Sunday, May 26, 2024
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देश का निर्यात सितंबर में 2.6 प्रतिशत घटकर हो गया 34.47 अरब डॉलर

वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने निर्यात-आयात आंकड़ों पर मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि सितंबर के आंकड़े बता रहे हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यात के मोर्चे पर आशा की किरण नजर आ रही है। उन्होंने शेष छह महीनों में देश के निर्यात में सकारात्मक वृद्धि की उम्मीद जतायी।

नयी दिल्ली (भाषा)। देश का निर्यात इस साल सितंबर में 2.6 प्रतिशत घटकर 34.47 अरब डॉलर रहा।

शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर में आयात भी 15 प्रतिशत घटकर 53.84 अरब डॉलर रहा। लगातार 10वें महीने आयात में गिरावट देखी गई। इससे व्यापार घाटा कम होकर 19.37 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 में अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात 8.77 प्रतिशत घटकर 211.4 अरब डॉलर रहा। वहीं इन छह महीनों में आयात 12.23 प्रतिशत गिरकर 326.98 अरब डॉलर रहा।

वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने निर्यात-आयात आंकड़ों पर मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि सितंबर के आंकड़े बता रहे हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यात के मोर्चे पर आशा की किरण नजर आ रही है। उन्होंने शेष छह महीनों में देश के निर्यात में सकारात्मक वृद्धि की उम्मीद जतायी।

बर्थवाल ने कहा कि अप्रैल, मई, जून और जुलाई में जो संकुचन दोहरे अंकों में था, वह अब एकल अंकों में है। यह एक उम्मीद है जो आने वाले महीनों में भी देखने को मिलेगी।

वाणिज्य सचिव ने कहा कि इस माह साप्ताहिक निर्यात रुझान सकारात्मक दिख रहे हैं।

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने अनुमान लगाया है कि 2023 में वैश्विक व्यापार केवल 0.8 प्रतिशत बढ़ेगा।

बर्थवाल ने कहा कि इसके बावजूद भारत का निर्यात क्षेत्र ‘अच्छा’ कर रहा है और वास्तव में कार्यालय उपकरणों के लिए तुर्की और दवा निर्माण के लिए फिनलैंड, माल्टा तथा फिलीपीन जैसे नए बाजारों में भी प्रवेश कर रहा है।

आयात में गिरावट के कारणों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश की आयात में कमी लाने की नीति अच्छी तरह से काम कर रही है। साथ ही कच्चे तेल सहित वैश्विक जिंस की कीमतें भी कम हो गई हैं।

निर्यात संगठनों के महासंघ फियो के अध्यक्ष डॉ. ए शक्तिवेल ने निर्यात व आयात के सिंतबर के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुस्त वैश्विक आर्थिक वृद्धि, खासकर यूरोपीय संघ, ब्रिटेन तथा चीन जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में कमजोर मांग के साथ-साथ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसी अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि के कारण निर्यात में एक बार फिर से गिरावट आई है। हालांकि काफी हद तक गिरावट की दर कम हुई है।

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