गोरखपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है 

देवेन्द्र यादव

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 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 फरवरी शुक्रवार को गोरखपुर शहर की सीट से अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।

योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के जिस लाव लश्कर के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया उससे लगता है कि गोरखपुर की सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और गठबंधन पार्टियों के दो अध्यक्ष, भाजपा के अन्य बड़े नेताओं की मौजूदगी मैं योगी आदित्यनाथ ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

योगी के नामांकन के समय भाजपा के बड़े नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़े कर दिए की क्या गोरखपुर सीट जिससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं चुनाव लड़ रहे हैं वह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है क्या? यदि गोरखपुर सीट भाजपा के लिए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए इतनी आसान थी तो फिर केंद्र के दो मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान सहित अन्य बड़े नेताओं की उपस्थिति की क्यों जरूरत पड़ी ? जबकि भा जा पा के अन्य प्रत्याशियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बड़े नेताओं के बगैर अपना नामांकन भरा है।

योगी आदित्यनाथ के नामांकन रैली में गृह मंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष किया मगर शाह ने ज्यादा फोकस गोरखपुर के विकास पर किया।

क्या इस बार उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव पूरी तरह से अमित शाह के कंधों पर ही है ? अमित शाह ने गोरखपुर में वर्ष 2017 और 2019 का जिक्र करते हुए बताया कि जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव की तैयारी हो रही थी तब मैं यहां आया था तब यहां पर भाजपा का अधिक वजूद नहीं था लोग कयास लगा रहे थे लेकिन जब जहां भाजपा ने मेहनत की तो उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनी,

योगी आदित्यनाथ के कुशल प्रशासन की तारीफ करते हुए शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में गोरखपुर में 5 साल में बहुत विकास हुआ।  शाह ने विकास कार्यों को गिनाया भी। उत्तर प्रदेश में भाजपा के चाणक्य अमित शाह की सक्रिय मौजूदगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैर मौजूदगी ( ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश चुनाव की घोषणा के बाद से अब तक उत्तर प्रदेश में इस तरह से मौजूद नहीं दिखाई दे रहे हैं जिस तरह से अमित शाह मौजूद दिखाई दे रहे हैं प्रधानमंत्री ने 5 जिलों के लोगों को वर्चुअल संबोधित किया है ) ऐसे में क्या इस बार उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव पूरी तरह से अमित शाह के कंधों पर ही है ? अमित शाह ने गोरखपुर में वर्ष 2017 और 2019 का जिक्र करते हुए बताया कि जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव की तैयारी हो रही थी तब मैं यहां आया था तब यहां पर भाजपा का अधिक वजूद नहीं था लोग कयास लगा रहे थे लेकिन जब जहां भाजपा ने मेहनत की तो उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनी, अब सवाल उठता है कि क्या अमित शाह 2017 के प्रचंड बहुमत को बरकरार रख पाएंगे या नहीं इसका अभी इंतजार करना होगा।

देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

 

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