहर...

सत्ता और समाज परिवर्तन का ब्लूप्रिंट है बेगमपुरा

दूसरा और अंतिम भाग गौरतलब है, शोषण-उत्‍पीड़न के मामले में यदि सत्ता और बहुलतावादी समाज का गठजोड़ हो जाता है तो उत्‍पीड़ित की स्थिति बेहद...

राजनीति की कूटनीति में असहज एक संवेदनशील व्यक्तित्व

विश्वनाथ प्रताप सिंह जिन्हें अधिकांश लोग वीपी सिंह के नाम से जानते  हैं,  वह 7 अगस्त 1990 के बाद से भारत के उन चुनिंदा राजनेताओं में...

रैदास के दुख का कारण राज्य का अमानवीय और शोषक चरित्र है

पहला भाग  बेगमपुरा को समझने के लिए पहले तथागत बुद्ध के प्रतीत्‍यसमुत्‍पाद के सिद्धांत पर सरसरी तौर पर नजर डालना जरूरी महसूस हो रहा है। बेगमपुरा...

नामदेव ढसाल टैगोर से ज्यादा प्रासंगिक और बड़े कवि हैं!

विश्व कवि नामदेव ढसाल के जन्मदिन पर विशेष लेख गत वर्ष 15 जनवरी को दिवंगत होने वाले विश्वकवि नामदेव ढसाल का जन्म 15 फरवरी, 1949...

संतराम बी ए आर्यसमाज के भीतर के जातिवाद से दिन-रात लड़ते रहे

 संतराम बी.ए को जब याद करते हैं तब हमारे सामने एक ऐसे व्यक्ति की शख्सियत उभरती है जो जितनी सज्जनता से अपनी सामाजिक गतिविधियों...
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