Monday, June 24, 2024
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फर्जी पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट संचालक ने की 20 करोड़ की जालसाजी, गिरफ्तार, 800 छात्रों का भविष्य अंधकार में

गोरखपुर से संचालित करता था नेटवर्क, उत्तर प्रदेश के 14 शहरों में बनाया था फ्रेंचाइजी गोरखपुर। पैरामेडिकल कोर्स करके अस्पताल में सहायक चिकित्सक के रूप में सेवा देने वाले सैकड़ों स्टूडेंट्स उस समय सकते में आ गए जब गोरखपुर की पुलिस ने एक शातिर इंस्टीट्यूट संचालक को गिरफ्तार किया। इस इंस्टीट्यूट में संचालक पैरा मेडिकल […]

गोरखपुर से संचालित करता था नेटवर्क, उत्तर प्रदेश के 14 शहरों में बनाया था फ्रेंचाइजी

गोरखपुर। पैरामेडिकल कोर्स करके अस्पताल में सहायक चिकित्सक के रूप में सेवा देने वाले सैकड़ों स्टूडेंट्स उस समय सकते में आ गए जब गोरखपुर की पुलिस ने एक शातिर इंस्टीट्यूट संचालक को गिरफ्तार किया। इस इंस्टीट्यूट में संचालक पैरा मेडिकल से सम्बंधित तमाम कोर्स कराने के नाम पर स्टूडेंट्स से मोटी रकम लेता था, फिर उन्हें अब्दुल कलाम इंस्टीट्यूट और आयुष पैरामेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नाम से फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट देता था। पड़ताल में मालूम चला कि आगरा के रहने वाले पंकज पोरवाल ने शाहगंज में अब्दुल कलाम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के नाम से बोर्ड ऑफिस खोलकर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इसकी फ्रेंचाइजी देकर पैरा मेडिकल कालेज खोलवा रखा था।

इस मामले में एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर, एएसपी मानुष पारिक व एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने सोमवार को संयुक्त प्रेस वार्ता में पकड़े गए जालसाज के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एसएसपी ने आरोपी की गिरफ्तारी करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया है। एसएसपी ने बताया कि जिस जिले में फ्रेंचाइजी लेकर संस्थाएं संचालित की जा रही हैं, वहां की पुलिस को पत्र भेजा जाएगा।

जानकारी के अनुसार, पंकज ने वर्ष 2013 से अब तक करीब 800 से अधिक स्टूडेंट्स से मोटी रकम वसूल कर उन्हें फर्जी डिग्री थमा दी। फर्जी पैरामेडिकल कॉलेज खोलकर छात्रों से 20 करोड़ रुपये से अधिक की जालसाजी करने के आरोपी संचालक पंकज पोरवाल के जालसाजी का यह नेटवर्क गोरखपुर और आगरा समेत उत्तर प्रदेश के 14 शहरों में फैला हुआ है।

बीते दिनों चौरी-चौरा पुलिस ने केस भी दर्ज किया था। हालांकि, बाद में यह केस गुलरिहा पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इन कॉलजों में कोर्स बिना किसी विधिक मान्यता के कराया जा रहा है। साथ ही स्टूडेंट्स को जारी मार्कशीट और सर्टिफिकेट भी फर्जी निकला। इसके बाद गुलरिहा पुलिस ने जालसाज कॉलेज संचालक पंकज पोरवाल को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक, पंकज पोरवाल साल 2013 में आगरा में ऑफिस खोलकर अब्दुल कलाम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट का संचालन कर रहा था। इसने अब तक कुल 14 इंस्टीट्यूट/ फ्रेन्चाइजी अवैध और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर खोल रखा है। जो फिलहाल, उत्तर प्रदेश के 12 जिलों में चल रहा है। इन कॉलेजों के जरिए साल 2013 से अब तक कुल 800 बच्चों का एनरोलमेंट किया गया है। पुलिस के मुताबिक, पंकज पोरवाल के इंस्टीट्यूट की ओर से फ्रेंचाइजी देने के लिए 2 से 3 लाख रुपए सम्बंधित पैरामेडिकल कॉलेज से ले जाती थी। जबकि, स्टूडेंट्स की प्रवेश फीस और परीक्षा फीस अलग से ली जाती है। पंकज ने अपने ‘अब्दुल कलाम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट’ का रजिस्ट्रेशन NCT दिल्ली/ चिटफंड से कराया था, जिसमें कुल 13 पदाधिकारी भी हैं। इन सभी का जालसाज से व्यक्तिगत सम्बंध है।

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पुलिस के मुताबिक, इन पदाधिकारियों में इन्दीवर पोरवाल (भाई), कंचन पोरवाल (पत्नी), जयवीर प्रसाद (चाचा), अनिरुद्ध कुमार (मित्र), नरेश कुमार (मित्र), निखिल कुमार (मित्र), कमलकान्त (मित्र), कुलदीप वर्मा (मित्र), सुरेन्द्र कुमार (मित्र), रुची गुप्ता (सहयोगी), दर्शन कुमार खट्टरी (मित्र), प्रेमचन्द्र (मित्र) और मोहित कुमार भी (मित्र) है।

वहीं, एसएसपी ने बताया कि इसी मामले में चौरीचौरा के विशंभरपुर निवासी विजय प्रताप सिंह को कुशीनगर के हाटा थाने से जेल भेजा गया था। छूटने के बाद कोर्ट के आदेश पर उन्होंने चौरीचौरा थाने में 13 जनवरी को केस दर्ज कराया। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की तो पता चला कि एक संस्था आगरा के शाहगंज में अब्दुल कलाम ऑफ इंस्टीट्यूट नाम से है। यहां से जिलों में लोगों से तीन से चार लाख रुपये लेकर फ्रेंचाइजी दी जाती है।

एसएसपी ने बताया कि नियमानुसार ऐसी संस्था को खोलने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट पैरामेडिकल या अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में पंजीकरण कराना होता है। दोनों जगहों पर जानकारी लेने पर पता चला कि पंकज के इंस्टिट्यूट का पंजीकरण कहीं नहीं है। फिर डीजीएमई (Director General of Medical Education and Training Uttar Pradesh) और सीएमओ दफ्तर में भी जांच कराने पर कोई प्रमाण नहीं मिला। इससे साबित हो गया कि संस्था फर्जी है। पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और डिग्री को देखा तो उस पर अंग्रेजी में साफ-साफ लिखा था कि इसका इस्तेमाल किसी भी सरकारी या प्राइवेट नौकरी में नहीं किया जा सकता है।

करवाए जाते थे यह कोर्स

ANM, GDA., MEDICAL DRESSER, CMS & ED, DMLT, DMRT, X-RAY/ ECG, CMLT, CCCE, DENTAL NURSHING, DENTAL HYGIENIST, DOTT, DIALYSIS TECHNICIAN, DIPLOMA IN HEALTH SANITARY, OPTHALMIC ASSISTANT, DPT, HDHHM आदि।

इन कॉलेज के नाम आए सामने

जीवन छवि पैरा मेडिकल कालेज: पता- 62 नीम सराय, पीडीए कॉलोनी, मुण्डेरा प्रयागराज। (संचालक- निरंकार त्रिपाठी)। शम्भूनाथ तिवारी कॉलेज ऑफ नर्सिंग: पता- गंगौली पुरा बाजार अयोध्या। (संचालक- चन्द्रदेव तिवारी)। छत्रपति शिवाजी कॉलेज ऑफ साइंस एंड पैरामेडिकल: पता- निकट हनुमान मंदिर महावीर लेन देवरिया। (संचालक- प्रशांत कुमार कुशवाहा)। वंश पैरा मेडिकल कॉलेज: पता- सिर्सागंज, फिरोजाबाद। (संचालक- कमल किशोर)। प्रतिभा पैरा मेडिकल एंड नर्सिंग कॉलेज: पता- ट्रस्ट देवरिया मीर देवरिया। (संचालिका- प्रतिभा सिंह)। जननी पैरा मेडिकल नर्सिंग साइंस: पता- निकट हनुमान चौराहा, हाटा नगर पालिका परिषद कुशीनगर। (संचालक- विजय प्रताप सिंह)। शौम्य साक्य पैरामेडिकल: पता- देवरिया। (संचालक रमाकांत कुशवाहा)। मां विन्धवासिनी पैरामेडिकल कॉलेज: पता- रानीडिहा, गोरखपुर। (संचालिका- गिरिजा त्रिपाठी)। अन्नपूर्णानंद पैरामेडिकल: पता- चरजपुरा बैरिया मोड, बलिया। (संचालक- गुप्तेश्वर पांडेय)। रुद्रा पैरामेडिकल कॉलेज: पता- रामनगर मोड़, वाराणसी। (संचालक- डॉ. पवन साहनी)। ऑल इंडिया पैरामेडिकल: पता- उर्दौली घुणपुरा, सीतापुर। (संचालक- राजीव विश्वास)। सतीश चंद्र इंस्टीट्यूट: पता- चांदपुर, शाहजहांपुर। (संचाकल- मुकेश शुक्ला)। सान हास्पिटल: पता- नरियावल अड्डा, बरेली। (संचालक- डॉ. फहीम खान)। वाशु पैरामेडिकल: पता- पावर स्टेशन के पास, गंगा कालोनी नरौना बुलंदशहर। (संचालिका- रुचि)।

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