Thursday, November 5, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

साहित्य

यादवों ने किस कृष्ण का निर्माण किया है?

पिछड़ों के साहित्य की खोज में जेल की कोठरियों की छानबीन, अदालती पराजयों का गहन अध्ययन, फांसी के फंदों और थानों की हवालातों के विश्लेषण से पिछड़ों का साहित्य खोजने की परिकल्पना की गई है। इसके साथ ही आदि लिपिकार पथरकटों, आदि आविष्कारक चरवाहों, किसानों, देशों के अन्वेषक और खोजी मल्लाहों, नाइयों, धोबियों, बुनकरों की ऐतिहासिक जीवन यात्राओं के अलावा विभिन्न घटनाओं के प्रभावों का गहन अध्ययन भी एक मुख्य परिकल्पना है और मुझे लगता है इन्हीं सब में एक विराट पिछड़ा साहित्य मौजूद है।

वीरेंद्र यादव बनाम ज्वालामुखी यादव

आज सुबह अभी हम इलाहाबाद से आई प्रो राजेंद्र कुमार के न रहने की दुखद खबर से उबरे भी नहीं थे कि लखनऊ से प्रख्यात आलोचक वीरेंद्र यादव के जाने की स्तब्धकारी खबर आई। सहसा भरोसा करना मुश्किल था कि यह कैसे हो सकता है? दो दिन पहले उनके बीमार होने की सूचना मिली थी, लेकिन यह बीमारी इतनी घातक है यह न मालूम था। उनके जाने से बहुत कुछ खाली हो गया. वह गर्मजोशी से भरे बुद्धिजीवी थे जो केवल किताबी आलोचना तक सीमित नहीं थे, बल्कि लगभग सभी समकालीन मुद्दों पर लिखते और बोलते थे और बेलाग बोलते थे। उनके व्यक्तित्व के इन्हीं पहलुओं को छूता प्रख्यात कथाकार मधु कांकरिया की एक छोटी टिप्पणी जो उनके बहत्तरवें जन्मदिन पर चार साल पहले प्रकाशित की गई थी। आज पुनः उनको श्रद्धांजलिस्वरूप प्रकाशित की जा रही है।

मूँदहु आंख भूख कहुं नाहीं

अब गरज तो विश्व गुरु कहलाने से है, भूख बढ़ाने में विश्व गुरु कहलाए तो और भूख मिटाने में विश्व गुरु कहलाए तो। उसके ऊपर से 111 की संख्या तो वैसे भी हमारे यहां शुभ मानी जाती है। भारत चाहता तो पिछली बार की तरह, भूख सूचकांक पर 107वें नंबर पर तो इस बार भी रह ही सकता था। पर जब 111 का शुभ अंक उपलब्ध था, तो भला हम 107 पर ही क्यों अटके रहते? कम से कम 111 शुभ तो है। भूख न भी कम हो, शुभ तो ज्यादा होगा।

विश्वगुरु की सीख का अपमान ना करे गैर गोदी मीडिया

इन पत्रकारों की नस्ल वाकई कुत्तों वाली है। देसी हों तो और विदेशी हों तो, रहेंगे तो कुत्ते...

तुम्हारी लिखी कविता का छंद पाप है

मणिपुर हिंसा पर केन्द्रित कवितायें  हम यहाँ ख्यातिलब्ध बांग्ला कवि जय गोस्वामी की कुछ कवितायें प्रकाशित कर रहे हैं।...

ऊंट भी मनुष्य का मनोविज्ञान समझते हैं !

जब हम बच्चे थे तो हमारे घर में कई ऊंट थे। केवल हमारे घर में थे सो बात नहीं, सभी किसानों के घर में...

कबीर और नागार्जुन का साहित्य प्रतिरोध करने की ताकत देता है : चौथीराम यादव

जन्मदिन पर पूरी शिद्दत के साथ याद किए गए कबीर और आधुनिक कबीर जनकवि नागार्जुन वाराणसी। गुरुवार को जनसंस्कृति मंच, दरभंगा तथा एल.सी .एस .कालेज...

मुहावरों और कहावतों में जाति

लोक-समाज में मुहावरों और कहावतों का बहुत महत्व है।मुहावरा शब्दों के ऐसे समूह को कहते हैं,जो अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी अन्य अर्थको...

कबीर दास की लाइब्रेरी

(कबीर को याद करने के सबके अपने तरीके हैं । कवि-चिंतक देवेंद्र आर्य ने एक मिथक के बहाने कबीर के ज्ञान संसार की एक...

हबीब जालिब के कबीर

महान शायर हबीब जालिब (24 मार्च 1928-12 मार्च 1993 ) के अशआर और नज़्में हरेक जन आंदोलन के समय जनाकांक्षाओं की तरजुमानी करते हैं।...

समीक्षा का बाजार

 आज साहित्य के क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में समीक्षात्मक लेखन हो रहा है| प्रत्येक रचनाकार चाहता है कि उसकी रचनाओं पर समीक्षाएं लिखी जाएँ...
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