झारखंड इप्टा और जन संगठनों ने पोस्टर प्रोटेस्ट निकालकर जताया विरोध

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झारखंड इप्टा और जन संगठनों ने पोस्टर प्रोटेस्ट निकालकर जताया विरोध

जमशेदपुर से  रवि

84 साल के फादर स्टेन स्वामी की न्यायिक हिरासत में मौत के विरोध में झारखंड में इप्टा की मेदिनीनगर, रांची, गढ़वा और जमशेदपुर इकाई और विभिन्न सामाजिक और राजनैतिक संगठनों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शनिवार को रोष सभा आयोजित की और अपना विरोध दर्ज़ किया. मेदिनीनगर में छहमुहान पर पोस्टर प्रोस्टेंट किया। शनिवार को अपराह्न 12.00 – 12.30 तक हुए पोस्टर प्रोस्टेंट के दौरान विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने कहा कि  देश के चुनिंदा लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जो दलितों, शोषितों, अल्पसंख्यकों और मजदूरों की बात करते हैं। उन विचारकों और लेखकों को चुन-चुन कर फंसाया गया।  इनमें फादर स्टेन स्वामी भी एक आरोपी बनाए गए। उन्होंने कहा, कि जब फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी हुई थी, उस समय भी वह अस्वस्थ थे। कई बीमारियों के बावजूद उन्हें जबरदस्ती गिरफ्तार कर महाराष्ट्र के जेल में डाला गया। जिस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन आदिवासी मूलनिवासी के लिए आवाज उठाने में लगाया, उनकी आवाज का ही गला घोंट  दिया गया। उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु बड़ी चुनौती लेकर सामने आई है। क्या इस देश में आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक, मजदूरों, महिला अधिकार की बात करने पर रोक लगा दी गई है? कहा गया कि न्याय, स्वतंत्रता, समता और मानव अधिकार की सुरक्षा के प्रति समर्पित  84 साल के फादर स्टेन स्वामी की न्यायिक हिरासत में निधन कोई सामान्य मौत नहीं है, बल्कि यह एक संस्थानिक हत्या है। फादर की मौत के मामले में न्यायिक जांच की मांग करते हुए दोषियों पर को चिन्हित करने और उन पर कार्रवाई करने की मांग भी की गई। मेदिनीनगर इप्टा से पोस्टर प्रोटेस्ट में शैलेंद्र कुमार, उपेंद्र मिश्रा, राजीव कुमार, केडी सिंह, रुचिर तिवारी, रविन्द्र भुइयां, रवि पाल, गौतम कुमार, शब्बीर अहमद, प्रेम प्रकाश, सरफराज आलम, देवेंद्र प्रसाद, गीता कुमारी, अनीता देवी, मो. जमालुद्दीन, ललन प्रजापति, मो दानिश, राजीव रंजन, शशि पाण्डेय, संजू ठाकुर, अजीत ठाकुर रांची इप्टा से फ़रज़ाना फारूकी, श्यामल मल्लिक, श्यामल चक्रवर्ती, इफ़्तिखार अहमद, जमशेदपुर से विक्रम, नवाज़, सत्यम, संजय और अर्पिता आदि शामिल थे ।

पोस्टर प्रोटेस्ट करता जमशेदपुर इप्टा

 

असंगठित क्षेत्र के कामगारों के पंजीकरण हेतु शिविर का आयोजन

वाराणसी से दीन दयाल सिंह

उत्तर प्रदेश राज्य के असंगठित क्षेत्र के निर्माण कार्य से जुड़े कामगारों का पंजीकरण श्रम विभाग के अंतर्गत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड  के अंतर्गत होता है और इसके अलावा जो अन्य कामगार हैं उनके लिए उत्तर प्रदेश राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड द्वारा पंजीकरण कराने की सुविधा है. यदि कोई कामगार साथी निर्माण कार्य से जुड़े हुए कामगारों की श्रेणी में आते है अथवा अन्य किसी कार्य को करते है तो उनके लिए पंजीकरण के अवसर उपलब्ध हैं . इस पंजीकरण से जहाँ एक ओर असंगठित कामगारों का आंकड़ा मिल पायेगा वही अनेक सरकारी योजनाओं के लाभ मिलने की पात्रता भी हो जायेगी.

उक्त दोनों  विभागों में पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी के लिए एक जागरूकता अभियान का संचालन सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट द्वारा पूरी तरह कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया गया. कचहरी स्थित डॉ. अम्बेडकर पार्क में आयोजित इस जागरूकता शिविर में आशा ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि असंगठित कामगारों अधिक से अधिक संख्या में अपना पंजीकरण करा कर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेना चाहिए. निर्माण कार्य में लगे 40 श्रेणी के  कामगारों का पंजीकरण श्रम विभाग में और इसके अलावा धोबी, मोची, दर्जी, नाई, रसोइया, नाविक, रिक्शा चालक, माली, कुली आदि 45 श्रेणी के कामगारों का पंजीकरण उत्तर प्रदेश राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के तहत ऑनलाइन हो रहा है.

आशा ट्रस्ट के साथी शिविर में

असंगठित कामगारों अधिक से अधिक संख्या में पंजीकरण करा कर सरकारी योजनाओं का लाभ लेना चाहिए: वल्लभाचार्य पाण्डेय

शिविर के दौरान कोविड से बचाव के बारे में भी जागरूक करते हुए कार्यकर्ताओं ने कोरोना के पूरी तरह सफाए के लिए दो गज की दूरी, मास्क और वैक्सीन है जरूरी के मूल मंत्र को अपनाने का आग्रह किया. पर्चे और स्टीकर के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया।

जागरूकता कार्यक्रम में प्रदीप कुमार सिंह, सूरज पाण्डेय, दीन दयाल सिंह, महेश कुमार, महेंद्र राठौर, विनय सिंह , धनञ्जय त्रिपाठी, रसेश, कमलेश यादव आदि की प्रमुख भूमिका रही.

 

पलिया गाँव में पुलिस प्रशासन द्वारा दलित उत्पीड़न के विरुद्ध  पंचायत

वाराणसी से अमन विश्वकर्मा

ग्राम पलिया ,आजमगढ़ में दलित महिला के साथ हुई हिंसा और दुर्व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन करते

आजमगढ़। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में लगभग 15 दिनों से दलित उत्पीड़न के खिलाफ चल रहे आंदोलन में सोमवार को गोधौरा में दलित महापंचायत में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गौरतलब है कि रौनापार थाने के पलिया गांव में पुलिस प्रशासन द्वारा दलित परिवारों का मकान तोड़ दिया गया था । उधर इसी कड़ी में जहानागंज थाने के गोधौरा गांव में दलितों के ऊपर उत्पीड़न की पुलिसिया कार्रवाई लगातार चल रही थी। इसके विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी ने आंदोलन का आगाज किया था। इस क्रम में कलेक्ट्रेट स्थित रिक्शा स्टैंड पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के संगठन सचिव अनिल यादव, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सचिव संतोष कटाई, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष विशाल दुबे एवं शहर युवक कांग्रेस के अध्यक्ष अमर बहादुर यादव समेत एनएसयूआई के प्रदेश सचिव मंजीत यादव ने उपवास सत्याग्रह शुरू कर दिया था।

दलित उत्पीड़न के विरोध में बुलाई गयी दलित महापंचायत में शिरकत करते हुए पंजाब के मंत्री राज कुमार वेरका ने कहा कि ‘गद्दारों के हम थप्पड़ खाएंगे अभी हम इतने भी मजबूर नहीं हुए हैं । हम बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के लड़ाके हैं। देश प्रेम में हर जोर जुल्म सह लेंगे लेकिन अगर अब और पुलिसिया उत्पीड़न हुआ तो कलम छोड़कर तलवार भी उठा सकते हैं।’ उन्होंने साफ कहा कि दलितों के बोलने का मंच कांग्रेस में खुला हुआ है अगर दलितों को देश में सुरक्षित रखना है और आत्मस्वाभिमान के लिए लड़ना है तो कांग्रेस के साथ हाथ से हाथ मिला कर खड़े रहना ही होगा।

पूर्व सांसद कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता उदित राज ने कहा कि ‘मोदी और योगी के राज में लगभग 25 लाख लोगों का सुनियोजित मर्डर किया गया इसकी जवाबदेही सरकार की बनती है।’ महाराष्ट्र सरकार के उर्जा मंत्री राष्ट्रीय अध्यक्ष दलित कांग्रेस डॉ.नितिन राऊत ने कहा कि ‘आज उत्तर प्रदेश में दलितों की जहां हत्या हो रही है वहीं मायावती अपने घर के बाहर नहीं निकलतीं। क्या यही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और कांशीराम का आदर्श था? राजीव गांधी दलितों के अत्याचार के खिलाफ जो कानून लाए थे उस कानून की मायावती ने धज्जियां उड़ा दी। दलितों को अपने अधिकार के प्रति सचेत रहना होगा और संविधान बचाने के लिए उन्हें आगे आना ही होगा।’ उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में यह लड़ाई लगातार आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने तनुज पुनिया, भगवती चौधरी शाहनवाज आलम, मनोज यादव और पलिया के मामले पर उपवास सत्याग्रह चलाने के लिए अनिल यादव समेत सभी नेताओं का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ के मामले में सांसद अखिलेश यादव अभी भी मौन साधे हुए हैं। इतनी बड़ी बड़ी घटनाओं के बाद भी आजमगढ़ का सांसद होने पर भी वह कभी भी आजमगढ़ के लोगों का आंसू पोछने यहां नहीं आते लेकिन कांग्रेस का कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेगा।

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