Tuesday, July 23, 2024
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मिर्ज़ापुर में टी बी का इलाज : दवाओं से ज्यादा पाखंड का डोज़

सरकार टीबी मुक्त भारत अभियान चला रही है ताकि 2025 तक देश से इसका समूल नाश हो सके। इसके लिए तरह-तरह के कार्यक्रम और योजनाएं लाई जा रही हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के मिर्जापुर जिले में टीबी के मरीजों की संख्या देखते हुए नहीं लगता कि 2025 तक इसका अंत हो पाएगा। मिर्जापुर जिले में पाँच साल में 636 टीबी मरीजों की मौत हो चुकी है। गाँव के लोग की ओर से पत्रकार संतोष देव गिरि ने इस पूरे मामले की छानबीन की और यह पाया कि जिले में टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है जबकि उनका इलाज समुचित रूप से नहीं हो रहा है। कहीं दवा का अभाव है तो कहीं भ्रष्टाचार और अराजकता का बोलबाला है। निःशुल्क सरकारी इलाज उपलब्ध होने के बावजूद डॉक्टर बाहर की दवाएँ लिखते हैं। उनका ज़ोर इस बात पर होता है कि मरीज़ उनकी बताई दुकानों से ही दवा खरीदे।

मिर्ज़ापुर : कहने को मंडल पर स्वास्थ्य का चरमराता ढाँचा ढोने को विवश

किसी मंडलीय अस्पताल उर्फ मेडिकल कॉलेज के पर्ची काउंटर पर साँड़ आराम फरमा रहा हो और अस्पताल के ठीक पीछे मेडिकल वेस्ट का डम्पिंग ग्राउंड हो तो आप आसानी से समझ सकते हैं कि यह अस्पताल शहर और जिले का स्वास्थ्य कितने बेहतरीन ढंग से दुरुस्त रखता होगा। इसके लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता भी नहीं है। बस विंध्याचल मंडल के मुख्यालय मिर्ज़ापुर आइये और यह नज़ारा देख लीजिये।

पूर्वांचल का स्वास्थ्य : पाँच करोड़ की आबादी का स्वास्थ्य रामभरोसे

सरकार जनता के स्वास्थ्य से खेल करने में तनिक भी पीछे नहीं रहती है। आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के मामले में अभी भी अन्य राज्यों की तुलना में पीछे है। उस पर पूर्वाञ्चल और भी पिछड़ा है, जहां एम्स के नाम पर गोरखपुर है और बनारस का सर सुंदरलाल हॉस्पिटल कहने को तो बहुत बड़ा हॉस्पिटल है लेकिन इसका स्टेटस एक रेफरल अस्पताल से अधिक नहीं। ऐसे में लोगों को प्राइवेट हॉस्पिटल की तरफ रुख करना मजबूरी हो जाती है। उत्तर प्रदेश में 19962 मरीजों पर एक डॉक्टर है।

वाराणसी : डॉ ओमशंकर के आमरण अनशन के कारण विभागाध्यक्ष पद से हटाया गया

सर सुंदरलाल अस्पताल के हृदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष को प्रशासन ने उनके पद से हटा दिया। जबकि उनके कार्यकाल का 2 माह शेष रह गया था। डॉ ओमशंकर अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ के के गुप्ता द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के कारण उन्हें पद से हटाने और हृदय रोग विभाग में बिस्तरों के संख्या (जो उपलब्ध है) मरीजों के लिए खोलने के लिए आमरण अनशन कर रहे हैं।

बिहार : गया जिले का उचला गाँव स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त की ओर अग्रसर

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुई थी तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि इसका इतना व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। उचला गाँव के हर घर में लगभग शौचालय बन गया है। गाँव की सफाई के लिए सुपरवाइज़र और एक सफाई कर्मचारी की नियुक्ति भी की गई है। स्वच्छ भारत मुहिम के चलते ही उचला गाँव आज स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त की ओर अग्रसर है।

राजस्थान : लूणकरणसर गांव के लिए क्या अस्पताल ज़रूरी नहीं?

आगामी 01 फ़रवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2024-25 का बजट प्रस्तुत करेंगी। जिसमें अन्य बुनियादी विषयों के साथ सबकी नज़र इस बात पर...

भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक आरोग्यस्वामी पॉलराज को मिला फैराडे पदक

वाशिंगटन (भाषा)। बिजली और इलेक्ट्रोकैमिस्ट्री पर अपने काम के लिए विख्यात  फैराडे ने इलेक्ट्रोलिसिस के नियम प्रस्तावित किए। उन्होंने बेंजीन और अन्य हाइड्रोकार्बन की...

बेपरवाह स्वास्थ्य विभाग, बिना इलाज के जीने पर मजबूर हैं ग्रामीण किशोरियां

संकुचित सोच के कारण आज भी समाज में माहवारी को अभिशाप माना जाता है। हालांकि यह अभिशाप नहीं बल्कि वरदान है। आज भी समाज...

ब्राउन-ब्लैक राइस और स्वास्थ्य का क्या संबंध है

वोलोंगोंग( ऑस्ट्रेलिया) (द कन्वरसेशन)। पूरे इतिहास में, चावल एक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ रहा है। यह वैश्विक आबादी के आधे से अधिक की पोषण संबंधी...

स्मार्टफोन से बच्चे स्मार्ट से अधिक आक्रामक बन रहे हैं

मुजफ्फरपुर, बिहार। सूचना क्रांति के इस दौर में पूरी दुनिया ग्लोबल विलेज बन गई है। आज तमाम अद्यतन जानकारी, सूचना, तकनीकी अनुसंधान, पठन-पाठन आदि मानव जीवन...

अमेरिकी दवा नियामक ने बंद नाक खोलने वाली दवा को पाया बेअसर

लंदन (द कन्वरसेशन)।  अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के एक सलाहकार पैनल ने पाया है कि बंद नाक खोलने के लिए अधिकांश सर्दी और...