सत्ता-पूंजी की ताकत से सामाजिक वातावरण को विषाक्त किया जा रहा है-डॉ आनंद कुमार

शिव कुमार पराग

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26 जनवरी। सोसायटी फॉर कम्युनल हार्मनी ने सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ कुछ दिनों से लगातार अपने कार्यक्रमों की शृंखला में 26 जनवरी की शाम को आनलाइन काव्यगोष्ठी का आयोजन किया। शाम 5.30 से 7 बजे तक चली इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता हिंदी के मूर्धन्य कवि-आलोचक व कला मर्मज्ञ अशोक वाजपेयी ने की और संचालन किया जाने-माने साहित्य समीक्षक डॉ गोपेश्वर सिंह ने।

गोष्ठी के आरंभ में डॉ आनंद कुमार ने आमंत्रित कवियों का स्वागत किया और सोसायटी फॉर कम्युनल हार्मनी की तरफ से चलायी जा रही गतिविधियों के बारे में बताते हुए कहा कि आज सत्ता तथा पूंजी की ताकत से देश के सामाजिक वातावरण को विषाक्त बनाने, लोकतंत्र को नष्ट करने, भाईचारा व राष्ट्रीय एकता को छिन्न-भिन्न करने की सुनियोजित और संगठित कोशिश हो रही है। इसके खिलाफ हर वर्ग से, सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र से आवाज उठनी चाहिए।

अशोक वाजपेयी ने कहा कि आजाद भारत में इतना बुरा दौर पहले कभी नहीं आया था। आज रोज हमारे लोकतंत्र में कटौती की जा रही है। और यह वे लोग कर रहे हैं जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुन कर आए हैं। जाहिर है, लोकतंत्र का इस्तेमाल लोकतंत्र को नष्ट करने के लिए किया जा रहा है। साहित्यकारों को भी इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। आज यह रचना धर्म का तकाजा है, साथ ही नैतिक धर्म और नागरिक धर्म का भी।

काव्य गोष्ठी में अपनी कविताएं सुनाने से पहले अध्यक्षीय उद्बोधन में अशोक वाजपेयी ने कहा कि आजाद भारत में इतना बुरा दौर पहले कभी नहीं आया था। आज रोज हमारे लोकतंत्र में कटौती की जा रही है। और यह वे लोग कर रहे हैं जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुन कर आए हैं। जाहिर है, लोकतंत्र का इस्तेमाल लोकतंत्र को नष्ट करने के लिए किया जा रहा है। साहित्यकारों को भी इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। आज यह रचना धर्म का तकाजा है, साथ ही नैतिक धर्म और नागरिक धर्म का भी।

काव्य गोष्ठी का समापन वरिष्ठ समाजवादी एवं साहित्य समीक्षक डॉ प्रेम सिंह के धन्यवाद ज्ञापन और वक्तव्य से हुआ। समापन से पहले आयोजक संस्था सोसायटी फॉर कम्युनल हार्मनी के अध्यक्ष डॉ आनंद कुमार ने बताया कि लगभग पांच हजार लोगों ने जूम तथा फेसबुक के जरिए इस कार्यक्रम को लाइव देखा।

देश के विभिन्न हिस्सों से जूम के जरिए आनलाइन काव्यपाठ में शामिल हुए कवियों के नाम इस प्रकार हैं-
अशोक वाजपेयी, प्रयाग शुक्ल, गिरधर राठी, शकील मोइन, मदन कश्यप, जयंत परमार, दिनेश कुशवाह, शिव कुमार पराग, संजय कुंदन, नरेन्द्र कुमार मौर्य, विनोद अग्निहोत्री, राजेन्द्र राजन।

शिव कुमार पराग जानेमाने कवि हैं। 

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