Sunday, July 14, 2024
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सिनेमा ने युद्ध को मनोरंजन का माध्यम बनाया तो महिलाओं की दुर्दशा और जीवटता को भी दिखाया

सिनेमा बनाने वाले सिनेमा के विषय समाज से उठाते हैं भले ही उसका ट्रीटमेंट वे कैसे भी करें। बॉलीवुड हो या हॉलीवुड इधर युद्ध आधारित सिनेमा का चलन बढ़ा है। यह जरूर है कि विदेशी फिल्मों में भारत जैसे देशभक्ति का बखान नहीं दिखाया जाता। इधर महिला सैनिकों के जुनून पर भी अनेक फिल्में बनी। पढ़िये डॉ राकेश कबीर का यह आलेख

पीड़ा, यातना और बहिष्करण से आज़ादी की चाह में पितृसत्ता से छुटकारा पाने तक सिनेमा में तलाक के चित्र

तलाक एक व्यक्तिगत मुद्दा है, लेकिन इसका समाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। दुनिया के विकसित पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में अभी...

‘दीवार’ फांदकर हाजी मस्तान हिन्दी सिनेमा का एक इमोशन बन गया

अंडरवर्ल्ड पर फिल्में बनाने का चलन मूलतः हालीवुड का है। माफिया इटालियन शब्द माफियुसी से आया है, जिसका अर्थ होता है शेरदिल। हालीवुड में...

क्या 50 साल बाद एंग्री यंग मैन बाज़ार का खिलौना बन गया है

अमिताभ बच्चन की फिल्म जंजीर 11 मई, 1973 को रिलीज हुई थी। इस महीने इस 'घटना' को 50 साल हो गए। 'घटना' इसलिए कि...

द थ्री खान्स एंड द इमर्जेंस ऑफ न्यू इंडिया – आज के सांप्रदायिक दौर में भी तीनों खान क्यों लोकप्रिय

हिंदी सिनेमा का पटल पर खान सरनेम वाले तीन सितारों का उदय एक दिलचस्प परिघटना है। खान तिकड़ी करीब तीन दशकों से हिंदी सिनेमा...

मोहित करने के साथ ही असहमति की भी जगह बनाता है प्रकाश झा का सिनेमा

प्रकाश झा भारतीय सिनेमा के ऐसे महत्वपूर्ण निर्देशक हैं जो पर्दे पर बड़ी भव्यता के साथ भारतीय सामाजिक और राजनीतिक आख्यान रचने का बारीक...

हिंदी सिनेमा में राजकपूर का आना एक नए दौर का आगाज़ था

हिन्दी सिनेमा के बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व जो मुझे बहुत पसंद हैं वे हैं राजकपूर, गुरुदत्त, गिरीश कर्नाड एवं अमोल पालेकर। चौदह साल...

यह फिल्म नफ़रत की शिकार युवती और वर्तमान समय के एक युवा के बीच संवेदनाओं पर आधारित है।

https://www.youtube.com/watch?v=y0zcZgNO7OQ&t=465s एलियन-फ्रेंक नामक आनेवाली फिल्म के लेखक-निर्माता राजेश प्रसाद , निर्देशक अमर दुबे और अभिनेता लकी सिंह से बातचीत।

भारत-पाकिस्तान संबंध और बॉलीवुड की फिल्में

भारत में दो चीजें क्रिकेट और बॉलीवुड बहुत लोकप्रिय है और बात जब भारत पाकिस्तान के बीच आ जाये तो क्लाइमेक्स नये आयाम स्थापित...

एक कद्दावर अभिनेत्री जिसकी सामाजिक उपस्थिति भी एक मेयार है

अक्टूबर माह में अपनी तीन पसंदीदा फ़िल्में देखने को मिलीं इजाज़त, अर्थ और आखिर क्यूँ। रेखा, स्मिता पाटिल और शबाना आजमी के बेहतरीन अभिनय...

सिनेमा में पत्रकार न्याय के लिए लड़ने की एक उम्मीद हैं

 पत्रकार ड्यूश वेले (2020) ने मीडिया एडवोकेसी ग्रुप नामक निजी संस्था की वार्षिक रिपोर्ट रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का हवाला देते हुए 29 दिसम्बर 2020 को इंडियन...

बॉलीवुड में ऐतिहासिक सिनेमा हमेशा संदिग्ध विषय रहा है

इतिहास में बीते हुए समय में घटित घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण प्रस्तुत किया जाता है। इतिहास के अंतर्गत हम जिस विषय का अध्ययन करते...

बॉलीवुड ने कैम्पस के जीवन और राजनीति का उथला चित्रण किया है

भारतीय शिक्षा व्यवस्था और उसके विभिन्न पहलुओं पर बहुत कम फ़िल्में बनी हैं। शिक्षण संस्थानों की बात करें तो तक्षशिला, नालंदा विश्वविद्यालय और अन्य...

बॉलीवुड में भी डाइवर्सिटी रिपोर्ट प्रकाशित होनी चाहिए

मानव जाति की सबसे बड़ी समस्या आर्थिक और सामजिक गैर-बराबरी है, जिसे सदियों से ही दुनिया के तमाम शासक शक्ति के स्रोतों - आर्थिक,...

हरदिल अजीज दिलीप कुमार बहुत याद आएंगे !

भारत देश में लोग दीर्घायु शतायु होने का आशीर्वाद देते हैं।  दिलीप कुमार आज 98 साल की उम्र दुनिया को अलविदा कह गये। उन्होंने...

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