Tuesday, August 25, 2026
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राजनीति

नेहरू को कोसते कोसते नेहरू ही बेंचमार्क बन गए

हमारे देश का लोकतांत्रिक सिस्टम अविश्वसनीय हो गया है। देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म कर दी गई है — संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और सभी जांच एजेंसियों तक। आज सभी संवैधानिक संस्थाएं सिर्फ़ BJP और RSS के इशारे पर काम कर रही हैं। आज से दो हफ़्ते बाद, 25 जून को, जब 1975 में 19 महीने की इमरजेंसी और सेंसरशिप लागू होने के 51 साल पूरे हो जाएंगे, तो RSS और BJP के लोग अभिव्यक्ति की आज़ादी और 19 महीने की तानाशाही पर चर्चा करेंगे। 51 साल पहले हम भी उस इमरजेंसी के शिकार हुए थे। लेकिन 19 महीने की इमरजेंसी की तुलना में, हम पिछले 12 सालों से — यानी एक दशक से ज़्यादा समय से — अघोषित इमरजेंसी और सेंसरशिप का सामना कर रहे हैं।

जॉर्ज फर्नांडिस के बहाने विवादों की सियासत को मुड़कर देखना

जॉर्ज फर्नांडिस राजनीतिक जीवन विवादों से भरा रहा। 1974 की रेल हड़ताल को सरकार ने देशद्रोह कहा। दो करोड़ रेलकर्मी हड़ताल पर गए, रेल सेवा ठप हुई। विपक्ष ने इसे अराजकता कहा, सरकार ने बर्बादी। आपातकाल के दौरान 'बड़ौदा डायनामाइट केस' में उन पर बम विस्फोट की साजिश का आरोप लगा। बाद में आरोप साबित नहीं हुए, पर सरकार विरोध के नाम पर हिंसा की राह चुनने की आलोचना हुई। रक्षामंत्री रहते 2001 में 'तहलका डॉट कॉम' स्टिंग ऑपरेशन हुआ। उनके ऑफिस के लोगों को रक्षा सौदों में रिश्वत लेते दिखाया गया। आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में क्लीन चिट मिली, पर छवि धूमिल हो चुकी थी। आलोचक कहते हैं वे सत्ता विरोध के नाम पर टकराव की राजनीति करते थे। IBM/कोका-कोला को भगाने से भारत में निवेश और टेक्नोलॉजी आने में देरी हुई। सिद्धांत की जिद में कई बार व्यावहारिक फैसले पीछे छूट गए। कई मुलाकातों की याद और जॉर्ज फर्नांडिस की लंबी तथा विवादभरी राजनीतिक पारी का विश्लेषण करते हुये उनकी 99वीं जयंती पर जाने-माने चिंतक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सुरेश खैरनार।

सुनाली के ऊपर अत्याचार करनेवाले किस भ्रूण हत्या की बात कर रहे हैं और किन नारियों का वंदन ?

भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को हर रूप में चुनाव जीतने का औज़ार बना लिया। जो अधिनियम तीन साल पहले पारित हो गया था उसे एक बार फिर परिसीमन के लिए संसद में लाया गया। मौजूदा संख्या में भागीदारी न देने की बेईमानी को परिसीमन की आड़ में छुपाने की संघी-भाजपाई मंशा का पर्दाफाश हो गया तब बेहिसाब पैसा खर्च करके प्रधानमंत्री मोदी भ्रूण हत्या का रोना रो रहे हैं। लेकिन सवाल कई और भी हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की निवासी तीन महीने की गर्भवती घरेलू सहायिका सुनाली को जबरन बांग्लादेश की सीमा पार कराया गया। बिना किसी अपराध को उसे बांग्लादेश की जेल में रहना पड़ा। वहीं जेल में उसने अपने बच्चे को जन्म दिया। एक जटिल कानूनी लड़ाई के बाद वह अपने देश वापस आ पाई है। मोदी ने महिलाओं की गरीबी, लाचारी और भावनाओं का दोहन किया और उन्हें एकमुश्त वोटर के रूप देखा। आज देश में महिलाओं की दुर्दशा का कोई अंत नहीं। सबसे बड़ी बात कि संसद की मौजूदा स्थिति में महिलाओं को आरक्षण भाजपा देने को ही तैयार नहीं। ऐसे में किस भ्रूण हत्या की बात करके रोना-पीटना चल रहा है इसे समझा जाना चाहिए। जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक डॉ सुरेश खैरनार की खुली चिट्ठी।

क्या अब साम्राज्यवाद का सरगना नहीं रह पाएगा अमेरिका

क्यूबा के मौजूदा ऊर्जा संकट को पैदा करने और अब खुद क्यूबा पर कब्ज़ा जमाने की चाह रखने वाले ट्रंप के बयान को देखने के बाद, यह कहावत याद आ गई - 'नंगे से तो भगवान भी डरते हैं।' हालाँकि, इस 'नंगे' द्वारा शोषित की गई लड़कियों का गुस्सा अब पूरी दुनिया एपस्टीन फाइलों के ज़रिए देख रही है। फिर भी, इस 'नंगे' को रोकना ही दुनिया की सभ्यता पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा है। आखिर किसी में भी इस बारे में खुलकर बोलने की हिम्मत क्यों नहीं है?

साम्राज्यवाद के नए दौर की शुरुआत है ईरान पर हमला

घटनाओं में भारत की भूमिका उसकी बदलती विदेश नीति के बारे में आँखें खोलने वाली है। शुरुआत में भारत गुटनिरपेक्ष था, और उसके ईरान के साथ बहुत सौहार्दपूर्ण संबंध थे। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान बेहतरीन था। अब हम देखते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध से ठीक पहले इज़राइल का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य देश को पता नहीं था। उन्हें इज़राइल का सर्वोच्च सम्मान मिला, और उन्होंने यह वचन दिया कि भारत हर सुख-दुख में इज़राइल के साथ खड़ा रहेगा। अगले ही दिन, I-A ने ईरान पर हमला कर दिया। श्री मोदी ने ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर कोई ट्वीट नहीं किया, और एक ऐसा गोलमोल बयान जारी किया जिसमें हमलावर और पीड़ित देश, दोनों को एक ही तराज़ू में तौला गया।

Lok Sabha Election : सर्वोच्च न्यायालय ईवीएम से चुनाव कराने और वीवीपीएटी के अपने दिये गए फैसले पर पुनर्विचार करे

वोट किसी को दिया और वीवीपीएटी में वोट किसी दूसरी पार्टी को गया, ऐसी अनेक शिकायतें ईवीएम द्वारा वोट देने पर सामने आ रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल को मतपत्रों से होने वाले चुनावों की दिक्कतें बताते हुए ईवीएम से ही चुनाव कराये जाने का फैसला सुनाया। न्यायालय ने भले यह कहा हो लेकिन जनता का एक बड़ा तबका मतपत्रों के माध्यम से ही चुनाव कराये जाने के पक्ष में है।

पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह चुनावी मंचों से मातृशक्ति और स्त्री सशक्तिकरण के खोखले दावे करते हैं

अपने चुनावी भाषणों में देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री देश की महिलाओं को मातृ शक्ति का दर्जा दे सम्मान की बात कर रहे हैं लेकिन उनके मुंह से भाजपा के कथित गुंडों और बलात्कारियों द्वारा की गई करतूतों पर एक बोल नहीं निकलता। आरएसएस की शाखाओं में शामिल होने वाले युवाओं को कभी नारी सम्मान की बात नहीं सिखाई जाती।

Lok Sabha Election : गाजीपुर में जनप्रतिनिधि वर्षों से स्थानीय मुद्दों की कर रहे हैं उपेक्षा, ग्रामीणों ने किया चुनाव का बहिष्कार

लोकसभा चुनाव की जनसभा में नेता चाहे कितने भी वादे करें लेकिन जनता अपनी छोटी-छोटी सुविधाओं को पूरा करने के लिए अपने जनप्रतिनिधि से अपेक्षा रखती है।

Lok Sabha Election : मध्य प्रदेश में, जनता राजनैतिक दलों की असलियत समझ वोट डालने से बच रही है 

पिछले दस वर्षों में सत्ता में बैठे लोगों ने जनता के लिए क्या काम किया? इस बात को जनता भली-भांति समझ चुकी है। चुनाव में खड़े प्रत्याशियों को कहीं काले झंडे दिखाये जा रहे हैं तो कहीं उन्हें गाँव में घुसने नहीं दिया जा रहा है। लेकिन कहीं-कहीं जनता वोट न डाल अपनी गुस्सा जाहिर कर रही है। इसी वजह से इस बार वोट का प्रतिशत पिछले चुनाव के बनिस्बत कम है।

Lok Sabha Election : अखिलेश यादव ने कहा, वोट के लिए आरएसएस के सुर बदल गए हैं

एटा में जनसभा को संबोधित करते हुए सपा अध्यक्ष ने आरएसएस पर निशाना साधा।

Lok Sabha Election : संविधान और आरक्षण की रक्षा बन गया है सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा, राहुल गांधी के साथ एकजुट हो रहा बहुजन...

कुछ भाजपा नेताओं द्वारा 400 पार के पीछे संविधान बदलने की मंशा जाहिर किए जाने के बाद संविधान और आरक्षण बचाना चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है, जिस कारण आरक्षित वर्ग गर्मी की परवाह किए बिना वोट देने के लिए निकल रहा है।
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