Thursday, March 26, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

साहित्य

वीरेंद्र यादव बनाम ज्वालामुखी यादव

आज सुबह अभी हम इलाहाबाद से आई प्रो राजेंद्र कुमार के न रहने की दुखद खबर से उबरे भी नहीं थे कि लखनऊ से प्रख्यात आलोचक वीरेंद्र यादव के जाने की स्तब्धकारी खबर आई। सहसा भरोसा करना मुश्किल था कि यह कैसे हो सकता है? दो दिन पहले उनके बीमार होने की सूचना मिली थी, लेकिन यह बीमारी इतनी घातक है यह न मालूम था। उनके जाने से बहुत कुछ खाली हो गया. वह गर्मजोशी से भरे बुद्धिजीवी थे जो केवल किताबी आलोचना तक सीमित नहीं थे, बल्कि लगभग सभी समकालीन मुद्दों पर लिखते और बोलते थे और बेलाग बोलते थे। उनके व्यक्तित्व के इन्हीं पहलुओं को छूता प्रख्यात कथाकार मधु कांकरिया की एक छोटी टिप्पणी जो उनके बहत्तरवें जन्मदिन पर चार साल पहले प्रकाशित की गई थी। आज पुनः उनको श्रद्धांजलिस्वरूप प्रकाशित की जा रही है।

मूँदहु आंख भूख कहुं नाहीं

अब गरज तो विश्व गुरु कहलाने से है, भूख बढ़ाने में विश्व गुरु कहलाए तो और भूख मिटाने में विश्व गुरु कहलाए तो। उसके ऊपर से 111 की संख्या तो वैसे भी हमारे यहां शुभ मानी जाती है। भारत चाहता तो पिछली बार की तरह, भूख सूचकांक पर 107वें नंबर पर तो इस बार भी रह ही सकता था। पर जब 111 का शुभ अंक उपलब्ध था, तो भला हम 107 पर ही क्यों अटके रहते? कम से कम 111 शुभ तो है। भूख न भी कम हो, शुभ तो ज्यादा होगा।

विश्वगुरु की सीख का अपमान ना करे गैर गोदी मीडिया

इन पत्रकारों की नस्ल वाकई कुत्तों वाली है। देसी हों तो और विदेशी हों तो, रहेंगे तो कुत्ते...

तुम्हारी लिखी कविता का छंद पाप है

मणिपुर हिंसा पर केन्द्रित कवितायें  हम यहाँ ख्यातिलब्ध बांग्ला कवि जय गोस्वामी की कुछ कवितायें प्रकाशित कर रहे हैं।...

हरिशंकर परसाई और शंकर शैलेंद्र की जन्मशती पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में  हरिशंकर परसाई और शंकर शैलेंद्र की जन्मशती पर संगोष्ठी का...

प्रेमचंद ने समाज की विसंगतियों से कलम के बल पर होड़ लिया – कृष्ण कुमार यादव

  वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद एक साहित्यकार, पत्रकार और अध्यापक के साथ ही आदर्शोन्मुखी व्यक्तित्व के धनी थे। एक पत्रकार को कभी भी पक्षकार नहीं होना...

छोटे किसान क्यों लगातार बनते जा रहे हैं मजदूर

शहरों में बैठे जिन लोगों को लगता है कि खेती करना बहुत आसान है, ऐसे लोगों को प्रेमचंद की कहानी पूस की रात जरूर...

वर्ग तथा जातीय उत्पीड़न के बीच मजदूर वर्ग का पक्ष!

वर्ग के अंदर के अंतर्विरोध में जातीय उत्पीड़न उपेक्षा के रूप में आता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के दलित मंत्री के इस्तीफा देना...

जन नाट्य मंच के 50 वर्ष

1973 में स्थापित जन नाट्य मंच (जनम), दिल्ली में स्थित एक प्रमुख नुक्कड़ नाटक समूह, इस वर्ष अपना स्वर्ण जयंती समारोह शुरू करने के...

सत्राची सम्मान- 2022 प्रो. चौथीराम यादव को

हिंदी के सुप्रसिद्ध आलोचक और धुरंधर वक्ता प्रोफ़ेसर चौथीराम यादव को 2022 का सत्राची सम्मान देने की घोषणा की गई है। प्रोफ़ेसर चौथीराम यादव...

ओमप्रकाश वाल्मीकि हिन्दी दलित साहित्य के पुरोधा और शिखर लेखक हैं

ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान समारोह- 2022 का आयोजन  30 जून 2022, शाम 5 बजे, साहित्य चेतना मंच, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) द्वारा साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि...
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