भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी बाणसागर नहर परियोजना

मुकेश पाण्डेय

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मीरजापुर। सुनिये… सुनिये… सुनिये.. प्रधानमंत्रीजी को सुनिये। उनको सुनिये, जिन्होंने आपके लिए करोड़ों का सौगात दिया है। उन करोड़ों के सौगात की हकीकत को देखिये। फीता काटने वाली नीति को देखिये और उनसे मिलने खैरात की भीख को देखिये। यह बाण सागर परियोजना है। कहने को तो इसका शिलान्यास सन 1978 में हुआ था, और उद्घाटन सन 2018 में हुआ था। बाणसागर परियोजना हजारों किसानों के लिए खुशियों का सौगात देने वाला था, लेकिन यह सौगात बट गया, ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच में। कमबख्त फीता काटने की आदत ने नेताओं से फीता भी कटवा दिया, जहां फीता काटे 3 साल बीत गए, और किसानों को तो बस ढेला भर आश्वासन मिला, वहीं ठेकेदारों के हिस्से पैसे वालीं मलाई आई। विंध्य क्षेत्र के बहुउद्देशीय बाणसागर नहर परियोजना का कार्य पूरा होने के बाद नरेंद्र मोदी ने बड़े ही भाव के साथ लंबे-लंबे चाव के साथ किसानों की पानी की समस्या की जख्म की घाव को भरने की बात कहा था। लोकार्पण को हुए 3 साल हो गए, मोदी जी दिल्ली लौट गए और किसानों को एक बूंद पानी नहीं मिला। 35 सौ करोड़ की लागत के बाद लगभग 39 सालों बाद नहर बनकर तैयार हुआ था। यह नहर एशिया की बड़ी नहरों में से एक है। बाढ़ सागर नहर जो कि 170 किलोमीटर से गई हुई है, इस नहर से काफी संख्या में किसानों की सिंचाई होनी थी। एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन राज्यों से होकर गुजरने वाली इस नहर से लाखों हेक्टेयर भूमि की फसलों की सिंचाई होने का अनुमान था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक घंटे तक चली भाषण में अधिकारियों, मंत्रियों और संतरियों की तारीफ में तमाम कसीदे पढ़े गए। किसानों को लगा कि पानी मिलेगा, लेकिन आज तक उस नहर से एक बूंद पानी किसानों को नसीब नही हुआ।

क्या है बाणसागर नहर परियोजना ?

बाणसागर बाँध की भयावह स्थिति

बाणसागर नहर परियोजना का मुख्य बांध मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के देवलोंद गांव के पास सोन नदी पर स्थित है। इस मुख्य बांध की कुल लंबाई 1020 मीटर है, जिसमें से 671.72 मीटर का पक्का बांध है। इस बाण सागर परियोजना से मध्यप्रदेश में 1.54 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 1.50 लाख हेक्टेयर और बिहार राज्य में 94 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होने की उम्मीद थी, लेकिन अभी तक ऐसा नही हुआ।

कब रखी गयी थी इस बांध का आधारशिला

उत्तर प्रदेश के हिस्से की ऐतिहासिक बाणसागर नहर परियोजना का कार्य 1997 में शुरू हुआ था। एशिया की इस सबसे बड़ी परियोजना पर लगभग 3500 करोड़ रुपए खर्च आया। 170 किमी टनल व नहर के माध्यम से परियोजना को पूरा किया गया है। 39 साल बाद इस परियोजना को पूर्ण कराया गया था। इस परियोजना का मूल्य आधार सन 1978 में रखी गयी थी, जहां सन 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने शिलान्यास किया था। परियोजना दस साल में पूरा किया जाना था, लेकिन 39 साल बाद भी पुरा नही हुआ।

जनपद के 75 हजार हेक्टेयर की होनी थी सिंचाई

बाणसागर परियोजना से जनपद के लगभग 75 हजार 309 हेक्टेयर का सिंचाई होना था। पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली नहर से उम्मीद जगी थी कि किसानों की वह समस्याएं दूर होगी। जिसकी समस्या हमेशा रहती है, लेकिन आज तक समस्याएं दूर नहीं हुई। किसानों को एक चेरुआ पानी आजतक इससे नसीब नही हुआ।

लोग क्या कहते हैं

किसान रामजगत कहते हैं कि अभी तक हमारे खेतों में पानी नहीं आया है। नहर में भी पानी नहीं है। इस योजना को शुरू हुए 20 साल हो गए हैं। अधिकारी आते हैं, बोलते हैं अब आएगा तब आएगा, लेकिन अब तक पानी नहीं आया। इस वर्ष उम्मीद थी कि पानी आएगा, लेकिन पानी नहीं आया। पानी ना आने से बड़ी दिक्कत होती है।

स्थानीय किसान मुसई के अनुसार अधिकारी आते हैं। घूम टहल के चले जाते हैं। पानी की बात को लेकर कुछ नहीं कहते हैं। आज तक एक नहर में पानी नहीं आया है। पानी आ जाएगा तो खेतों की सिंचाई अच्छे से होगी।

एक अन्य किसान रामराज ने बताया कि अभी पानी नहीं आया है। अधिकारी नहर को देखने आते हैं। अधिकारियों ने कहा था कि वैशाख में पानी आ जाएगा, लेकिन अभी तक पानी नहीं आया। हम लोगों की सिंचाई भगवान भरोसे होती है।

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