Saturday, July 13, 2024
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घोसी उपचुनाव में वोटरों के मताधिकारों का हुआ हनन

मऊ। उत्तर प्रदेश के घोसी विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से कराने की घोषणा कर राज्य और जिला निर्वाचन अधिकारी भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे इतर नजर आ रही है। कल हुए मतदान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने आरोप लगाया कि सीओ विनीत सिंह ने बिना किसी […]

मऊ। उत्तर प्रदेश के घोसी विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से कराने की घोषणा कर राज्य और जिला निर्वाचन अधिकारी भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे इतर नजर आ रही है। कल हुए मतदान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने आरोप लगाया कि सीओ विनीत सिंह ने बिना किसी अधिकार के ‘आधार’ और वोटर कार्ड चेक करने के लिए मांगा, फिर गाली देते हुए वहाँ से भाग जाने के लिए कहा। जब स्थानीय लोगों ने अपना कार्ड फिर से मांगना चाहा तो उन्हें लाठी-डंडे से पिटवाया भी। कुछ लोगों के वोटर कार्ड को पुलिस द्वारा फर्जी बताया गया, जबकि काफी लोगों को यह कहकर पोलिंग बूथ के बाहर से ही लौटा दिया गया कि ‘आपका वोट पड़ चुका है।’ इनमें से काफी लोग पुलिस की बात को मानकर घर चले गए और जो नहीं माने उन्हें लाठियों से पीटा भी गया।

सीओ विनीत सिंह की मनमानी का आलम यह था कि वह अपने पद की गरिमा के विपरीत आचरण करते हुए सरकार के एजेंट के रूप में नजर आए। उनकी नजर अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग बहुल बूथों पर ही ज्यादा थी। वह हर आने-जाने वाले महिला-पुरुष पर नजर रखते और वोटर कार्ड चेक करते। यादव या मुस्लिम होने की स्थिति में उसे गाली देते हुए पहले फर्जी घोषित करते और फिर वहाँ से भाग जाने के लिए कहते। न भागने की स्थिति में ऐसे लोगों को पुलिस से पिटवाए भी।

सीओ से जो कुछ करना बाकी रह गया था, उसे पूरा कर दिया पोलिंग बूथ पर तैनात लापरवाह अधिकारियों ने। मतदान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों इस  बात की शिकायत की कि उनका वोट पहले ही किसी ने डाल दिया।

मोहम्मदिया बड़ागाँव बूथ नंबर 145 पर वोट डालने जा रही एक मुस्लिम महिला शाहीन ने बताया कि जब वह पोलिंग बूथ पर पीठासीन अधिकारी द्वारा मुझे बताया गया कि मेरा वोट पड़ चुका है।

घोसी विधानसभा क्षेत्र से बड़े पैमाने पर वोटरलिस्ट से लोगों के नाम गायब करने की भी शिकायतें मिली हैं। यहीं नहीं, कुछ जगहों पर तो ऐसी गड़बड़ी मिली, जिसमें एक बाप की औलाद को दूसरी जगह पर दूसरे का बेटा बना दिया गया। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग वोट देने से वंचित रह गए।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विपक्ष के नेता अखिलेश यादव ने घोसी उपचुनाव के मद्देनजर कहा है कि घोसी में बीजेपी की सरकार अपनी हार को पहले ही भाँप गयी थी, इसलिए उसने पुलिसकर्मियों से ‘भाजपा एजेंट’ की तरह काम करवाया। पुलिस प्रशासन ने वोटरों को वोट देने से रोका। अखिलेश ने आगे कहा कि बूथ संख्या 159 माणिकपुर असना से सपा कार्यकर्ता अशफाक़ उर्फ कल्लू को कोतवाली घोसी उठा ले गए तो वहीं दूसरी तरफ बूथ संख्या 28 में सपा के समर्थक लाल गोंड, विनय यादव, नितिन श्रीवास्तव और विक्रांत यादव को पुलिस बिना कारण बताए उठा ले गयी।

सीओ के इस बर्ताव की बावत मऊ जिले के छात्रनेता सावंत सिंह कहते हैं- ‘एक पुलिस अधिकारी का काम सिर्फ पोलिंग बूथ पर शांति व्यवस्था बनाए रखने की होती है न कि किसी का आईडी चेक करने की। वहाँ पर किसी भी प्रकार से शांति भंग न हो, यही एक पुलिस के अफसर का काम होता है। लेकिन यहाँ तो खेला कुछ और ही हो रहा है।’ सावंत ने सवाल खड़ा किया- ‘दूसरी पार्टियों की छोटी-सी गलती पर चुनाव आयोग का चाबुक चल जाता है, लेकिन यहाँ तो अधिकारी सरकार के एजेंट का काम कर रहा है और चुनाव आयोग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। एसका मतलब सीधा-सा है कि यह सब सरकार के इशारे पर हो रहा है।’

जो भी हो, 8 सितम्बर को सभी को पता चल जाएगा कि किसके सिर पर सजेगा जीत का ताज?

 

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