चुनाव का शोर भी, संसद से निकली विपक्ष की आवाज को दबा नहीं पाया 

देवेंद्र यादव

1 165

देश में पांच राज्यों के अंदर विधानसभा के चुनाव और संसद का बजट सत्र एक साथ चल रहा है। संसद के प्रथम सप्ताह में महामहिम राष्ट्रपति का अभिभाषण हुआ और उसके बाद वित्त मंत्री ने वर्ष 2022 और 23 का बजट पेश किया। संसद के पहले सप्ताह पर नजर डालें तो सत्र में विपक्ष अपनी आवाज उठाने में कामयाब रहा। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद के भीतर अपनी बात को जोरदार तरीके से रखा जिसकी गूंज संसद से निकलकर सड़कों पर सुनाई और दिखाई दी। वहीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी दमदारी के साथ अपनी बात रखी और सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए। राज्यसभा में आरजेडी के सांसद मनोज झा ने सत्ता पक्ष भाजपा सरकार की झाम बांध दी। मनोज झा ने राष्ट्रपति और उनके भाषण पर सवाल खड़े किए, इस तरह से संसद सत्र का पहला सप्ताह, हंगामे की भेंट नहीं चढ़कर लगभग शांतिपूर्ण रहा।
विपक्ष ने भी पूरे संयम का परिचय देते हुए, पिछले संसद के सत्रों में विपक्ष के ऊपर लगे उन आरोपों को की विपक्ष संसद को नहीं चलने देता संसद के भीतर हंगामा करता है, को भी धो दिया।

जहां एक तरफ सत्ताधारी भाजपा के नेताओं के खिलाफ विरोध का स्वर सुनाई दे रहा है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष की नेता प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, मायावती और जयंत चौधरी को जनता पलकों पर बिठाते नजर आ रही है। हालांकि भाजपा के प्रचार में भी कोई कमी दिखाई नहीं दे रही है। भाजपा के बड़े स्टार प्रचारक और चाणक्य अमित शाह ने पूरी कमान अपने हाथ में ले रखी हैं। अमित शाह उत्तर प्रदेश में डोर टू डोर प्रचार करते हुए नजर आ रहे हैं। और अमित शाह इस बार भी भाजपा 300 पार का एलान भी करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

अब मीडिया के अंदर और राजनीतिक गलियारों में संसद के सत्र को लेकर पहले सप्ताह में यह आवाज सुनाई नहीं दी की विपक्ष के कारण संसद का एक दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया, लेकिन अभी पहला सप्ताह समाप्त हुआ है आगे क्या होगा इस पर सबकी नजर है, क्योंकि पहले सप्ताह में विपक्ष ने सरकार पर जो आरोप लगाए हैं, और सवाल किया हैं उसका जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या देते हैं शायद इस पर सबकी नजरें होंगी।

यह भी पढ़े:

कांग्रेस की मजबूरी या राजनीतिक रणनीति

यह तो थी संसद के बजट सत्र की बात अब यदि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की बात करें तो, ज्यादातर राजनीतिक दलों की नजर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर दिखाई दे रही हैं और राजनीतिक गलियारों और देश में अधिक चर्चा भी पांच राज्यों के चुनाव को लेकर केवल उत्तर प्रदेश चुनाव की अधिक हो रही है। जबकि चुनाव तो गोवा उत्तराखंड मणिपुर और पंजाब में भी हो रहे हैं। यदि प्रथम चरण के मतदान के पहले की बात करें तो इसमें भी भाजपा से अधिक विपक्षी पार्टियां कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी प्रचार के लिहाज से आगे दिखाई दे रही हैं। जहां एक तरफ सत्ताधारी भाजपा के नेताओं के खिलाफ विरोध का स्वर सुनाई दे रहा है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष की नेता प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, मायावती और जयंत चौधरी को जनता पलकों पर बिठाते नजर आ रही है। हालांकि भाजपा के प्रचार में भी कोई कमी दिखाई नहीं दे रही है।

भाजपा के बड़े स्टार प्रचारक और चाणक्य अमित शाह ने पूरी कमान अपने हाथ में ले रखी हैं। अमित शाह उत्तर प्रदेश में डोर टू डोर प्रचार करते हुए नजर आ रहे हैं। और अमित शाह इस बार भी भाजपा 300 पार का एलान भी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। शाह के अलावा अन्य भाजपा के बड़े नेता भी उत्तर प्रदेश में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कौन सी पार्टी भारी है, और कौन सी पार्टी कमजोर है, यह अनुमान लगाना अभी मुश्किल है, लेकिन राजनीतिक पंडित और विश्लेषक भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच टक्कर बता रहे हैं, जो अभी जल्दबाजी होगा। क्योंकि अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि उत्तर प्रदेश चुनाव में पूर्ण रूप से एंट्री होना अभी बाकी है। संसद का पहला सप्ताह और उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव का पहला चरण विपक्ष के नाम होता हुआ दिखाई दे रहा है। लेकिन संसद की तरह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी देश के लोगों की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश नहीं गए हैं वह उत्तर प्रदेश चुनाव में वर्चुअल भाषण दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जनता को मोदी की उपस्थिति का शायद इंतजार है, और यह इंतजार की घड़ी कब खत्म होगी इसका अभी इंतजार करना होगा।


देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.