Saturday, May 9, 2026
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फ़लिस्तीन की जमीनी हकीकत : यात्रा से लौटकर

एक ज़िंदा शहर के ज़िंदा लोग किस तरह से अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं कि उन्हें पानी, बिजली और काम के लिए जूझना पड़ रहा है। कॉमरेड विनीत अपनी फ़लिस्तीन यात्रा के दौरान बेतेलहम, जेरूसलम, नाबलूस, जेनिन, आरमीनिया, जेरिकों तथा जोर्डन वैली गए थे। उन्होंने फ़लिस्तीन यात्रा के दौरान हुई दुश्वारियों और अनुभवों को साझा किया। पढ़िए, वहाँ के कठिन जीवन के संघर्ष का विस्तार से वर्णन। 

दिल्ली में दो-दिवसीय युवा सोशलिस्ट सम्मेलन का आयोजन

समाजवादी आंदोलन के 90 साल पूरा होने के ऐतिहासिक मौके पर युवा सोशलिस्ट पहल के तत्वावधान में  दिल्ली में 31 अक्तूबर (आचार्य नरेंद्रदेव जयंती दिवस) से 1 नवंबर 2025 को दिल्ली में दो दिन के युवा सोशलिस्ट सम्मेलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन राजेंद्र भवन (गांधी शांति प्रतिष्ठान के सामने), दीनदयाल उपाध्याय मार्ग नई दिल्ली) में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक होगा।

आरएसएस ने भारत की आजादी में हिस्सा लेते हुए कौन सी कुर्बानियाँ दीं

आरएसएस के सौ वर्ष पूरे होने पर मोदी ने अपने भाषण में कहा कि देश की आजादी के लिए बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दीं और चिमूर जैसे कई स्थानों पर ब्रिटिश शासन का विरोध भी किया। उनके अनुसार राष्ट्र निर्माण में संघ का जबरदस्त योगदान है। लेकिन संघ का राष्ट्रवाद ‘अलग‘ था यह तब स्पष्ट हुआ जब पंडित नेहरू ने 26 जनवरी, 1930 को तिरंगा फहराने का आव्हान किया। हेडगेवार ने भी झंडा फहराने का आव्हान किया, किंतु भगवा झंडा फहराने का। हेडगेवार नमक सत्याग्रह में शामिल हुए थे क्योंकि उन्हें लगा कि यह जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों को अपने संगठन की ओर आकर्षित करने का एक अच्छा अवसर है। इसलिए उन्होंने सरसंघचालक के पद से इस्तीफा दिया, जेल गए और जेल से रिहा होने के बाद दुबारा वही पद ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने अन्य लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के प्रति हतोत्साहित किया। एक संगठन के रूप में आरएसएस ने किसी भी ब्रिटिश विरोधी आंदोलन में भाग नहीं लिया।

राजस्थान : माहवारी के लिए सुविधा की सरकारी योजनाओं से वंचित हैं लड़कियां

माहवारी से जुड़ी चुनौतियाँ केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं हैं बल्कि यह सीधे शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समानता से जुड़ा मुद्दा है। जब लड़कियाँ पैड की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होती हैं, तो यह केवल उनका नुकसान नहीं बल्कि पूरे समाज का नुकसान है। सरकार और समाज यदि मिलकर सुनिश्चित करें कि हर गाँव में पैड और स्वच्छता सुविधाएँ समय पर उपलब्ध हों, तो लाखों लड़कियों का जीवन आसान हो सकता है

‘अडानी भगाओ छत्तीसगढ़ बचाओ’ के नारे के साथ संयुक्त किसान मोर्चा ने मनाया कॉर्पोरेट विरोधी दिवस

किसान मोर्चा के नेताओं नेअपने विरोध प्रदर्शन में कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को अपनी कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के विरोध में आम जनता और किसान समुदाय का तीखा विरोध झेलना पड़ेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने भाजपा की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे प्रदेश में किसानों और आदिवासियों को लामबंद करने की योजना बनाते हुए आज कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाया गया।

जेंडर समानता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर मंडराता ट्रम्प की नीतियों का खतरा

डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका के 47वें राष्टपति पद की शपथ लेते ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमरीकी सरकार द्वारा पोषित विश्व के अनेक देशों के स्वास्थ्य कार्यकमों पर आर्थिक रोक लगा दी, रोग नियंत्रण और रोग बचाव के लिए अमरीकी वैश्विक संस्था सीडीसी को विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ कार्य करने से प्रतिबंधित किया, और अनेक ऐसे कदम उठाये जिनका नकारात्मक प्रभाव वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और जेंडर समानता पर पड़ा। इसके दूरगामी परिणामों का एक आकलन 

सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख : अभिन्न जीवन साझा सरोकार

हाल ही में, घृणित छल-कपट का एक आश्चर्यजनक प्रदर्शन करते हुए, दिलीप मंडल ने न केवल कम चर्चित, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण मुस्लिम महिला, फातिमा शेख, जो सामाजिक समानता और लैंगिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध थी, की यादों को मिटाने का न केवल बीड़ा उठाया है, बल्कि वास्तव में उसके अस्तित्व को ही नकार दिया है। उन्होंने यह बेतुका दावा किया है कि फातिमा शेख उनकी अपनी कल्पना की उपज है, जिसे उन दिनों धर्मनिरपेक्षता के महत्व को बढ़ावा देने के लिए गढ़ा गया था, जब वे खुद एक प्रतिबद्ध धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति थे!

राजस्थान : आदर्श गांव के लिए बुनियादी सुविधाएं होना जरूरी है

एक गांव वह है जहां लोगों को जीवन की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, वे आत्मनिर्भर हों, परस्पर प्रेम और सम्मान रखें और अपने संसाधनों का उचित उपयोग करें, उसे एक आदर्श गाँव कहा जा सकता है। राजस्थान के धुवालिया नाड़ा एक ऐसा ही गाँव है, जहां जीवन की सभी आधारभूत सुविधायीं उपलब्ध है।

राजस्थान : भौगोलिक परिस्थिति में बदलाव के चलते कृषि संकट से जूझ रहें हैं किसान

रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण पहले से ही पानी की सीमित मात्रा का सामना कर रहे इन किसानों के सामने अप्रत्याशित बारिश समस्या बनती जा रही है।  लगातार बदलते पर्यावरण के कारण मानसून की बारिश असमय होने लगी है, जिसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। सिंचाई की जरूरत के समय वर्षा के न होने से सूखे की स्थिति बनती जा रही है।

देश में फैलाया जा रहा सांप्रदायिक जहर आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद कर देगा – राम पुनियानी

इतिहासकार प्रो. राम पुनियानी ने छत्तीसगढ़ के सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित 'साम्प्रदायिक सद्भाव की विरासत और देश की वर्तमान परिस्थितियाँ'  विषय पर आयोजित व्याख्यान व सम्मान समारोह में शामिल हुए। पुनियानी जी साहस के साथ सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ बोल और लिख रहे हैं। इनके लेख आरएसएस द्वारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ फैलाई जा रही नफरती ताकतों और इतिहास बदलने की कार्यवाही पर केंद्रित होते हैं। रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भी उन्होंने अपना वक्तव्य इसी बिन्दु को ध्यान में रखते हुए दिया।

अनूपपुर : सर्व सेवा संघ की राष्ट्रीय कार्य समिति की 91वीं बैठक

सर्व सेवा संघ इस आचरण के निषेध स्वरूप अपने 91वें अधिवेशन में कार्यसमिति के सदस्य 23 दिसंबर 2024 सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक उपवास रखेंगे।
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