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सवाल से भागता मुखिया, जवाब से कतराती सत्ता
ओस्लो की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठे सवाल आज पूरे देश के लोकतंत्र का आईना बन गए हैं। एक अकेली विदेशी पत्रकार ने 1.45 अरब लोगों के प्रतिनिधि से पूछा — अभिव्यक्ति की आज़ादी कहाँ है? अल्पसंख्यक क्यों डरे हुए हैं? चुनाव आयोग कितना निष्पक्ष है? जवाब के बजाय खामोशी मिली। ये खामोशी 12 सालों से संसद, सड़क और मीडिया में गूँज रही है। जब 'विश्व लोकतंत्र की जननी' का दावा करने वाला देश सवाल से भागता है, तो 5,000 साल पुरानी सभ्यता भी सिर झुका लेती है। आपातकाल के 21 महीनों को कोसने वाले, बिना घोषणा के 12 साल से प्रेस का गला घोंट रहे हैं। सवाल सिर्फ एक पत्रकार का नहीं - हर उस आवाज़ का है जिसे दबाया जा रहा है। लोकतंत्र पूछ रहा है - डर किसे है?
तेईस मार्च को भगत सिंह और लोहिया को याद करने के मायने
डॉ. राम मनोहर लोहिया फ़ासीवाद, पूँजीवाद और साम्राज्यवाद-विरोधी थे लेकिन समाजवाद के समर्थक थे। डॉ लोहिया का जर्मनी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ एक गहरा बौद्धिक और वैचारिक जुड़ाव था। इसी प्रभाव के चलते, 1934 में जर्मनी से लौटने के बाद, उन्होंने (24 वर्ष की आयु में) 'कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी' की स्थापना में सक्रिय योगदान दिया। वे इसकी कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने और पार्टी के मुखपत्र, 'कांग्रेस सोशलिस्ट' के संपादक नियुक्त किए गए। आज उनकी 116 वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए पढ़िए डॉ सुरेश खैरनार का यह लेख।
क्या भारत के पहले आदिवासी राष्ट्रपति संविधान की रक्षा करेंगे या चुप्पी साध लेंगे?
माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, आपके होम स्टेट ओडिशा में – नियमगिरी, गोपालपुर और पूरे दंडकारण्य में – आदिवासी कितने सालों से नुकसान पहुंचाने वाले डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का विरोध कर रहे हैं। भारत की आबादी में आदिवासी सिर्फ़ 8-9% हैं, लेकिन आज़ादी के बाद से डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की वजह से बेघर हुए लोगों में वे 75% हैं। उनके विरोध को नक्सलवाद का लेबल लगाकर कुचला जा रहा है। आपके साइन लेने और संविधान बनाने वालों द्वारा आदिवासियों को दिए गए खास अधिकारों को खत्म करने के लिए आदिवासी समुदाय की एक महिला को सबसे ऊंचे पद पर बिठाने की साज़िश है। मैं यह खुला खत खास तौर पर, श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, इस साज़िश से सावधान करने के लिए लिख रहा हूं।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : एपिस्टन फाइल के शिकारियों के देश में महिलाओं के सामने अभी भी कई पहाड़
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 115 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन दुनिया भर में पुरुष-प्रधान सोच अभी भी कायम है। ताकतवर नेताओं और उद्योगपतियों से जुड़े एपस्टीन के खुलासे हमें याद दिलाते हैं कि कितनी आसानी से महिलाओं के साथ आज भी मज़े की चीज़ जैसा बर्ताव किया जाता है। जब तक महिलाओं को मर्दों की खुशी के लिए सामान समझा जाता रहेगा, तब तक असली आज़ादी नामुमकिन रहेगी। पढ़िए डॉ सुरेश खैरनार का यह लेख।
अंध भक्त ही नहीं, अपशब्द और नफरती भाषण देने में सर्वोच्च नेता भी पीछे नहीं
देश में नफरत फैलाने वालों को राज्य का संरक्षण प्राप्त है, यहां तक कि केंद्र सरकार ने हाल ही में भारत मंडपम में सनातन राष्ट्र शंखनाद की बैठक के लिए 63 लाख रुपए दिए। इस कार्यक्रम में मुसलमानों के खिलाफ भाषण दिए गए, जिनका मुख्य विषय हिंदू राष्ट्र की मांग था। मुंबई स्थित सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड सेक्युलरिज्म द्वारा प्रस्तुत एक हालिया अध्ययन में घृणास्पद भाषणों के प्रकारों और विवरणों का गहन विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन के अनुसार, 2024 से 2025 के बीच घृणास्पद भाषणों की संख्या में कमी आई है। रिपोर्ट में सामने आया है कि सबसे अधिक घृणास्पद भाषण महाराष्ट्र सरकार में मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे (10) ने दिए, उसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (6), असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पांच-पांच भाषण दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन घृणास्पद भाषण दिए।
लोकसभा चुनाव: 19 अप्रैल से एक जून के बीच सात चरणों में होंगे चुनाव, देश भर में आदर्श आचार संहिता लागू
लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों का चुनाव आयोग ने ऐलान कर दिया है। चुनाव सात चरणों में 19 अप्रैल से एक जून के बीच आयोजित किया जाएगा और मतगणना 4 जून को होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सीएए संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार, 19 मार्च को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट, सीएए से जुड़ी लगभग 200 अधिक याचिकाओं की सुनवाई के लिए समहत हो गया है। कोर्ट, नागरिकता संशोधन नियमावली, 2024 के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर 19 मार्च को सुनवाई करेगा।
चुनावी बॉण्ड का आंकड़ा जारी, खरीदारों में अरबपति और भुनाने वालों में भाजपा सबसे आगे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एसबीआई ने इलेक्ट्रॉल बॉन्ड की सूची चुनाव आयोग को सौंप दी थी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने अपनी वेबसाइट पर इस बॉन्ड को खरीदने और भुनाने वालों की सूची जारी की। इस सूची में बॉन्ड भुनाने वालों में भाजपा का नाम सबसे ऊपर है।
सामाजिक न्याय पदयात्रा : दूसरे दिन कानपुर के मंगलपुर होते हुए झींझक पहुंची
देश में बढ़ती जातिगत विषमता, धार्मिक भेदभाव, राजनैतिक शून्यता के दौर में सामाजिक सरोकारों और न्याय के लिए सोशलिस्ट पार्टी इंडिया ने तीन दिवसीय यात्रा का आयोजन कानपुर देहात के माचा से कठारा तक का किया है। आज दूसरे दिन की रिपोर्ट
‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ पर उच्च स्तरीय समिति ने सौंपी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रिपोर्ट
समिति की सर्वसम्मत राय है कि एक साथ चुनाव कराया जाए। समिति एक साथ लोकसभा और राज्य के चुनाव करने के पक्ष में है। इसके बाद 100 दिनों के भीतर ही स्थानीय निकाय चुनाव की भी बात कही है। एक राष्ट्र एक चुनाव पर बनी उच्च स्तरीय समिति 2 दिसंबर 2023 को गठित की गई थी, जिसने 191 दिनों तक लगातार काम किया।
सुखबीर सिंह संधु और ज्ञानेश कुमार का नए निर्वाचन आयुक्त के नाम पर मुहर
पूर्व नौकरशाह ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधु का निर्वाचन आयुक्त के रूप में चयन किया गया। समिति की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल थे।

