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मिल्कीपुर रेप काण्ड : राजनीतिक अश्लीलता के बीच दलित की बेटी को न्याय कैसे मिलेगा?
योगी सरकार लगातार प्रचार कर रही है कि उत्तर प्रदेश में महिलाएं पूर्णत: सुरक्षित हैं, लेकिन यहाँ रोज ही बलात्कार की अनेक घटनाएं सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2015 से 2020 तक दलित महिलाओं के खिलाफ बलात्कार के मामलों में 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में दलित महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बलात्कार की 10 घटनाएं प्रतिदिन रिपोर्ट की जाती हैं। उत्तर प्रदेश राज्य लगातार उन राज्यों की एनसीआरबी सूची में शीर्ष पर है जहां दलित विरोधी घटनाएं प्रचलित हैं। उसके खिलाफ कानून जरूर बने हुए हैं लेकिन वे पर्याप्त नहीं है क्योंकि पुलिस-प्रशासन अक्सर ही अपराधी के खिलाफ मामला दर्ज करने की बजाए उन्हें संरक्षित करने का काम करती है। संविधान में भले ही समानता व धर्मनिरपेक्षता की बात कही गई है लेकिन यहाँ रहने वाले अधिकतर आज भी जातिवादी आधार पर काम कर रहे हैं। ।
जौनपुर : ऐतिहासिक धरोहरों का शहर, लेकिन पर्यटन के नक्शे पर नहीं
आनंद देव -
जौनपुर की धरोहरें केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे एक जीवंत संस्कृति का प्रतीक भी हैं। अगर इन स्थलों को सहेजने और प्रचारित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, तो यह शहर न केवल अपनी पहचान बचा सकता है, बल्कि पर्यटन के माध्यम से विकास की नई कहानी भी लिख सकता है। जौनपुर शहर की पहचान जिन ऐतिहासिक धरोहरों से होती है, वे देखरेख के अभाव में लगातार खंडहर में तब्दील हो रही हैं। लगभग 600 साल पुरानी इस विरासत होने के बावजूद यह स्थान पर्यटन स्थल के रूप में अपनी कोई पहचान नहीं बना पाया है। पढ़िए आनंद देव की ग्राउंड रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में निवेश : सपने और ज़मीन की लूट की हक़ीकत को जागकर देखने की जरूरत है
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में तीस लाख करोड़ के निवेश को दावे को पेड मीडिया ने जितने जोर-शोर से प्रचारित करना शुरू किया उतनी शिद्दत से इस निवेश के कारण किसानों की ज़मीनों की लूट और हड़प की मंशा पर विचार नहीं किया गया लेकिन अयोध्या में हुई ज़मीनों की लूट और प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विभिन्न योजनाओं के लिए कि सानों की ज़मीन औने-पौने में हथिया लेने की चालाकियों ने लोगों के कान खड़े कर दिए हैं। इस निवेश की सचाई बहुत भयावह है। उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण सम्बन्धी स्थितियों और गतिविधियों पर मनीष शर्मा की यह खोजपूर्ण रिपोर्ट।
पूर्वांचल और पूर्वी अवध की नहरों में पानी नहीं, धान की फसल संकट में
पूर्वांचल के लगभग हर जिले में नहरें सूखी हुई हैं। धान की फसल निजी सिंचाई के साधनों से संभाली जा रही है। यही हाल पूर्वी अवध का भी है। नहरों में बालू जमा है तो माइनरों में घासें उगी हुई हैं। स्थानीय किसानों से बात करने पर पता चला कि उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। नेताओं के यहाँ जाइए तो वे इस आधार पर हमसे मिलते हैं हैं कि हम उनके वोटर हैं कि नहीं। नहर विभाग से आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिलता।
अयोध्या में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के बहाने भाजपा ने फूंका चुनावी बिगुल
लोकसभा 2024 के आम चुनावों के तारीख का ऐलान होने वाला ही है और उधर अयोध्या से भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर में...
करत रंग में भंग
देखी, देखी, इन मंदिर विरोधियों की शरारत देखी। आखिर, आखिर तक मंदिर के रास्ते में अड़चन डालने से बाज नहीं आ रहे हैं। जब...
बुद्ध की हड़पी गई विरासत पर प्रगतिशील इतिहासकारों की चुप्पी ने देश को हिन्दू फ़ासीवाद का तोहफा दिया
बीसवीं सदी के नौवें दशक में भारत में दो ऐसे आंदोलन हुए जिन्होंने देश की राजनीति की दशा हमेशा के लिये बदल दी। वे थे...
मुंबई : 22 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित करना ‘राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सत्ता का दुरुपयोग’ वाली याचिका खारिज हुई
मुंबई। अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर सरकार की तरफ से की गई सार्वजनिक अवकाश को रद्द करने...
राममंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को भुनाने में लगी भाजपा को आम लोगों की कठिनाइयों से कोई सरोकार नहीं
वाराणसी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनने वाले राममंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को बीजेपी अपने राजनैतिक एजेंडे के तहत भुनाने का प्रयास कर रही...
लोकतन्त्र की आत्मा को बचाए रखने के लिए आंदोलन और यात्राएं जरूरी हैं
आने वाली 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन होना है। इसके लिए जिस स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और इसमें...
गांधी का रामराज्य और बीजेपी-आरएसएस का श्रीरामराज्य
1980 के दशक में देश के इतिहास ने एक नया मोड़ लिया था। पहली बार, राममंदिर जैसा भावनात्मक मुद्दा आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे...
अयोध्या में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ प्रधानमंत्री और आरएसएस का निजी कार्यक्रम : राहुल गांधी
कोहिमा (भाषा)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि अयोध्या में 22 जनवरी के 'प्राण प्रतिष्ठा' कार्यक्रम को 'राजनीतिक...
मोदी की कृपा से रामलला भी बेघर से घरवान होने वाले हैं
आखिर, मोदी जी ने गलत क्या कहा है। फिर विरोधी बेबात का वितंडा क्यों खड़ा कर रहे हैं। क्या अयोध्या में रामलला के लिए...
गुलामी के प्रतीकों की मुक्ति का आन्दोलन !
आज यदि कोई गौर से देखे तो पता चलेगा कि न्यायिक सेवा, शासन-प्रशासन,उद्योग-व्यापार, फिल्म-मीडिया,धर्म और ज्ञान क्षेत्र में भारत के सवर्णों जैसा दबदबा आज की तारीख में दुनिया में कहीं नहीं है। आज की तारीख में दुनिया के किसी भी देश में परम्परागत विशेषाधिकारयुक्त व सुविधाभोगी वर्ग का ऐसा दबदबा नहीं है।
ज्ञानवापी मस्जिद – क्यों उखाड़े जा रहे हैं गड़े मुर्दे?
मीडिया में इन दिनों (मई 2022) ज्ञानवापी मस्जिद चर्चा में है। राखी सिंह और अन्यों ने एक अदालत में प्रकरण दायर कर मांग की...
ममता बनर्जी के बयानों पर हंगामा क्यों? (डायरी, 3 दिसंबर 2021)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका कांग्रेस के खिलाफ बयान देना है। अनेक राजनीतिक...
सलमान खुर्शीद का घर जलाना सांप्रदायिक असहिष्णुता
पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील भी हैं। उन्होंने हाल ही...
सोहराई पोरोब और हम आदिवासी (डायरी 5 नवंबर, 2021)
धर्म और मनुष्य के बीच का संबंध जड़ नहीं होता। धर्म भी बदलता है और मनुष्य भी बदलते हैं। इसे ऐसे भी कहा जा...

