Thursday, July 23, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

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ग्राउंड रिपोर्ट

बिहार : ईंटों के बीच दबे भट्ठा मजदूरों की व्यथा

ईंट भट्ठों में काम करने वाले मजदूर हमारी सभ्यता की नींव हैं। वे हमारी इमारतें बनाते हैं, हमारे घरों को खड़ा करते हैं, लेकिन उनके अपने घर रहने लायक नहीं होते। अगर हमें एक विकसित समाज बनाना है, तो हमें इन मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। वरना उनकी गरीबी की ये ईंटें हमेशा उनकी तरक्की का रास्ता रोकती रहेंगी।

रामपुर गांव : ‘क्राफ्ट हैंडलूम विलेज’ में बुनकरों का अधूरा सपना और टूटती उम्मीदें

रामपुर गांव की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं है, बल्कि यह उन लाखों कारीगरों और बुनकरों की कहानी है, जो सरकारी योजनाओं के अधूरे वादों और बाजार की बेरुखी के बीच फंसे हुए हैं। यह समय है कि सरकार और समाज मिलकर इनके सपनों को साकार करने के लिए कदम उठाए। अगर समय रहते इनकी मदद नहीं की गई, तो यह अद्वितीय कला और कौशल हमेशा के लिए खो जाएगा। पढ़िए नाजिश महताब की ग्राउंड रिपोर्ट।

बिहार में ‘हर घर नल का जल’ की हकीकत : बरमा गांव की प्यास

पिछले कई वर्षों से हर घर नल जल योजना की धूम मची हुई है और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में प्रचारित किया जा रहा है लेकिन वास्तविकता प्रचार के बिलकुल उलट है। लगातार बढ़ते साफ पानी के संकट के मद्देनज़र यह योजना एक मज़ाक बनकर रह गई है। बिहार के लाखों ग्रामीण गंदे और ज़हरीले पानी का इस्तेमाल करने को विवश हैं। गया जिले के बरमा गांव में पानी का कैसा संकट है और सरकार की योजना किस हालत में है इस पर नाज़िश मेहताब की रिपोर्ट।

अवधी में गानेवाली यूट्यूबर महिलाएं : कहीं गरीबी से रस्साकसी कहीं वायरल हो जाने की चाह

पिछले कुछ ही वर्षों में अवधी भाषी महिलाओं ने बड़ी संख्या में यूट्यूब पर अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराई है। यह ऐसी महिलाओं की कतार है जो निम्न मध्यवर्गीय और खेतिहर परिवारों से ताल्लुक रखती हैं और घर-गृहस्थी की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद अपने गीतों से एक बड़े दर्शक समूह को प्रभावित किया है। इनमें से कई अब पूर्णकालिक और स्टार यूट्यूबर बन चुकी हैं। अपने बचपन में सीखे गीतों को वे बिना साज-बाज के गाती हैं और लाखों की संख्या में देखी-सुनी जाती हैं। यू ट्यूब पर गाना उनके लिए न केवल अपनी आत्माभिव्यक्ति है बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता भी है। इसके लिए उन्होंने कठिन मेहनत किया है। परिवार के भीतर संघर्ष किया है। जौनपुर, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर जिलों के सुदूर गांवों की इन महिलाओं पर अपर्णा की यह रिपोर्ट।

पॉल्ट्री उद्योग : अपने ही फॉर्म पर मजदूर बनकर रह गए मुर्गी के किसान

भारत में पॉल्ट्री फ़ार्मिंग का तेजी से फैलता कारोबार है। अब इसमें अनेक बड़ी कंपनियाँ शामिल हैं जिनका हजारों करोड़ का सालाना टर्नओवर है लेकिन मुर्गी उत्पादक अब उनके बंधुआ होकर रह गए हैं। बाज़ार में डेढ़-दो सौ रुपये बिकनेवाला चिकन पॉल्ट्री फार्म से मात्र आठ रुपये किलो लिया जाता है। अब मुर्गी उत्पादक स्वतंत्र इकाई नहीं हैं। कड़े अनुबंध शर्तों पर वे कंपनियों के चूजे और चारे लेकर अपनी मेहनत से उन्हें पालते हैं और कंपनी तैयार माल उठा लेती है। मुर्गी उत्पादक राज्य और केंद्र सरकार से यह उम्मीद कर रहे हैं कि सरकारी नीतियाँ हमारे अनुकूल हों और हमें अपना उद्योग चलाने के लिए जरूरी सहयोग मिले। लेकिन क्या यह संभव हो पाएगा? पूर्वांचल के पॉल्ट्री उद्योग पर अपर्णा की रिपोर्ट।

रोटी रोज़गार के फेर में खानाबदोश जिंदगी की ओर बढ़ रहा है लोनिया समाज

प्रयागराज। सुबह 11 बजे का समय है, पर धूप और उमस इतनी तेज है कि चटक दुपहरिया होने का अहसास हो रहा है। मोबाइल...

कुप्रथा डायन की सूली पर एक और औरत का क़त्ल, क्रूरता ऐसी की ऑंखें भी निकाल ली

बिहार। अरवल में कुछ दबंगों द्वारा एक दलित महिला को पहले लाठी-डंडे से पीटा गया। दबंगों का मन मारने पीटने से नहीं भरा तब...

बिन बिजली सब सून, छोटे उद्यमी और किसान ‘कटौती’ से परेशान

प्रयागराज। प्रदेश में बिजली की अघोषित कटौती चल रही है। नहरें सूखी पड़ी हैं। डीजल 90 रुपये लीटर बिक रहा है। बिजाई (नर्सरी) डालने...

मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पहाड़ों से बढ़ रहा है पलायन

राज्य में पर्वतीय समुदाय की आजीविका की आस कृषि है। लेकिन वह भी बदलते जलवायु परिवर्तन के प्रहार से जूझ रही है। जिसकी वजह से किसानों की नई पीढ़ी इसे छोड़कर रोज़गार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रही है। जल्द ही ऐसा समय आएगा जब गांव में मकान तो होंगे लेकिन उसमें रहने वाला कोई नहीं होगा। मकानों में ताले ही देखने को मिलेंगे। ऐसी स्थिति में विकास किस प्रकार संभव हो सकेगा?

मध्य प्रदेश के बड़वानी में रोज़गार सृजन योजना से आदिवासी उद्यमियों ने संवारा जीवन

सफलता की ये कहानियां जमीनी स्तर के उन स्वयंसेवी संस्थाओं के महत्व पर जोर देती हैं, जो ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को उनका खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं और साथ ही प्रशिक्षण, मार्केट रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और अन्य जरूरी कौशल उपलब्ध कराते हैं।

रेलवे अंडरपास की मांग लेकर सालों से संघर्षरत हैं दर्जन भर गावों के किसान

इलाहाबाद-वाराणसी रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया जा रहा है। इसके तहत एक रेलवे ट्रैक के बग़ल दूसरा रेलवे ट्रैक बिछाया जा रहा है। साथ...
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