Wednesday, October 21, 2026
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वाराणसी : डीएनटी समुदाय द्वारा महिला दिवस का आयोजन

वाराणसी के बेलवा स्थित डीएनटी यूथ रिसोर्स सेंटर में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस एवं माता सावित्रीबाई फुले स्मृति दिवस के अवसर पर नट समुदाय संघर्ष समिति एवं उड़ान (UDAAN) के संयुक्त तत्वावधान में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

टेबल जर्नलिज्म के दौर में एक स्वतंत्र पत्रकार के सरोकार ‘आफ़त में गाँव’

पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में जिसकी आबादी 6 करोड़ से ज़्यादा है, जो यहाँ की आबादी का एक-चौथाई है। पिछले बारह सालों में विकास के नाम पर विस्थापन की विभीषिका का दस्तावेजीकरण किताब 'आफत में गांव' में है। इस किताब में वाराणसी, आजमगढ़, चंदौली और दूसरी जगहों के गांवों का और रोजी-रोटी कमाने के लिए संघर्ष कर रहे विस्थापित लोगों से सीधे बात कर उनकी त्रासदियों को दर्ज किया गया है। यह किताब असल में हमारे देश भर के उन गांवों की कहानी दिखाती है जो ऐसे संकटों में फंसे हैं।

मैदानी गांवों की सच्ची दास्तान बताती आवश्यक किताब ‘आफत में गांव’

पत्रकारिता की भाषा और शैली में जो सुस्पष्टता वाकई में होनी चाहिए, वह इन रिपोर्ट्स को पढ़कर लगा, जो बात कही गई है, वह आंखन-देखी हों, कहीं किसी कागज में लिखी हुई बात नहीं। कागजों में लिखी हुई बात यानि प्रेस विज्ञप्तियों में काट-छांट करके खबरें लिखी जा सकती हैं,रिपोर्ट्स नहीं। रिपोर्ट और खबरों में यही बेसिक अंतर है। 'आफत में गांव' में प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट्स इन बातों को साबित करती है।

वाराणसी : सभी निजी शैक्षणिक संस्थानों द्वारा मातृत्व लाभ देना जरूरी, राष्ट्रीय महिला आयोग ने दिया आदेश

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने वाराणसी स्थित सनबीम वीमेंस कॉलेज वरुणा को शिकायतकर्ता संगीता प्रजापति को सात दिनों के अंदर मातृत्व लाभ मुहैया कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के अनुसार मातृत्व लाभ प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान पर लागू होता है, क्योंकि यह प्रत्येक महिला का मूलाधिकार है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत यह एक बड़ी जीत हासिल हुई है।

बनारस : गांधी जयंती के अवसर पर ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आरंभ

सर्व सेवा संघ की 'एक कदम गांधी के साथ' पदयात्रा गांधी जयंती के दिन वाराणसी राजघाट से शुरू की गई है, जो अनवरत 56 दिनों तक विभिन्न जिलों-प्रदेशों से होती हुई संविधान दिवस के दिन दिल्ली राजघाट में सम्पन्न होगी। यह यात्रा  1000 किमी की दूरी तय करेगी। इस यात्रा का उद्देश्य देश में चल रहे नफरत और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अहिंसात्मक तरीके से विरोध दर्ज करना है।

हक़ की हर आवाज़ पर पहरेदारी है और विकास के नाम पर विस्थापन जारी है

[भव्यता के ख्वाब तले कुचले जा रहे स्वपन अब एक बड़े वर्ग की आँखों में चुभने लगे हैं। लोग दर्द में हैं और हक़ की आवाज पर सरकार की पहरेदारी है। धमकियाँ हैं। बावजूद इसके लोग अब भी लड़ रहे हैं। जब तक लोग लड़ रहे हैं तब तक उम्मीद जिंदा है। इस जिंदा उम्मीद के लिए न्याय की नियति क्या होगी, भविष्य क्या होगा, इस पर अभी तो प्रश्नवाचक का पेंडुलम वैसे ही झूल जा रहा है, जैसे समय के साथ चलने वाली घड़ी के बंद हो जाने पर उसका पेंडुलम खामोशी से झूलता रहता है और इंतजार करता रहता है कि कभी तो कोई उसकी चाभी भरकर उसे चला देगा।

बेराह बनारस में बवाल उर्फ मोदी सरकार के नौ साल

समर्थकों के विशेष वर्ग को उन आलोचनाओं को सुन अपना पारा नहीं चढ़ाना चाहिए, जिन आलोचनाओं में भारत सरकार, केंद्र सरकार या एनडीए सरकार का संबोधन प्रयोग किया जाता है। ये तीनों अब कहीं हैं ही नहीं। यहां तक कि अब तो विदेश भी मोदी सरकार ही जाती है, भारत सरकार नहीं। जब भारत सरकार की जगह एक व्यक्ति विदेशी दौरों पर जाएगा, तो वो देश के कार्य से अधिक तवज्जो व्यक्तिगत कार्य को देगा।

अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का पीटा जा रहा ढिंढोरा, प्रशासन कह रहा ऐसी कोई परियोजना है ही नहीं

किसान मजदूर 8 महीने से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं। यह धरना तब शुरू हुआ जब 12-13 अक्टूबर को एसडीएम सगड़ी, कंधरापुर थानाध्यक्ष व अन्य राजस्वकर्मीयों द्वारा भारी पुलिस बल के साथ जबरन गांव में बिना किसी सूचना के सर्वे किया जाने लगा। गैरकानूनी कार्यवाई का ग्रामीणों ने विरोध किया तो महिलाओं, बुजुर्गों को बुरी तरह से मारा-पीटा गया और दलित महिलाओं को जाति सूचक गालियां दी गईं।

महिला पहलवानों के शोषण मामले में पीएम मोदी की चुप्पी पर दख़ल ने उठाया सवाल

सामाजिक संगठन दख़ल के लोगों ने निकाला कैंडिल मार्च वाराणसी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे महिला पहलवानों के धरने के समर्थन में बनारस की...

चंदौली : दीनदयाल उपाध्याय की भव्य प्रतिमा और लालबहादुर शास्त्री की उपेक्षा

पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के नाम पर बने पार्क में दुर्व्यवस्था का बोलबाला है। लोकार्पण के एक-दो साल बाद ही गायब हो गया पुस्तकालय, गंदगी से भरे उसी कमरे में अब सोते हैं पुलिसकर्मी। 

अंडिका बाग आंदोलनकारियों के ऊपर दर्ज किए जा रहे हैं फर्जी मुकदमें 

वक्ताओं ने कहा कि जिन लोगों ने फर्जी सर्वे करके गांव वालों का जीना दूभर कर दिया है, उनके खिलाफ मुकदमा होना चाहिए था। लेकिन ग्रामवासियों पर मुकदमा करके सरकार ने साबित कर दिया है कि वह किसान और मजदूर विरोधी है।
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