बीपी मंडल के नाम पर सम्मान मिलना मेरे लिए गौरव की बात है       

 सुशीला टाकभौरे

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हिन्दी दलित साहित्य में सुशीला टाकभौरे एक जाना-पहचाना नाम है। कविता, कहानी,  उपन्यास के साथ ही आलोचना की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका जन्म 4 मार्च, 1954 ई. को बाद, मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के एक गाँव बानापुर में हुआ है l विकट परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त करनेवाली सुशीला जी नागपुर में एक प्राध्यापिका रही हैं। उनका लेखन दलित साहित्य में स्त्री चिंतन का महत्वपूर्ण आधार है। उनकी आत्मकथा शिकंजे का दर्द काफी चर्चा में रही है । हाल ही में उन्हें बिहार राजभाषा परिषद का बीपी मण्डल पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस मौके पर उनसे से विनोद कुमार मंडलवादी की बातचीत का अंश प्रस्तुत है

आपको बीपी मंडल पुरस्कार की बधाई l इस पुरस्कार की सूचना आपको कैसे मिली ?

मुझे व्हाट्सएप्प से पुरस्कृत होने की सूचना मिली l उसके बाद मेल आया l फिर मेरे पते नागपुर पर पुरस्कृत होने वाला पत्र भी आया l मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं थी l अतः जब मुझे सूचना मिली तो आश्चर्य और प्रसन्नता दोनों हो रही थी l वास्तव में, बीपी मंडल साहब के नाम पर राजभाषा, बिहार द्वारा पुरस्कृत होना मेरे लिए महत्वपूर्ण हैl यह पुरस्कार सम्भवतः हिंदी दिवस 14 सितम्बर, 2021 को पटना, बिहार में दिया जाये l इस पुरस्कार की राशि 2,00,000 रुपए है l मैं राजभाषा परिषद और सरकार का आभार प्रकट करती हूँ l

आत्मकथा शिकंजे का दर्द

पूरब से राजभाषा, बिहार द्वारा बीपी मंडल पुरस्कार मिलने पर क्या कहना चाहेंगी ?

पूरब से बीपी मंडल साहब की स्मृति में पुरस्कृत होना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता की बात है l मैं महाराष्ट्र से हूँ l नागपुर में हिंदी साहित्य की प्राध्यापिका रही हूँ l दलित साहित्य और चिंतन मेरे लेकन का केंद्र बिन्दु है l मेरी आत्मकथा शिकंजे का दर्द बहुत चर्चित है l पूरब के लोगों की मेरे साहित्यिक कर्म पर दृष्टि पड़ना और पुरस्कृत होना मेरे लिए प्रसन्नता की बात है l महाराष्ट्रभूमि – नागपुर बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर की भूमि है तो पूरब तथागत बुद्ध की भूमि है l ऐसी जगह से सम्मानित होना मेरे लिए अति प्रसन्नता और सुखदायक बात है l

बीपी मंडल के नाम पर आपको पुरस्कार दिया जा रहा है l क्या आप मंडल को अम्बेडकर के प्रतिरूप स्वरूप देखती हैं ?

मंडल इस राष्ट्र के उत्तर-अम्बेडकर हैं l ओबीसी के महानायक हैं l उन्होंने ‘मंडल आयोग’ लिख कर इस देश की 52% लोगों का उत्तर-संविधान लिख दिया l उन्होंने ‘मंडल आयोग’ से राष्ट्रनिर्माण की ऐतिहासिक पहल की l इस देश की 52% जनता को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा l उन्हें संवैधानिक अधिकार दिलाया l उनका चिंतन आधुनिक भारत की सबसे बड़ी मौन क्रांति है l  अतः ऐसी विभूति के नाम पर राजभाषा परिषद और बिहार सरकार द्वारा सम्मानित होना मेरे लिए गौरव की बात है l

विनोद कुमार मंडलवादी उत्तर प्रदेश शासन में समीक्षा अधिकारी हैं । वे ओबीसी साहित्य और समाज को लेकर विशेष कार्य कर रहे हैं।

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