Thursday, May 14, 2026
Thursday, May 14, 2026




Basic Horizontal Scrolling



पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

होमविविध

विविध

फ़लिस्तीन की जमीनी हकीकत : यात्रा से लौटकर

एक ज़िंदा शहर के ज़िंदा लोग किस तरह से अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं कि उन्हें पानी, बिजली और काम के लिए जूझना पड़ रहा है। कॉमरेड विनीत अपनी फ़लिस्तीन यात्रा के दौरान बेतेलहम, जेरूसलम, नाबलूस, जेनिन, आरमीनिया, जेरिकों तथा जोर्डन वैली गए थे। उन्होंने फ़लिस्तीन यात्रा के दौरान हुई दुश्वारियों और अनुभवों को साझा किया। पढ़िए, वहाँ के कठिन जीवन के संघर्ष का विस्तार से वर्णन। 

दिल्ली में दो-दिवसीय युवा सोशलिस्ट सम्मेलन का आयोजन

समाजवादी आंदोलन के 90 साल पूरा होने के ऐतिहासिक मौके पर युवा सोशलिस्ट पहल के तत्वावधान में  दिल्ली में 31 अक्तूबर (आचार्य नरेंद्रदेव जयंती दिवस) से 1 नवंबर 2025 को दिल्ली में दो दिन के युवा सोशलिस्ट सम्मेलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन राजेंद्र भवन (गांधी शांति प्रतिष्ठान के सामने), दीनदयाल उपाध्याय मार्ग नई दिल्ली) में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक होगा।

आरएसएस ने भारत की आजादी में हिस्सा लेते हुए कौन सी कुर्बानियाँ दीं

आरएसएस के सौ वर्ष पूरे होने पर मोदी ने अपने भाषण में कहा कि देश की आजादी के लिए बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दीं और चिमूर जैसे कई स्थानों पर ब्रिटिश शासन का विरोध भी किया। उनके अनुसार राष्ट्र निर्माण में संघ का जबरदस्त योगदान है। लेकिन संघ का राष्ट्रवाद ‘अलग‘ था यह तब स्पष्ट हुआ जब पंडित नेहरू ने 26 जनवरी, 1930 को तिरंगा फहराने का आव्हान किया। हेडगेवार ने भी झंडा फहराने का आव्हान किया, किंतु भगवा झंडा फहराने का। हेडगेवार नमक सत्याग्रह में शामिल हुए थे क्योंकि उन्हें लगा कि यह जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों को अपने संगठन की ओर आकर्षित करने का एक अच्छा अवसर है। इसलिए उन्होंने सरसंघचालक के पद से इस्तीफा दिया, जेल गए और जेल से रिहा होने के बाद दुबारा वही पद ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने अन्य लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के प्रति हतोत्साहित किया। एक संगठन के रूप में आरएसएस ने किसी भी ब्रिटिश विरोधी आंदोलन में भाग नहीं लिया।

राजस्थान : माहवारी के लिए सुविधा की सरकारी योजनाओं से वंचित हैं लड़कियां

माहवारी से जुड़ी चुनौतियाँ केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं हैं बल्कि यह सीधे शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समानता से जुड़ा मुद्दा है। जब लड़कियाँ पैड की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होती हैं, तो यह केवल उनका नुकसान नहीं बल्कि पूरे समाज का नुकसान है। सरकार और समाज यदि मिलकर सुनिश्चित करें कि हर गाँव में पैड और स्वच्छता सुविधाएँ समय पर उपलब्ध हों, तो लाखों लड़कियों का जीवन आसान हो सकता है

‘अडानी भगाओ छत्तीसगढ़ बचाओ’ के नारे के साथ संयुक्त किसान मोर्चा ने मनाया कॉर्पोरेट विरोधी दिवस

किसान मोर्चा के नेताओं नेअपने विरोध प्रदर्शन में कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को अपनी कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के विरोध में आम जनता और किसान समुदाय का तीखा विरोध झेलना पड़ेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने भाजपा की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे प्रदेश में किसानों और आदिवासियों को लामबंद करने की योजना बनाते हुए आज कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाया गया।

भाजपा और आरएसएस की हिंदुत्ववादी मानसिकता स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के लिए सबसे बड़ा खतरा है

बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने देश में हिंदुत्ववादी ताकतों के मंसूबों को भापते हुए उस समय जो चिंता व्यक्त की थी वह अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक स्थिति में पहुँच चुकी है। ऐसे में हमें आपसी भाई चारे को बनाये रखते हुए बीजेपी और आरएसएस के लोगों से दूर रहने की जरूरत है।

कांग्रेस को लेकर दूसरे दलों में पनप सकती है असुरक्षा की भावना  

राहुल गांधी की तारीफ में भाजपा के नेता भारतरत्न लालकृष्ण आडवाणी का यह कहना कि इस व्यक्ति में निर्णय लेने की गजब की क्षमता तो है ही साथ ही इस देश को आगे ले जाने की भी अपार क्षमता है, इससे भाजपा के लोग ही नहीं बल्कि इंडिया गठबंधन के भी कई नेता सकते में आ गए हैं।

जम्मू-कश्मीर में कैंसर के बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेने की जरूरत है

कैंसर से होने वाली मौतों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं जो एक चिंता का विषय है। सरकार को कैंसर की रोकथाम के लिए इस दिशा में विशेष पहल करने की जरुरत है। भारत में जिस गति से कैंसर के मामलों में इजाफा हो रहा है उस गति से वह दिन दूर नहीं होगा जब भारत में कैंसर के सर्वाधिक रोगी होंगे।

पटना के हवाई अड्डे की बघेरा बस्ती का हाल, मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे स्थानीय लोग

हमारे देश की एक बड़ी आबादी आज भी ऐसी है जो शहरों और महानगरों में आबाद है। लेकिन वहां शहर के अन्य इलाकों की तरह सुविधाओं का अभाव होता है। सरकार की ओर से इन बस्तियों में रहने वाले लोगों को पीने का साफ पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जहां पराली जलाना किसानों की जरूरत है वहीं पर्यावरण प्रदूषण सबसे बड़ा सवाल

गेहूं और धान की फसल काटने के बाद किसान खेतों में पराली जलते हैं लेकिन इधर सरकार इसे जलाने पर प्रतिबंध लगा दी है ताकि प्रदूषण न फैले। लेकिन किसान पराली जलाते ही हैं। कृषि के जानकार अमृतांज इंदीवर ने बताया की इसले बदले जैविक खाद बायोमास ऊर्जा और मशरूम शेड बनाकर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है 

तमिलनाडु : मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने दूरदर्शन के ‘लोगो’ में बदलाव को भाजपा की साजिश और भगवाकरण की शुरुआत बताया

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा है कि भाजपा हर चीज का भगवाकरण करने की साजिश कर रही है। इसी साजिश के तहत दूरदर्शन को लाल से नारंगी रंग में रंग दिया गया।
Bollywood Lifestyle and Entertainment